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एक Idea से चमकी किसान की किस्मत, हर साल कमाता है इतने लाख रुपए

सब्जियों की बेजोड़ खेती की विशेषज्ञता है श्रीगंगानगर के ओमप्रकाश के परिवार को

Bhaskar News | Last Modified - Jan 02, 2018, 03:59 PM IST

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    दो बीघा में 10 तरह की सब्जियां, फूलों की नर्सरी, पौध भी करते हैं तैयार।

    श्रीगंगानगर. लेट्यूस (सलाद पत्ता), गांठ गोभी, पत्ता गोभी, नारंगी हरे रंग की (ब्रोकली) गोभी, पुदीना, पालक, हल्दी, दो-तीन किस्म की मिर्च, टमाटर, बेलदार सब्जियों के अलावा कुष्मांड कुल की सब्जियां। बैंगन, प्याज, मिर्च, गोभी, गेंदा, गुलाब, टमाटर सहित अनेक सब्जियों एवं फुलवारी के पौधों की नर्सरी। क्या आप सोच सकते हैं यह सारा काम कितने बीघा में होगा? महज दो बीघा में कई तरह की सब्जियों के साथ पौध तैयार कर बेचकर एक परिवार साल में 5 लाख रुपए कमाई करता है।

    - इतने छोटे से खेत में पानी संग्रह के लिए छोटी सी पक्की डिग्गी, स्प्रिंकलर, मिनी स्प्रिंकल, पाइप्स के जरिए पौधों की बूंद-बूंद सिंचाई करते हैं चक दो ई छोटी के ओमप्रकाश घोड़ेला और उनका परिवार।

    - डिग्गी पर सोलर पंप, केंचुआ खाद तैयार करने का अलग से प्लांट। भूमि भी सबसे अलग, निराली। खेत का एक इंच भी बेकार नहीं जाने देते ओमप्रकाश। वे उन किसानों के लिए प्रेरणा दायक हैं जिनके पास बहुत छोटी जोत है।


    बेलदार सब्जियां भूमि से ऊपर

    - ओमप्रकाश अपने खेत में बेलदार सब्जियाें का उत्पादन जमीन से ऊपर लेते हैं। खेत की क्यारियों की मेड़ पर बांस-बल्लियां लगाकर बेलें उपर चढ़ा देते हैं। हरा पत्ता, सुगंधित पत्ता, सेलरी पत्ता, ब्रोकली जैसी महंगी सब्जियाें की उपज का हुनर ओमप्रकाश ने पिता से सीखा। उनके खेत में मार्च-अप्रैल में पालक, दिसंबर-जनवरी में टिंडे और बारहमास पुदीना रहता है।


    पौध तैयार करने का नायाब तरीका

    - वे खेत में पौध तैयार कर किसानों को बेचते हैं। उनकी नर्सरी में मिर्च, गोभी, टमाटर आदि की पौध तैयार की जाती है। इसके लिए वे प्लास्टिक की ट्रे में कोकोपिट डालते हैं। प्रत्येक खाने में एक या दो बीज डालते हैं।

    - ओमप्रकाश के मुताबिक, कोकोपिट ऐसा चूर्ण है जिसमें पौध अंकुरण शीघ्र होती है।

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    धोरों में उगाए ताइवानी पपीते, एक पौधे से 4 हजार रु. तक मुनाफे की उम्मीद

    देचू पंचायत समिति के गांव रावतगढ़ में किसान राजूसिंह करणोत ने कृषि के क्षेत्र में नवाचार किया है। उन्होंने अपने फार्महाउस पर ताइवानी पपीते की खेती शुरू की है। जिले में ताइवानी पपीते की यह पहली खेती है। यह कम मेहनत व लागत में अच्छा मुनाफा देने वाली साबित होने की उम्मीद है। आसपास के किसान राजूसिंह का बगीचा देखने आ रहे हैं। कृषि पर्यवेक्षक कंवराराम यादव ने बताया कि पहले यहां के किसान पपीतें के एक-दो पौधे लगाते थे, लेकिन बड़ी संख्या में पपीते की यह पहली बार खेती की गई है। इससे अन्य किसानों का रुझान भी बढ़ेगा। किसान राजूसिंह ने बताया कि हर बार बेमौसम बरसात से फसलें खराब हो रही थी। छह महीने पहले काजरी से परामर्श के बाद 25 रुपए हजार रुपए की लागत से ताइवान किस्म के पपीते के एक हजार पौधे लगाए।

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    गुलाब की खेती कर घरेलू उद्योग लगाया गुलकंद, गुलाबजल व शर्बत बनाया

    कस्बा क्षेत्र में गुलाब की खेती से अब किसानों की खुशहाली बढ़ रही है। अधिकांश किसान तोल केंद्र पर अपने गुलाब के फूलों की सप्लाई कर रह रहे हैं। चिकारडा के सांवलिया मार्ग स्थित बस्ती के एक सामरिया परिवार ने गुलाब के फूलों को तोल केंद्र पर देने के बजाय करीब 6 माह से अपना घरेलू कुटीर उद्योग लगाकर गुलकंद, गुलाब जल, शर्बत आदि तैयार करने का काम शुरू किया है। किसान किशनलाल सामरिया ने बताया कि खुद की 5 बीघे पर की जा रही गुलाब की खेती से प्रतिदिन प्राप्त होने वाले करीब 50 किलो फूलों से देशी तरीके से कुटीर उद्योग में ओखली में शक्कर मिश्रण कर फूलों को मूसल से कूट-पीट कर गुलकंद तैयार किया जाता है। स्नातक तक शिक्षित बेटा देवकरण इस काम में सहयोग करते हुए भट्टी पर तांबे का भांडा चढ़ाकर संयंत्र द्वारा आसवन विधि से अर्क तैयार करता है। गुलकंद, गुलाब जल, गुलाब शर्बत के साथ ही नीम गिलोय व तुलसी अर्क भी तैयार किया जाता है। इन उत्पादों के तैयार करने में सास-बहू का भी योगदान रहता है। सामरिया ने बताया कि परिवार की फर्म के नाम का जीएसटी लाइसेंस भी ले रखा है। उन्होंने बताया कि इस कुटीर उद्योग के बारे में उन्होंने हल्दीघाटी जाकर उद्यमियों से दक्षता हासिल की। उसी तर्ज पर गृह उद्योग चालू किया।

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Web Title: A Farmers Earns 5 Lakh Rupees Per Year Success Story
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