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हाईकोर्ट ने पूछा- नियम विरुद्ध बनीं कितनी बिल्डिंग सीज की गई हैं?

कोर्ट ने रोक के बावजूद इकोलॉजिकल जोन में कन्वर्जन को अवमानना बताया, अतिक्रमण नहीं हटाने पर जताई नाराजगी

Danik Bhaskar | Dec 13, 2017, 08:52 AM IST

जोधपुर. राजस्थान हाईकोर्ट के न्यायाधीश संगीत लोढ़ा व अरुण भंसाली की खंडपीठ के समक्ष मास्टर प्लान की सुनवाई के दौरान सरकार की ओर से अतिरिक्त महाधिवक्ता राजेश पंवार और अधिवक्ता सुनील जोशी ने बहस करते हुए बताया, कि अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई अौर कोर्ट के निर्देंशाें की पालना चल रही है। इस पर कोर्ट ने पूछा- यदि कार्रवाई चल रही है, तो बताओ जोधपुर में कितनी बिल्डिंग में पार्किंग री-स्टोर करवाई, या नियमों का उल्लंघन करने पर कितनी बिल्डिंग सीज की है? आदेश दिए हुए एक साल हो गया है।

इधर भास्कर ने तत्काल पड़ताल की तो सामने आया कि कोर्ट की फटकार पर नगर निगम ने स्वीकृत नक्शे का उल्लंघन कर बनाई गई कई इमारतों को सीज तो किया, लेकिन यह केवल दिखावा ही साबित हो रहा है। सीज इमारतों में कहीं व्यावसायिक गतिविधियां तो कहीं निर्माण कार्य बदस्तूर जारी है।


सुनवाई की शुरुआत में न्यायमित्र महेंद्रसिंह सिंघवी व विनीत दवे ने बहस करते हुए कोर्ट को बताया, कि अतिक्रमण हटाने, विभिन्न बहुमंजिला इमारतों में पार्किंग री-स्टोर करवाने या पार्किंग री-स्टोर नहीं करने पर उन्हें सीज करने, निकायों की वेबसाइट विकसित करने सहित विभिन्न निर्देशों की पालना रिपोर्ट पेश नहीं की गई है। इस पर कोर्ट ने कड़ी नाराजगी जताई।

एएजी पंवार व अधिवक्ता जोशी ने स्वीकार किया, कि पालना रिपोर्ट पेश नहीं की है, लेकिन अतिक्रमण हटाए जा रहे हैं, कोर्ट के निर्देशों की पालना हो रही है। इस पर कोर्ट ने जोधपुर में इमारतों पर कार्रवाई के संबंध में सवाल पूछा। कोर्ट ने गोचर भूमि पर किए गए अतिक्रमण हटाने के संबंध में भी जानकारी चाही और कहा, कि जिलों से आंकड़े इसलिए मंगवाए थे ताकि रिकॉर्ड रह सके, कार्रवाई क्या की गई है?

कोर्ट के बार-बार कहने पर सरदारपुरा में हुई अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई

सुनवाई के दौरान एएजी पंवार ने कहा, कि सरदारपुरा डी और ई रोड क्षेत्र में अतिक्रमण हटा रहे हैं। इस पर कोर्ट ने कहा- सरदारपुरा बी रोड जैसे कॉमर्शियल एरिया या व्यस्ततम एरिया से अतिक्रमण क्यों नहीं हटाते हो? इस पर बताया गया, कि वहां भी हटा रहे हैं। कोर्ट ने मौखिक टिप्पणी करते हुए कहा- आप यहां कहते कुछ और हैं और बाहर होता कुछ और है।

गौरतलब है कि कोर्ट पहले भी यह बात कह चुका है। हालांकि, नगर निगम के अतिक्रमण निरोधक दस्ते ने मंगलवार को न्यू कोहिनूर सिनेमा से लेकर आंध्रा बैंक के पीछे की गली में सड़क सीमा में बने कच्चे-पक्के अवरोधकों को हटाने का अभियान चलाया।

