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बजट 2018-19: बजट में मेरे लिए... उम्मीद, इंतजार और देशप्रेम

टैक्स स्लैब में कोई परिवर्तन नहीं, इसलिए नौकरीपेशा लोग अगले साल तक इंतजार करें

Dainik Bhaskar

Feb 02, 2018, 05:56 AM IST
अपने लिए हर वर्ग ढूंढ़ रहा, लेकिन ना दिख रहा-ना हाथ आ रहा अपने लिए हर वर्ग ढूंढ़ रहा, लेकिन ना दिख रहा-ना हाथ आ रहा

जोधपुर. केंद्रीय बजट में दिखाया गया कि भारत के भविष्य के लिए बहुत कुछ नया किया है, किसानों की आमदनी दोगुनी करनी है। देश बदल रहा है इसलिए कुछ त्याग भी करना है, इसलिए टैक्स स्लैब में इस बार कोई बदलाव नहीं है, 1 प्रतिशत सेस ज्यादा ही देना है। कस्टम ड्यूटी बढ़ा रहे हैं, ताकि मेक इन इंडिया को आगे बढ़ाया जा सके।

- इसमें जोधपुर का फर्नीचर चीन के मेटल व इंडोनेशिया के लकड़ी के फर्नीचर से प्रतिस्पर्धा कर ले, परंतु यह भी संभव बहुत कम लगता है, क्योंकि गुणवत्ता व दर में जमीन-आसमान का फर्क है।

- गृहस्थी संभालने वाली महिलाओं को भी त्याग करना है, क्योंकि जो वस्तुएं सस्ती हुई हैं उनमें अधिकांश उनके रोजमर्रा के काम की नहीं हैं।

- संपूर्ण परिदृश्य में जोधपुर इस बजट को उस तरह देख रहा है, जैसे किसी ने हथेली पर कुछ रख कर मुट्‌ठी बंद करवा दी हो लेकिन जब उसे खोलो तो दिखाई कुछ न दे। बस उम्मीद, इंतजार और देशप्रेम की भावना से इस बजट का स्वागत करें।

अपने लिए हर वर्ग ढूंढ़ रहा, लेकिन ना दिख रहा-ना हाथ आ रहा

बजट में शहरी क्षेत्र में रहने वालों, पेंशनर्स, उद्यमियों, गृहिणियों, युवाओं के लिए कुछ भी नहीं मिला। भास्कर के लिए खासतौर से खिंचवाई इस फोटो में शामिल महावीरपुरम् निवासी स्टूडेंट कनिका, एमबीए प्रदीप, गृहिणी गायत्री शर्मा, टेक्सटाइल उद्यमी श्रीकांत शर्मा व डिफेंस लैब से रिटायर इंद्रराज जोशी ने यही भावना प्रकट की, कि यह बजट वैसा ही है जैसे कुछ है तो सही, लेकिन न दिख रहा न हाथ आ रहा।

जेटली की पोटली से जोधपुर के लिए क्या निकला? एक्सपर्ट्स की नजर से...

experts view over budget 2018

मेरा गांव 
ऑपरेशन फ्लड की तर्ज पर ऑपरेशन ग्रीन्स आरंभ कर रहे हैंे। इससे 86 फीसदी लघु व सीमांत किसानों के लिए 22 हजार ग्रामीण हाट विकसित होंगे। मेरे गांव के भी 40 फीसदी एेसे किसान हैं, तो थोड़ा पैसा तो आएगा ही।

 

एक्सपर्ट व्यू 
लोहावट के प्रगतिशील किसान मंगनाराम खीचड़ बताते हैं, पशुपालकों के लिए किसान क्रेडिट कार्ड जारी करने की घोषणा, फसली ऋण बढ़ाकर 11 लाख करोड़ करना फसल की बढ़ती लागत के लिहाज से काफी नहीं है।

