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डॉक्टर ने जॉब छोड़ 4 साल में बना दी आंखों के मूवमेंट से बीमारी पकड़ने की तकनीक

विदेशी मशीन भी पेशेंट की असंतुलन संबंधी बीमारी को नहीं पकड़ पाती

महावीर प्रसाद शर्मा| Last Modified - Feb 03, 2018, 06:32 AM IST

illness catching technique from Eye movement made by doctor
डॉक्टर ने जॉब छोड़ 4 साल में बना दी आंखों के मूवमेंट से बीमारी पकड़ने की तकनीक

जोधपुर. शरीर का संतुलन नहीं बनने की शिकायत पर मरीज अक्सर मेडिसिन विभाग या  ईएनटी विभाग में दिखाते हैं। फिर भी कई बार समस्या डायग्नोस नहीं हो पाती। बैंगलुरू के ईएनटी सर्जन डॉ. श्रीनिवास डोरसल ने विदेशों से इम्पोर्ट मशीनों पर टेस्ट के बाद भी पेशेंट्स के साथ यह समस्या देखी। डॉ. श्रीनिवास ने ठान लिया कि वे ऐसी डिवाइस बनाएंगे जिससे बैलेंस संबंधी समस्या से जूझते पेशेंट की बीमारी का पता चल सके।

 

- उन्होंने वर्ष 2013 में अपनी क्लिनिकल प्रैक्टिस छोड़ दी। दिन-रात तरह-तरह के रिसर्च एंड डवलपमेंट पर लगे रहे। लक्ष्य केवल एक ही था, ऐसी डिवाइस बनाएं जिससे पेशेंट की संतुलन संबंधी समस्या डायग्नोस हो सके। लक्ष्य के प्रति उनका जुनून और अथक  मेहनत रंग भी लाई। वे ऐसी डिवाइस बनाने में सफल रहे जो न केवल बैलेंस संबंधी बल्कि न्यूरो, ईएनटी और फिजियोथैरेपी सहित कई अन्य बीमारियों का  पता लगा सके। पूर्णतया मेक इन इंडिया इस टेक्नोलॉजी को उन्होंने नाम दिया ‘बैलेंस आई’।

- इस तकनीक में पेशेंट को आंखों पर एक डिजिटल आई ग्लास लगाकर सामने मॉनिटर पर पाइंटर को देखना होता है। आंखों के मूवमेंट का ग्राफ सामने स्क्रीन पर बनता जाता है। इन ग्राफ से पता चल जाता है कि आखिर पेशेंट को बीमारी क्या है। इस तकनीक से 20 से 25 प्रकार की बीमारी को डायग्नोस किया जा सकता है। 

 

अब एक ही मशीन पर हो जाती हैं कई टेस्टिंग
एम्स जोधपुर में 37वीं एनईएस 2018 ईएनटी कांफ्रेंस में डॉ. डोरसल ने बैलेंस आई के बारे में अन्य डॉक्टर्स की जिज्ञासाओं के जवाब भी दिए। उन्होंने बताया कि विदेशी मशीन यूजर फ्रेंडली नहीं थी। हर जांच के लिए एक अलग मशीन पर मरीज की टेस्टिंग करनी होती थी। अब इस एक डिवाइस पर कई टेस्टिंग हो जाती हैं।  

 

 

 

 

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