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आसाराम के दर्शन करने वालों को कोर्ट ने कहा- पहले घर में माता-पिता की सेवा करो

जस्टिस व्यास ने मौखिक रूप से कहा कि कोर्ट में दर्शन करने क्यों आते हैं? घर पर ही दर्शन करो ना?

Danik Bhaskar | Jan 09, 2018, 07:18 AM IST

जोधपुर. राजस्थान हाईकोर्ट के न्यायाधीश गोपालकृष्ण व्यास और विनीत कुमार माथुर की खंडपीठ ने नाबालिग छात्रा के यौन उत्पीड़न के आरोपी आसाराम के मामले की सुनवाई जेल में शिफ्ट करने के पुलिस के आवेदन पर सोमवार को सुनवाई की। कोर्ट ने आसाराम के वकील और वरिष्ठ अधिवक्ता सज्जनराज सुराणा के साथ बदसलूकी करने वाले उदयमंदिर थानाधिकारी मदन बेनीवाल को कोर्ट में तलब किया और इस घटना के संबंध में तीन दिन में स्पष्टीकरण पेश करने के आदेश दिए हैं। मामले में अगली सुनवाई 17 जनवरी को होगी।

- कोर्ट को बताया गया कि आसाराम के दर्शन करने के लिए आने वाली महिलाओं से बदसलूकी की जाती है।

- इस पर जस्टिस व्यास ने मौखिक रूप से कहा कि कोर्ट में दर्शन करने क्यों आते हैं? घर पर ही दर्शन करो ना?

- उन्होंने श्लोक बोलते हुए कहा- मातृ देवो भव:, पितृ देवो भव:, आचार्य देवो भव:। पहले घर पर माता-पिता की तो सेवा करो, आचार्य तो तीसरे नंबर पर आते हैं।

बदसलूकी पर कड़ी नाराजगी

- कोर्ट ने वरिष्ठ अधिवक्ता सुराणा के साथ बदसलूकी पर कड़ी नाराजगी जताई। जस्टिस व्यास ने मौखिक रूप से टिप्पणी करते हुए कहा- वकील कोर्ट का ज्यूडिशियल ऑफिसर होता है। इस तरह कोर्ट कैम्पस में उनके साथ बदसलूकी होना अनुचित है, इसे बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। हमने भी वीडियो देखा है, हाथ पकड़कर धक्का दिया जा रहा था। पुलिस को निस्संदेह कानून व्यवस्था मेंटेन करने का अधिकार है, समर्थक न्यूसेंस करें तो शांतिभंग में उन्हें पाबंद करें, लेकिन अधिवक्ता की भी गरिमा रहनी चाहिए।

- कोर्ट ने संबंधित थानाधिकारी बेनीवाल को लंच के बाद तलब किया। दोपहर दो बजे पेश हुए बेनीवाल से जस्टिस व्यास ने मौखिक रूप से पूछा- ऐसा क्या हो गया था, कि वरिष्ठ अधिवक्ता को धक्के मारकर हटाना पड़ा। समर्थकों को रोकने के लिए कहा था, वकीलों को थोड़े ही रोकने के लिए कहा है। अगर समर्थक बलवा कर रहे हैं या हुड़दंग मचा रहे हैं, तो निश्चित रूप से उनके खिलाफ कार्रवाई करें, लेकिन वकील की भी गरिमा रहनी चाहिए।

कोर्ट ने एसएचओ से गलती के लिए अंडरटेकिंग देने को कहा

- बेनीवाल ने कोर्ट से आग्रह किया कि वे अपनी ड्यूटी कर रहे थे। कुछ समर्थक कोर्ट रूम के पास पहुंच गए थे। हजारों की भीड़ होने की वजह से वे वरिष्ठ अधिवक्ता को पहचान नहीं पाए, इस वजह से गलती हो गई। इस पर कोर्ट ने उन्हें लिखित में अंडरटेकिंग देने को कहा कि उनसे गलती हो गई और भविष्य में दुबारा ऐसी गलती नहीं करेंगे।

