जोधपुर

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JNU फर्जी डिग्री मामला, 25 हजार स्टूडेंट्स को नौकरी के अयोग्य घोषित करने पर रोक

जोधपुर नेशनल यूनिवर्सिटी की ओर से अधिवक्ता कुलदीप माथुर व अंकुर माथुर ने याचिका दायर की थी।

Danik Bhaskar

Dec 22, 2017, 04:24 AM IST

जोधपुर. जोधपुर नेशनल यूनिवर्सिटी (जेएनयू) से पासआउट और इस निजी यूनिवर्सिटी से कथित तौर पर फर्जी तरीके से डिग्री हासिल कर वर्तमान में विभिन्न जगह नौकरी कर रहे 25,003 स्टूडेंट्स के लिए राहत भरी खबर है। राजस्थान हाईकोर्ट की न्यायाधीश निर्मलजीत कौर ने राज्य के कॉलेज शिक्षा विभाग के उस नोटिफिकेशन पर रोक लगा दी है, जिसमें इन स्टूडेंट्स के फर्जी डिग्रियों के जरिए नौकरी हासिल करना बताते हुए उन्हें कहीं भी नौकरी करने के अयोग्य करार दे दिया गया था। राज्य सरकार के नोटिफिकेशन के खिलाफ जोधपुर नेशनल यूनिवर्सिटी की ओर से अधिवक्ता कुलदीप माथुर व अंकुर माथुर ने याचिका दायर की थी।

उन्होंने बहस के दौरान कोर्ट को बताया, कि कॉलेज शिक्षा विभाग ने यूनिवर्सिटी से ऑफ कैम्पस स्टूडेंट्स के तहत डिग्री लेने वाले 25,003 विद्यार्थियों के नाम वेबसाइट पर ऑनलाइन शो करते हुए उन्हें फेक स्टूडेंट्स बताया था। कॉलेज शिक्षा विभाग ने गत 6 दिसंबर को अधिसूचना जारी कर इन सभी स्टूडेंट्स की कहीं भी नौकरी करने की पात्रता को निषिद्ध कर दिया।

अधिवक्ताओं ने तर्क दिया, कि विभाग ने स्वतंत्र रूप से इस मामले में किसी तरह की जांच नहीं की है, पुलिस इस मामले की जांच कर रही है और अभी तक किसी नतीजे पर नहीं पहुंची है। ऐसे में विभाग अधिसूचना जारी कर कैसे पात्रता निषिद्ध कर सकता है?

उन्होंने कहा कि विभाग की ओर से जारी नोटिफिकेशन पूरी तरह से अनुचित है। उन्होंने इस पर रोक लगाने का आग्रह किया। कोर्ट ने याचिका को विचारार्थ स्वीकार करते हुए इस संबंध में राज्य सरकार और कॉलेज शिक्षा विभाग को नोटिस जारी कर जवाब तलब किया है। साथ ही अंतरिम आदेश दिया कि जो अभ्यर्थी इस डिग्री के अाधार पर नौकरी में हैं, उन पर यह नोटिफिकेशन प्रभावी नहीं होगा।

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