एक माह पहले दुबारा सीज की इसके बावजूद चल रहा कारोबार

बाईजी का तालाब क्षेत्र में कालूसिंह बोराणा की तीन मंजिला व्यावसायिक इमारत को नगर निगम ने वर्ष 2014 में अभियंता की मौका व तकनीकी रिपोर्ट के आधार पर सीज किया था। तत्कालीन आयुक्त ने राज्य सरकार के दिशा-निर्देश पर छह माह के भीतर भवन को स्वीकृत नक्शे के अनुरूप बनाने के शपथ पत्र पर 15 जनवरी 2015 को सीज मुक्त किया था। भवन मालिक ने बिना पार्किंग व सेटबैक छोड़े 22 दुकानें बना दी। पहली बार सीज किए जाने के समय 11 दुकानों पर ही शटर थे, इसलिए ये सीज हो गईं, लेकिन छह माह बाद सीज मुक्त होने पर उसने और 11 दुकानों पर शटर लगा दिए। एक माह पूर्व ही 14 नवंबर को तत्कालीन उपायुक्त (शहर एवं राजस्व) मोहनसिंह राजपुरोहित ने इस इमारत को दुबारा सीज कर दिया था। फिलहाल यहां दो दुकानों में व्यावसायिक गतिविधियां चल रही हैं।

14 दिन पहले ही सीज किया था अभी भी फिनिशिंग चल रही है

नगर निगम ने एक माह पहले एक शिकायत पर सर्किट हाउस रोड पर निर्माणाधीन तीन मंजिला मकान की मालिक अनुराधा पुत्री आेमप्रकाश से निर्माण व स्वामित्व संबंधी दस्तावेज मांगे, लेकिन भवन मालिक कोई दस्तावेज पेश नहीं कर पाई। वहीं निर्माण संबंधी कागजात भी निगम को नहीं दिखाए। इसके बाद बार-बार नोटिस देने पर भी जवाब नहीं दिया, तो गत 17 नवंबर को अंतिम नोटिस दिया गया और एक दिसंबर को निर्माणाधीन इमारत को सीज कर दिया गया। भवन में गेट नहीं लगे होने के कारण सीज का नोटिस चस्पां किया गया, लेकिन सफाई प्रभारी से लेकर अतिक्रमण विंग व अभियंता विंग को सीज इमारत में चल रहे फिनिशिंग कार्य की भनक तक नहीं है। उपायुक्त (सरदारपुरा) देवाराम सुथार का कहना है, कि निर्माणाधीन इमारत में गेट नहीं होने से यह दिक्कत आ रही है।

सरकार की ‘गली’: कन्वर्जन नए मास्टर प्लान के अनुरूप किया इसलिए अवमानना नहीं

हाईकोर्ट ने सुनवाई के दौरान कहा, कि वर्ष 2010 में रोक के बावजूद नया मास्टर प्लान बनाकर इकोलॉजिकल जोन में जयपुर जेडीए ने कन्वर्जन कर आदेशों की अवमानना की है। इस पर सरकार की ओर से कहा गया, कि कोर्ट ने मास्टर प्लान मॉडिफाई करने पर रोक नहीं लगाई थी। कन्वर्जन नए मास्टर प्लान के अनुसार किए गए हैं, इसलिए यह अवमानना नहीं है।

दरअसल, न्यायमित्र सिंघवी ने इकोलॉजिकल जोन में इंडस्ट्रीज के लिए मंगलम डेवलपर्स को कन्वर्जन की अनुमति देने के मामले में बहस करते हुए कोर्ट को बताया था, कि 9 दिसंबर 2010 को हाईकोर्ट ने इकोलॉजिकल जोन में किसी भी तरह के परिवर्तन और कन्वर्जन पर रोक लगाई थी। यह रोक अभी तक प्रभावी थी और इस वर्ष 12 जनवरी को कोर्ट ने विस्तृत आदेश जारी कर और पुष्टि कर दी। इसके बावजूद जेडीए जयपुर ने वर्ष 2025 का नया मास्टर प्लान बनाकर इकोलॉजिकल जोन को ही बदल दिया और इंडस्ट्री के लिए कन्वर्जन कर दिया, जो गलत है।

इसके अलावा मास्टर प्लान का मामला कोर्ट के समक्ष विचाराधीन था, यह जेडीए जयपुर के भी संज्ञान में था। इसी तरह 5 सितंबर 2011 को नया मास्टर प्लान बनाने पर स्पष्ट किया था, कि इस मास्टर प्लान के अधीन किए जाने वाले कन्वर्जन या अन्य कार्य इस याचिका के निर्णयाधीन रहेंगे। उनका कहना था, कि यदि जेडीए जयपुर के संज्ञान में नहीं होता तो इस शर्त का उल्लेख नहीं किया जाता। बहस अधूरी रहने के कारण कोर्ट ने अगली सुनवाई 18 दिसंबर को मुकर्रर की है।