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मेरा परिवार

मुझे कोई चीज सस्ती नहीं चाहिए, क्योंकि सस्ते तो कॉकलियर इंप्लांट व सिल्वर फॉइल जैसी चीजें हुई हैं।  सब्जियां, जूते-चप्पल, टीवी-मोबाइल, फ्रूट ज्यूस-सनस्क्रीन क्रीम जैसे उत्पाद तो महंगे हो गए हैं।

 

एक्सपर्ट व्यू 

सीए डॉ. अर्पित हल्दिया कहते हैं कि देश के विकास में योगदान देने वाले टैक्सपेयर के परिवार को कोई अतिरिक्त फायदा नहीं है। इन परिवारों को जो सुविधाएं मिल रही हैं, वे सभी टैक्स नहीं देने वालों को भी मिल रही हैं।

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मेरे लिए 

मुझे खुशी है कि सरकार ने किसानों पर फोकस किया है। मैं अपनी बचत को नहीं देखूंगा, एक लाख से अधिक के लाॅन्ग टर्म केपिटल गेन और इक्विटी उन्मुख म्यूचुअल फंड की आय पर 10 प्रतिशत की दर से टैक्स चुकाऊंगा।

 

एक्सपर्ट व्यू 

सरदार पटेल पुलिस विवि के वित्तीय सलाहकार मंगलाराम विश्नोई के अनुसार स्टैंडर्ड डिडक्शन मद में 4 से 10 लाख वेतन वालों को 8 हजार मासिक का फायदा हो सकता है।

experts view over budget 2018

मेरा कारोबार

मेक इन इंडिया को प्रोत्साहित करने के लिए कस्टम ड्यूटी बदली है। मेटल फर्नीचर चाइना से आता है, वह मेरे उत्पाद से 25% सस्ता है। लकड़ी का इंडोनेशिया  से आता है जो 50 प्रतिशत सस्ता है। मैं प्रतिस्पर्धा नहीं कर पाऊंगा।

 

 

एक्सपर्ट व्यू 

जोधपुर हैंडीक्राफ्ट एक्सपोर्टर्स एसोसिएशन के अध्यक्ष डॉ. भरत दिनेश का कहना है, कि इंपोर्ट ड्यूटी बढ़ने का कोई फर्क नहीं पड़ेगा, क्योंकि वहां का फर्नीचर यहां के प्रॉडक्ट से 30 से 50 फीसदी सस्ता है। इतनी ड्यूटी बढ़ाते तो बात बनती।

 
experts view over budget 2018

मेरी नौकरी 
सरकार रोजगार बढ़ाने के लिए प्रतिबद्ध है। सरकारी व प्राइवेट नौकरियां करुंगा, मगर इनकम टैक्स स्लैब में कोई बदलाव नहीं है। तीन साल में सरकार ने बहुत बदलाव कर दिया है। अब मैं 1 प्रतिशत सेस और दूंगा।

 

एक्सपर्ट व्यू 
रिटायर्ड एक्सईएन यूएस शर्मा का कहना है, कि बजट से आम आदमी, नौकरीपेशा और रिटायर्ड कर्मचारी को रिलीफ नहीं है। सरकार ने केवल कृषि और ग्रामीण इलाके को ध्यान में रखा है। आयकर छूट की सीमा बढ़ानी थी।

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मेरा शहर 
आईआईटी, एम्स, एनएलयू, एफडीडीआई जैसे संस्थान एक साथ मेरे शहर में होना गौरव की बात है। इसलिए इस बजट में इन्फ्रास्ट्रक्चर 
पर कोई बजट नहीं मिलने का मुझे मलाल नहीं है।

 

एक्सपर्ट व्यू 
रियल एस्टेट कारोबारी जितेंद्र जैन कहते हैं, कि हर आम आदमी का सपना होता है खुद का घर खरीदना या बनाना। बजट से रियल एस्टेट को बहुत उम्मीद थी। इसमें सबसे बड़ी मार टैक्स के साथ रजिस्ट्री शुल्क की है।

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