जोधपुर

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हाईकोर्ट का फैसला- भाई की मृत्यु पर बहन को अनुकंपा नौकरी नहीं

रेलवे ने यह कहते हुए प्रार्थना पत्र खारिज कर दिया था कि उसके पिता जीवित थे और रेलवे से रिटायर थे।

Dainik Bhaskar

Feb 13, 2018, 08:06 AM IST
High Court s decision No compassionate job to sister on brother s death

जोधपुर. एक बहन ने अपने भाई की मृत्यु के बाद अनुकंपा नौकरी मांगी। भाई रेलवे में कार्यरत था और बहन उसी के साथ रहती थी। बहन ने रेलवे में आवेदन किया, इसे खारिज कर दिया गया, क्योंकि बहन अब अपने पिता के साथ रहती थी और उन्हीं पर निर्भर थी। रेलवे के आदेश को सेंट्रल एडमिनिस्ट्रेटिव ट्रिब्यूनल में चुनौती दी गई, ट्रिब्यूनल ने भी रेलवे के निर्णय को उचित ठहराया। अब ट्रिब्यूनल के आदेश के विरुद्ध दायर याचिका को राजस्थान हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश प्रदीप नंद्राजोग व न्यायाधीश रामचंद्रसिंह झाला की खंडपीठ ने खारिज कर दिया है।

याचिकाकर्ता कुमारी किरण चौधरी का भाई स्व. राजेश चौधरी रेलवे में कर्मचारी था और अविवाहित था। उसकी 10 अक्टूबर 2009 को मृत्यु हो गई। याचिकाकर्ता और मृतक के पिता मानाराम चौधरी भी रेलवे प्रोटेक्शन फोर्स में कर्मचारी थे और 31 अगस्त 2003 को रिटायर हो गए थे, अब पेंशन ले रहे हैं।

याचिकाकर्ता का कहना था, पारिवारिक विवाद के चलते उसने अपने भाई के साथ रहना शुरू किया और उसी पर निर्भर थी। राशन कार्ड में भी उसका नाम दर्ज है। रेलवे ने यह कहते हुए प्रार्थना पत्र खारिज कर दिया था कि उसके पिता जीवित थे और रेलवे से रिटायर थे। कोर्ट के निर्देश पर रेलवे ने वेलफेयर ऑफिसर को याचिकाकर्ता के पिता घर पर भी भेजा।

उन्होंने रिपोर्ट दी कि भाई की मृत्यु के बाद याचिकाकर्ता उसके पिता के साथ ही रह रही थी। इस पर ट्रिब्यूनल ने रेलवे के आदेश के विरुद्ध दायर वाद को खारिज कर दिया। ट्रिब्यूनल के आदेश को हाईकोर्ट में चुनौती दी गई।

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