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बीमा कंपनी हाई बीपी की आड़ में बाइपास सर्जरी के खर्च का दावा खारिज नहीं कर सकती : लोक अदालत

प्रार्थी को एक महीने में दावा राशि 3 लाख 6 हजार 500 रुपए मय 8 फीसदी ब्याज व्यय सहित अदा करें।

Dainik Bhaskar

Jan 07, 2018, 07:44 AM IST
Can not dismiss claims of surgery expenses

जोधपुर. स्थाई लोक अदालत जोधपुर ने अपने एक निर्णय में व्यवस्था दी है, कि बीमा धारक को उच्च रक्तचाप होने से यह अवधारणा नहीं ली जा सकती है कि इसी वजह से उसे हृदय रोग हुआ है। अदालत के अध्यक्ष पूर्व जिला सेशन न्यायाधीश ओमकुमार व्यास, सदस्य मगनलाल बिस्सा केशरसिंह नरुका ने ओरिएंटल इंश्योरेंस कंपनी को आदेश दिया, कि प्रार्थी को एक महीने में दावा राशि 3 लाख 6 हजार 500 रुपए मय 8 फीसदी ब्याज व्यय सहित अदा करें।

पावटा निवासी नरेंद्र मेहता की ओर से अधिवक्ता अनिल भंडारी ने प्रकरण पेश कर कोर्ट को बताया, कि प्रार्थी ने 31 जनवरी 2015 से एक साल की अवधि की अप्रार्थी से पारिवारिक मेडिक्लेम पाॅलिसी करवाई थी। जून 2015 में उनके सीने में असहजता होने पर उन्होंने डॉक्टर से जांच करवाई और जुलाई 2015 में सुराणा अस्पताल, मुंबई में उनकी बाइपास सर्जरी की गई। बीमा कंपनी में दावा पेश किए जाने पर उन्होंने 14 दिसंबर 2015 को यह कहकर दावा खारिज कर दिया कि मरीज 1 माह से उच्च रक्तचाप से पीड़ित था और पाॅलिसी शर्त के अनुसार उच्च रक्तचाप से पीड़ित रोगी को दो साल की अवधि तक दावा देय नहीं हैं।

अधिवक्ता भंडारी ने बहस करते हुए कहा, कि बीमा कंपनी का यह निर्णय बेतुका हास्यास्पद है कि उच्च रक्तचाप का दावा दो साल तक देय नहीं होता है, जबकि वर्तमान दावा बाइपास सर्जरी के व्यय से संबंधित है और उच्च रक्तचाप से कोई लेना देना नहीं है। बीमा कंपनी की ओर से कहा गया, कि उच्च रक्तचाप की वजह से ही मरीज हृदय रोग से पीड़ित हुआ है, इसलिए उनका निर्णय सही है। स्थाई लोक अदालत ने प्रकरण मंजूर करते हुए कहा कि यह जरूरी नहीं है कि उच्च रक्तचाप से ही बीमाधारक हृदय रोग से पीड़ित हुआ हो और वैसे भी सारा दावा बाइपास सर्जरी व्यय का है। इसीलिए बीमा कंपनी उच्च रक्तचाप की आड़ में दावा खारिज नहीं कर सकती है, क्योंकि बीमा पॉलिसी के तहत हृदय रोग की बीमारी अपवर्जित नहीं है।

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