- इस पर वरिष्ठ अधिवक्ता एमआर सिंघवी और रवि भंसाली ने कोर्ट से कहा कि अंडरटेकिंग देने से क्या होगा, इन्होंने जान-बूझकर सुराणा को धक्का दिया है। वे पिछले साल-डेढ़ साल से आसाराम की ओर से पैरवी कर रहे हैं, सुराणा को बेनीवाल अच्छी तरह से जानते हैं। जब वकील के साथ ही एेसा दुर्व्यवहार कर दिया जाता है, तो बाकी के साथ कैसा व्यवहार किया जाता होगा। इसको हल्के में नहीं लिया जा सकता है। कानून-व्यवस्था की आड़ में वकील पर हाथ उठाने का अधिकार नहीं मिल जाता है।

- कोर्ट ने सभी पक्ष सुनने के बाद थानाधिकारी को इस मामले में स्पष्टीकरण पेश करने के आदेश दिए और अगली सुनवाई 17 जनवरी को मुकर्रर की है।

हड़ताल करने को लेकर आपस में उलझे वकील, नारे भी लगाए
- जैसे ही सुनवाई खत्म हुई, कुछ वकील हड़ताल करने का समर्थन करने लगे, वहीं कुछ वकीलों ने विरोध किया। हड़ताल का समर्थन करने वाले कुछ वकील कॉरीडोर में ही फर्श पर बैठ गए और नारेबाजी भी की। इन वकीलों का कहना था कि वकील के साथ बदसलूकी बर्दाश्त नहीं करेंगे। वे हाईकोर्ट एडवोकेट्स एसोसिएशन के अध्यक्ष रणजीत जोशी को बुलाने पर अड़ गए, लेकिन उनके नहीं आने पर कुछ देर बाद सभी वकील उठकर बाहर मेनगेट पर आ गए और यहां भी नारेबाजी की। हड़ताल के संबंध में हाईकोर्ट एडवोकेट्स एसोसिएशन व हाईकोर्ट लॉयर्स एसोसिएशन ने कोई निर्णय नहीं लिया। एक-डेढ़ घंटे तक गहमागहमी चलती रही।


काली पट्टी लगाकर जताया विरोध
राजस्थान हाईकोर्ट एडवोकेट्स एसोसिएशन व लॉयर्स एसोसिएशन से जुड़े कुछ वकीलों ने रिबन पर काली पट्टी बांधकर वरिष्ठ अधिवक्ता सुराणा के साथ हुई बदसलूकी करने पर सांकेतिक रूप से विरोध भी जताया। हालांकि कुछ वकीलों के काली पट्टी नहीं लगी हुई थी।

कोर्ट ने कहा- समर्थकों को कड़ा संदेश देकर आने से रोकें
- कोर्ट ने आसाराम की ओर से पेश हुए अधिवक्ता महेश बोड़ा से पूछा कि इतनी तादाद में समर्थक क्यों आ रहे हैं? बोड़ा ने कोर्ट से आग्रह किया कि समर्थकों को पहले भी सूचना प्रकाशित करवाकर मना किया जा चुका है, एक बार फिर मना कर दिया जाएगा। इस पर कोर्ट ने कड़ा संदेश देकर समर्थकों को यहां आने से रुकवाने के लिए कहा।

- पुलिस की ओर से पेश हुए एएजी एसके व्यास ने कहा कि आसाराम के समर्थकों का न्यूसेंस बढ़ता जा रहा है, कानून व्यवस्था को मेंटेन करने में दिक्कत का सामना करना पड़ रहा है, इसलिए सुनवाई को जेल में शिफ्ट किया जाए।

- बोड़ा ने इस पर आपत्ति जताते हुए कोर्ट से आग्रह किया कि सुनवाई अब अंतिम चरण में है, इसलिए इसे शिफ्ट नहीं किया जाए। कोर्ट ने आसाराम के समर्थकों द्वारा न्यूसेंस करने पर कड़ी आपत्ति जताई। साथ ही मौखिक रूप से आखिरी हिदायत देते हुए कहा कि अगर अगली पेशी पर भी समर्थकों का न्यूसेंस नहीं रुका, तो सुनवाई में जेल में शिफ्ट करनी पड़ेगी।