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कथाकार जसोल ने कहानी में बल्लू को डाकू तो पूर्व वीसी प्रो. राठौड़ ने वीर योद्धा बताया

किताबो में सुनाई गई एक कहानी के पात्र पर कथाकार व पूर्व वीसी में मतभेद

Danik Bhaskar | Dec 22, 2017, 06:32 AM IST

जोधपुर. शहर में डेजर्ट लीफ फाउंडेशन की ओर से आयोजित हुए तीन दिवसीय द ब्ल्यू सिटी चिल्ड्रन लिटरेचर फेस्टिवल ‘किताबो’ के अंतिम दिन बुधवार को कथाकार नाहरसिंह जसोल ने बल्लू की कहानी सुनाई थी। इसमें उन्होंने बल्लू को एक किरदार के रूप में डाकू बताया।

- बल्लू के लिए डाकू शब्द को लेकर जेएनवीयू के पूर्व वीसी प्रो. एलएस राठौड़ को एेतराज है, कई अन्य लेखकों ने भी जसोल से इस बारे में बात की है।

- जसोल का कहना है, कि उन्होंने कुछ गलत नहीं कहा है। बतौर कथाकार कई कल्पनाएं करते हैं कि ऐसा हुआ होगा।

बल्लू डाकू नहीं, वह वीर योद्धा था: प्रो. राठौड़
- जेएनवीयू के पूर्व वीसी व राजनीति के प्रोफेसर एलएस राठौड़ ने किताबो में नाहरसिंह जसोल की ओर से सुनाई गई कहानी में बल्लू को डाकू बताने पर एेतराज जताया है।

- उनका कहना है कि उसे डाकू कहना गलत है। बल्लू चंपावत नागौर के अमरसिंह राठौड़ का विश्वसनीय योद्धा व हरसोलाव का जागीरदार था।

- दूसरी बात, बल्लू की मूंछ का बाल बेटी की शादी के लिए नहीं, बल्कि आगरा पर हमला करने के लिए सैनिक जुटाने बाबत गिरवी रखा गया था। युद्ध में शहीद हुए अमरसिंह का शव लेकर बल्लू ने घोड़े से आगरा फोर्ट के ऊपर से छलांग लगा बहादुरी दिखाई थी।

बल्लू एक किरदार, कुछ गलत नहीं कहा: नाहर
- नाहरसिंह जसोल का कहना है, कि उन्होंने बल्लू को गलत अर्थ में डाकू नहीं कहा है। वह वीर था, इसमें कोई संदेह नहीं है।

- ‘राजस्थान की ऐतिहासिक बातें’ पुस्तक में ‘मूंछ के बाल का दाह संस्कार’ कहानी में बल्लू को उन्होंने एक किरदार के रूप में चित्रित किया है, जो डाकू की भूमिका में है।

- डाकू हमारे समाज में रहे हैं जो अन्याय के खिलाफ लड़ते थे, स्वाभिमानी होते थे। चारणों के दोहे में भी इसका उल्लेख है। लेखक ने कल्पना की है, एक किरदार की।

- उनकी कहानी के किरदार को समझना है तो उनकी ‘मूंछ के बाल का दाह संस्कार’ कहानी को पढ़ना होगा।