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पार्षदों से अफसर पूछें कि उनके वार्ड में क्या काम करवाने हैं: हाईकोर्ट

शहर में सड़क निर्माण-मरम्मत, अतिक्रमण हटाने जैसे छोटे कार्यों में भी देरी पर बरसा हाईकोर्ट

Bhaskar News | Last Modified - Jan 10, 2018, 04:33 PM IST

पार्षदों से अफसर पूछें कि उनके वार्ड में क्या काम करवाने हैं: हाईकोर्ट

जोधपुर. राजस्थान हाइकोर्ट के न्यायाधीश गोपालकृष्ण व्यास व विनीत कुमार माथुर की खंडपीठ ने मंगलवार को एक अवमानना याचिका की सुनवाई करते हुए शहर में सड़क निर्माण व उनकी मरम्मत, अतिक्रमण हटाने जैसे छोटे-छोटे कार्य नहीं करवाए जाने पर कड़ी नाराजगी जताई। जस्टिस व्यास ने मौखिक रूप से यहां तक कहा, कि लोकतंत्र में जनता द्वारा चुने गए प्रतिनिधियों को सम्मान होना चाहिए। चुनाव जीतना आसान नहीं है, अगर है तो ब्यूरोक्रेट्स जीतकर दिखाएं। शहर के 65 पार्षदों तक की निगम में इज्जत नहीं होती। अफसरों के अलावा किसी की सुनवाई नहीं होती है, यह रवैया ठीक नहीं है। उल्टे अफसरों को पार्षदों से विनम्रता से पूछना चाहिए, कि आपके वार्ड में क्या काम करवाने हैं।


याचिकाकर्ता महेंद्र लोढ़ा की ओर से दायर इस अवमानना याचिका पर सुनवाई के दौरान फंड की कमी का तथ्य सामने आने पर कोर्ट ने मौखिक टिप्पणी करते हुए कहा- फंड की व्यवस्था तो जेडीए को अपने स्तर पर ही करनी होगी। अगर फंड नहीं जुटाया जा रहा है, तो फिर जेडीए क्यों खोलकर बैठे हो? क्यों इतने भारी-भरकम स्टाफ को मोटी तनख्वाह चुकाई जा रही है? या फिर राज्य सरकार फंड का बंदोबस्त करे। कोर्ट के निर्देशों की 11 साल बाद भी पालना नहीं होना चिंताजनक है। उन्होंने सभी विभागों को पालना रिपोर्ट हलफनामे के साथ पेश करने के आदेश दिए हैं। अगली सुनवाई 1 फरवरी को मुकर्रर की गई है।

अवमानना याचिका की सुनवाई के तहत कलेक्टर डॉ. रवि कुमार सुरपुर, निगम आयुक्त ओपी कसेरा, जेडीए आयुक्त दुर्गेश बिस्सा, एडीएम सिटी सीमा कविया सहित जेडीए, निगम, हाउसिंग बोर्ड व आरटीओ ऑफिस के आला अधिकारी पेश हुए। याचिकाकर्ता के अधिवक्ता अशोक छंगाणी ने 25 करोड़ रुपए की लागत से बनने वाले क्राइम एंड कंट्रोल सेंटर की प्रगति के संबंध में भी कोर्ट को अवगत कराने के लिए कहा।


कोर्ट ने कहा- ‘कलेक्टर सा’ब कुछ करके दिखाओ, केवल थ्योरिटिकल बात से कुछ नहीं होगा। हर बात के लिए बुलाकर कहना पड़ता है, हमें शौक नहीं है, रोजाना आप लोगों को बुलाएं।’ कलेक्टर ने जवाब दिया कि रिव्यू मीटिंग में सभी निर्देशों पर विचार-विमर्श कर एक टाइम बाउंड कार्यक्रम बनाकर कोर्ट को जानकारी दी जाएगी, कि किस योजना में कितना फंड है और कहां कितनी जरूरत है?

