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बीजेपी सरकार ने महज 66 को दी नागरिकता, 964 को पाकिस्तान लौटा दिया

मोदी ने पचपदरा की चुनावी सभा में की थी विस्थापितों के हक की वकालत

Dainik Bhaskar

Jan 16, 2018, 07:16 AM IST
BJP government gave citizenship only to 66 pak people in last years

जोधपुर. नरेंद्र मोदी चार साल पहले पचपदरा में चुनावी सभा में आए थे तब उन्होंने पाक विस्थापितों का दर्द भी साझा किया था। उन्होंने कहा था, कि बांग्लादेशियों की चिंता हर कोई करता है, मगर पाक विस्थापितों की कोई नहीं सुनता। इनकी चिंता होनी चाहिए, उनका हक मिलना चाहिए। भारतीय नागरिक की तरह सुविधाएं मिलनी चाहिए। यह जिम्मेदारी दिल्ली में बैठने वाली सरकार की है। समय बीत गया, मोदी प्रधानमंत्री बन कर रिफाइनरी का कार्य-शुभारंभ करने फिर से पचपदरा आ रहे हैं तो विस्थापितों ने अपना दर्द बयां किया है।

- विस्थापितों ने पीएम पोर्टल पर उनकी बात याद दिलाई और केंद्र में राजस्थान का प्रतिनिधित्व कर रहे मंत्रियों से भी कहा है कि वे पीएम के भाषण में उनकी बात भी आगे बढ़ाए, क्योंकि जो रिजिम केंद्र सरकार ने दिया है, वह राज्य सरकार स्तर पर डिलिवर ही नहीं हो रहा। पिछले दो सालों में राज्य सरकार ने महज 66 जनों को नागरिकता दी है, जबकि 2644 लोगों के आवेदन पेंडिंग पड़े हैं।

यही नहीं, लॉन्ग टर्म वीजा की 10 हजार अर्जियां केंद्र व राज्य सरकार के स्तर पर बिना निर्णय के पड़ी है और जोधपुर से तो 964 लोगों को पाकिस्तान लौटने के लिए मजबूर होना पड़ा है।

पीएम ने दर्द समझा, राज्य में परवाह नहीं

पीएम बनते ही मोदी ने गृह मंत्रालय के अधीन टास्क फोर्स गठित कराई, सिविल सोसायटी से ओपन सजेशन भी लिए। तीन नोटिफिकेशन निकाले और रिजिम भी दे दिया। इसमें नागरिकता देने, एलटीवी जारी करने, बैंक अकाउंट खोलने, स्कूलों में प्रवेश देने, काम-धंधा करने तथा घर खरीदने जैसी सुविधाएं शामिल थीं। केंद्रीय गृह सचिव रहे राजीव महर्षि भी छह माह पहले यहां कैंप लगाने आए और विस्थापितों के आवेदन लिए थे।

प्रदेश में क्या हुआ?
- भारत की नागरिकता के लिए प्रदेश भर से 2710 अावेदन हुए, जिनमें से 66 को ही नागरिकता मिली।
- जोधपुर में 14 को मिली, 2288 आवेदन कलेक्टर स्तर पर लंबित है। इसी तरह बाड़मेर में किसी को नहीं मिली, 42 इंतजार कर रहे हैं।
- एलटीवी के कुल 10046 केस पेंडिंग है, जिनमें से 4328 अर्जियां राज्य सरकार व 2367 जोधपुर स्तर पर पेंडिंग चल रही है।
- 2016 में 410 तथा 2017 में 604 रजिस्टर्ड विस्थापितों को पाकिस्तान लौटना पड़ा और 365 अनरजिस्टर्ड को डिपोर्ट कर दिया।
(नोट: सभी आंकड़े हाईकोर्ट में प्रस्तुत स्टेटस रिपोर्ट के मुताबिक।)

बेपरवाही की पीड़ा

- बैंक अकाउंट का मामला रिजर्व बैंक से सुलझा नहीं। एलटीवी उनकी हर सुविधाओं से जुड़ी है यानी बिना एलटीवी न राशन कार्ड बन रहे न स्कूलों में एडमिशन व काम धंधे की छूट प्राप्त हो रही है। जैसे पाकिस्तान से आए थे, लगभग वैसा ही जीवन जीना पड़ रहा है।


हाईकोर्ट ने भास्कर की खबर को पीआईएल बनाया था

- एलटीवी का ऑनलाइन आवेदन करने के बावजूद एक परिवार को पाकिस्तान लौटाने के मामले में भास्कर ने 6 अगस्त को “पाक से प्रताड़ित होकर आए परिवार को रोकने के लिए चीफ जस्टिस ने स्पेशल बैंच बैठा स्टे दिया, आदेश मिलने से पहले ट्रेन सीमा पार कर गई।’ खबर प्रकाशित की थी।

- इस खबर को हाईकोर्ट ने जनहित याचिका मान कर केंद्र व राज्य सरकार से जवाब मांगे थे। तब दो जनों को नागरिकता देने की शुरुआत हुई थी। इस याचिका में अगली सुनवाई 17 जनवरी को होनी है।

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