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भामाशाह योजना: 2 साल पूरे होने पर सरकार 13 दिसंबर से कर रही बदलाव

इलाज के 314 पैकेज कम किए, निजी अस्पताल भी कम जुड़ेंगे, ‘राष्ट्रीय स्वास्थ्य बीमा’ भी बाहर

Dainik Bhaskar

Dec 10, 2017, 05:08 AM IST
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जोधपुर. दो साल पहले मरीजों को राहत प्रदान करने के लिए शुरू की गई राज्य सरकार की भामाशाह योजना में अब बदलाव कर दिया गया है। योजना का नवीनीकरण किया गया है, जिसमें इलाज के 314 पैकेज कम कर दिए गए हैं। इस योजना में पहले 1715 पैकेज मिलते थे, जो अब 1401 कर दिए गए हैं, लेकिन अब सरकार प्रति परिवार प्रीमियम राशि ज्यादा खर्च करेगी। पहले एक परिवार पर 370 रुपए प्रीमियम दिया जा रहा था जो अब 1263 रुपए हो जाएगा। कुछ नई शर्तें जोड़ी गई हैं, जिसके तहत संभागीय मुख्यालयों व जिला स्तर पर निजी अस्पताल इस योजना से कम संख्या में ही जुड़ पाएंगे। इधर, राष्ट्रीय स्वास्थ्य बीमा योजना के लाभार्थियों को भी इस योजना से बाहर कर दिया है। इस योजना को संशोधन के साथ 13 दिसंबर से लागू किया जाएगा।

सीएमएचओ डॉ. सुरेंद्रसिंह चौधरी ने बताया, कि नए एमओयू के अनुसार प्रति परिवार प्रतिवर्ष 1263 रुपए की राशि के प्रीमियम का भुगतान इंश्योरेंस कंपनी को किया जाएगा। प्रदेश में अभी करीब एक करोड़ परिवार भामाशाह स्वास्थ्य बीमा योजना से लाभान्वित हो रहे हैं। योजना में प्रतिवर्ष राज्य सरकार द्वारा प्रीमियम में 370 रुपए प्रति परिवार प्रतिवर्ष जमा कराया जा रहा था, लेकिन योजना में हुए नवीनीकरण के बाद 1263 करोड़ राशि का भुगतान किया जाएगा।

डॉ. चौधरी ने बताया, कि प्रदेश में 13 दिसंबर, 2015 बीमा योजना के माध्यम से सभी जिलों में मरीजों को कैशलेस उपचार का लाभ मिल रहा है। जोधपुर में अब तक 89,441 मरीजों को कैशलेस उपचार का लाभ मिला है। जिसमें 71, 609 मरीजों के लिए 60 करोड़ 54 लाख 41,371 का भुगतान हो चुका है। जिसमें 55,862 सरकारी अस्पतालों में तथा 33,579 मरीजों को निजी अस्पतालों में लाभ मिला है।

अस्पताल को भी होगा फायदा-नुकसान

- अस्पताल किसी मरीज को यदि डिस्चार्ज करने के तीन दिन बाद क्लेम सबमिट करता है तो अस्पताल को बीमा कंपनी की ओर से पैकेज राशि का आधा पैसा प्राप्त होगा।
- इसके अलावा यदि बीमा कंपनी के पास क्लेम तीस दिन के बाद जाता है तो अस्पताल का वह क्लेम निरस्त समझा जाएगा, साथ ही कोई पैसा भी नहीं मिलेगा।
- अगर कोई लामा (स्वेच्छा से चला जाता है) हो जाता है तो उस सूरत में अस्पताल यदि मरीज का क्लेम करता है तो बीमा कंपनी की ओर से उसे पैकेज की 75 प्रतिशत राशि देय होगी।
- यदि मरीज डॉक्टर की बिना जानकारी के अस्पताल से चला जाता है तो इस तरह के क्लेम में कोई राशि अस्पताल को देय नहीं होगी। पहले ऐसा नहीं होता था। अस्पताल इस तरह के मरीजों के क्लेम को जितने दिन अस्पताल में रुका उसके हिसाब से क्लेम बीमा कंपनी को देते थे और बीमा कंपनी उसका भुगतान कर देती थी।

50 बेड वाले हॉस्पिटल ही जुड़ेंगे

- भामाशाह योजना की नई क्रियान्विति होने पर कई छोटे-मोटे प्राइवेट अस्पताल बंद होने की कगार पर हैं। नए नियमों के तहत संभागीय मुख्यालय पर 50 और जिला स्तर पर 25 बेड क्षमता के अस्पताल ही भामाशाह योजना के तहत इलाज दे सकेंगे।
- जोधपुर में 33 निजी अस्पताल भामाशाह योजना के अंतर्गत पैनल में है। इसमें 10 अस्पताल ही नए योजना में भामाशाह में रह पाएंगें। हालांकि, योजना में गायनी विभाग के इलाज को प्राइवेट अस्पतालों के लिए खोला गया है, लेकिन उसके लिए जिला मुख्यालय पर निजी अस्पताल जो कि भामाशाह में आते हैं, उनको पचास बेड और डे-केयर अस्पतालों को बीस बेड की क्षमता की शर्त रखी गई है।

राजकोष में 893 करोड़ का सालाना भार

राजस्थान में 1 करोड़ 37 लाख परिवार में से 1 करोड़ परिवार भामाशाह योजना में चिह्नित हैं। सरकार पर अब 893 करोड़ का अतिरिक्त सालाना भार आएगा, क्योंकि पूर्व में योजना मे कंपनी को 370 रुपए प्रति परिवार के हिसाब से सरकार भुगतान कर रही थी जो कि अब बढ़ाकर 1263 रुपए कर दिया गया है। जिससे सरकार को नुकसान होना तय है।

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