रजिस्ट्रेशन से पहले पार्किंग सुनिश्चित हो
जस्टिस व्यास ने मौखिक रूप से कहा, कि चारपहिया वाहनों के रजिस्ट्रेशन से पहले उनकी पार्किंग सुनिश्चित करें। पूर्व में निर्देश दिए गए, पालना नहीं हो रही है। लावारिस वाहनों से भी ट्रैफिक बाधित हो रहा है।

टेंडर प्रक्रिया जारी, मई में शुरू होगा काम
एएजी राजेश पंवार ने कोर्ट को बताया कि 101 किलोमीटर लंबी रिंग रोड के निर्माण के लिए टेंडर प्रक्रिया शुरू कर दी है। आगामी 19 मई को काम शुरू कर 2020 में पूरा कर लिया जाएगा। कोर्ट ने इसका एफिडेविट पेश करने के आदेश दिए।

एक साल पहले की रिपोर्ट, फिर पता नहीं
कोर्ट ने कलेक्टर से पूछा- ‘एलपीजी ऑटो रिक्शा तो शुरू हो गए, सीएनजी का क्या हुआ? अभी भी बड़ी संख्या में डीजल वाले ऑटो चल रहे हैं। एक साल पहले की रिपोर्ट पेश की गई थी, इसके बाद एक साल में क्या हुआ?

हाईकोर्ट- फंड नहीं है तो क्यों बना रखा है जेडीए
जस्टिस व्यास ने एएजी राजेश पंवार से पूछा, कि जेडीए ने पिछले तीन साल में कितनी कॉलोनियां बनाईं और कितने विकास कार्य करवाए। एएजी ने कहा, कि मास्टर प्लान से जुड़ी एक अन्य याचिका में रोक की वजह और जोनल व सेक्टर प्लान के बिना कॉलोनी विकसित नहीं हो सकती। जस्टिस व्यास ने पूछा- ‘नई छोड़िए, पुरानी कितनी कॉलोनियां हैं जहां आपने सभी विकास कार्य करा दिए?’ इस पर एएजी ने कहा, कि फंड कहां से लाएं? इस पर जस्टिस व्यास ने नाराजगी जताते हुए मौखिक रूप से कहा- ‘फंड ही नहीं है तो फिर जेडीए बंद कर दें, सभी अफसरों को अन्य जगह भेज दें, क्योंकि यहां तो काम ही नहीं है।

जेडीए आयुक्त- स्कीम लाॅन्च की, लोग नहीं आ रहे
जेडीए आयुक्त बिस्सा ने बताया कि 3 साल में 6 स्कीम लाॅन्च की है, लेकिन लोग नहीं आ रहे। इस पर जस्टिस व्यास ने कहा- ‘काम ही नहीं है तो कर्मचारियों को बैठे-बैठे तनख्वाह क्यों दे रहे हैं?’ बिस्सा ने कहा कि 3 साल में 380 करोड़ के कार्य करवाए हैं। सड़क निर्माण व मरम्मत का प्लान बनाया है, 20 करोड़ खर्च होंगे। कोर्ट ने कहा- ‘केवल पैसा खर्च नहीं करना है, काम दिखना भी चाहिए। जयपुर जेडीए के पास कैसे फंड आ रहा है?’ इस पर बिस्सा ने कहा- ‘जयपुर जेडीए ने तो हमसे 20 करोड़ उधार मांगे हैं।’ जस्टिस व्यास ने कहा- ‘देना मत, हमारे यहां भी काम अधूरे पड़े हैं।’

भास्कर री-कॉल: काम नहीं होने पर भाजपा पार्षदों ने प्रदेशाध्यक्ष तक से की थी महापौर की शिकायत, इस्तीफा भी देने को तैयार थे

- निगम में भाजपा का बोर्ड बनने के बाद पहली बैठक में हर वार्ड में 50-50 लाख रुपए के विकास कार्य करवाने की घोषणा की।
- तंगहाली के कारण निगम दूसरी बोर्ड बैठक तक भी जब 50 लाख के काम नहीं करवा पाया तो विरोध बढ़ने लगा। महापौर ने विरोध को दबाने के लिए दूसरी बोर्ड बैठक में हर वार्ड में 80-80 लाख के विकास कार्यों की घोषणा तो कर दी, मगर अधिकांश वार्डों में 50-50 लाख के काम भी नहीं हुए।
- 80 लाख रुपए के काम के लिए 5 माह तक टेंडर भी नही लग पाए। बारिश ने हालात और बिगाड़ दिए तो कांग्रेस पार्षदों के साथ भाजपा के पार्षदों का एक गुट भी नाराज हो गया और दो बार भाजपा प्रदेशाध्यक्ष अशोक परनामी से महापौर की शिकायत की।
- परनामी के दबाव में हर वार्ड के लिए 5-5 लाख के सड़क व नाली मरम्मत के कार्य लगवाने पड़े। महापौर व अफसरों की कार्यशैली से नाराज कुछ पार्षदों ने इस्तीफे तक की धमकी दी थी।

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Web Title: paarsdon se afsr puchhen ki unke vaard mein kyaa kam karvaane hain: highkort
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