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देश के सर्वश्रेष्ठ खिलाड़ी घोषित हुए थे दवे साहब, देशभर की सुर्खियां बने

शतरंज में प्रदेश के पहले इंटरनेशनल रेटिंग प्राप्त और लगातार 7 बार राजस्थान के चैम्पियन रहे एसएस दवे का निधन

Dainik Bhaskar

Dec 28, 2017, 06:04 AM IST
शिवशंकर दवे शिवशंकर दवे

जोधपुर. शतरंज में अंतरराष्ट्रीय स्तर पर जोधपुर का नाम रोशन करने वाले शिवशंकर दवे (64) का बुधवार को दिल का दौरा पड़ने से निधन हो गया। 12 अक्टूबर 1953 को जन्मे दवे वर्ष 2011 में एयर इंडिया से सीनियर ट्रैफिक सुपरिंटेंडेंट के पद से सेवानिवृत्त हुए थे। वे प्रदेश के पहले इंटरनेशनल रेटिंग प्राप्त खिलाड़ी थे। वर्ष 1985 में दी वर्ल्ड चेस फेडरेशन (फीडे) ने उन्हें 2225वीं रेटिंग दी थी। वर्ष 1975-76 से 1982-83 तक लगातार सात बार राजस्थान चैंपियन रह कर उन्होंने धमाका कर दिया था। इस दौरान उन्होंने एक भी बाजी नहीं हारी।

- जोधपुर यूनिवर्सिटी का प्रतिनिधित्व करते हुए 1975 में उन्होंने ऑल इंडिया इंटर यूनिवर्सिटी चेस चैपिंयनशिप जीतकर अपने कॅरियर की शानदार शुरुआत की थी। उन्हें तब बेस्ट नेशनल प्लेयर घोषित किया गया था। मार्च 1979 में उन्होंने नामी खिलाड़ी नाजिर अली को मात देकर पूरे देश का चौंका दिया था।

- वर्ष 1972 से 1984 तक उन्होंने नेशनल बी चेस चैंपियनशिप में राजस्थान का प्रतिनिधित्व किया। वर्ष 1982 में वे इंडियन एयरलाइंस से जुड़े और नेशनल बी चैंपियनशिप में उन्होंने 35 बार एयरलाइंस टीम का प्रतिनिधत्व किया। उन्होंने फीडे की कॉमनवेल्थ चैंपियनशिप में मुंबई, नागपुर व चेन्नई में भाग लेने के अलावा सैकड़ों नेशनल-इंटरनेशनल टूर्नामेंट खेले।

शिवशंकर के जज्बे से ही 43 साल पहले हमने मद्रास की टॉप टीम का मात दी

- दवे साहब और मेरा करीब पांच दशक का साथ रहा। जब शतरंज के मोहरों पर उनका ध्यान जाता था तो लगता था कि कोई खिलाड़ी मैदान में शतक मारने या गोल करने के प्रयास में है। मुझे 43 साल पहले का वह दिन याद आता है, जब उनके नेतृत्व में जोधपुर यूनिवर्सिटी की हमारी टीम ने टॉप की मद्रास यूनिवर्सिटी को मात देकर फाइनल में जगह बनाई। पांच सदस्यीय उस टीम में मेरे अलावा शिवशंकर दवे, पुखराज भाटी, अमरसिंह जोशी व श्यामलाल हर्ष शामिल थे। मैच के एक दिन पहले डिनर के समय मद्रास के एक टॉप खिलाड़ी ने जोधपुर के एक सदस्य को 4-0 से हराने की चुनौती दे दी थी। इसके जवाब में उन्होंने भी मद्रास टीम को 4-0 से पीटने की चुनौती दे दी। चुनौती देने का बाद टीम का वह सदस्य काफी निराशा में डूब गया। जब मैं आैर शिवशंकर सोने जा रहे थे तो उसने हमारे सामने यह बात रखी। तब शिवशंकर ने कहा था- तुम चिंता मत करो, कल की बात कल करेंगे। अगले दिन मैंने आैर शिवशंकर ने मद्रास टीम को हराने की व्यूह रचना रची और मद्रास को 4-0 से मात देकर सबको चौंका दिया। शिवशंकर में शतरंज को लेकर एक अलग ही जज्बा था। इसी जज्बे से हम मद्रास की टीम को हरा कर ऑल इंडिया इंटर यूनिवर्सिटी में उप विजेता बने।

(जैसा कि विश्वनाथन आनंद के साथ खेल  चुके और नेशनल बी शतरंज चैपिंयनशिप के उप विजेता कांतिलाल दवे ने भास्कर को बताया।) (जैसा कि विश्वनाथन आनंद के साथ खेल चुके और नेशनल बी शतरंज चैपिंयनशिप के उप विजेता कांतिलाल दवे ने भास्कर को बताया।)
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शिवशंकर दवेशिवशंकर दवे
(जैसा कि विश्वनाथन आनंद के साथ खेल  चुके और नेशनल बी शतरंज चैपिंयनशिप के उप विजेता कांतिलाल दवे ने भास्कर को बताया।)(जैसा कि विश्वनाथन आनंद के साथ खेल चुके और नेशनल बी शतरंज चैपिंयनशिप के उप विजेता कांतिलाल दवे ने भास्कर को बताया।)
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