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पद्मावत में भावनाएं आहत नहीं, संजय लीला भंसाली पर केस खारिज: हाईकोर्ट

फिल्म में राजस्थान, मेवाड़ के गौरव का गुणगान करने के अलावा रानी पद्मावती के साहस तथा कौशल को बखूबी दिखाया गया है।

Bhaskar News | Last Modified - Feb 07, 2018, 03:57 AM IST

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    जोधपुर. हाईकोर्ट ने पद्मावत फिल्म को लेकर मंगलवार को मौखिक टिप्पणी करते हुए कहा कि इस फिल्म में भावनाएं आहत होने जैसा कुछ नहीं है। इसलिए फिल्म के निर्माता संजय लीला भंसाली, अभिनेता रणवीर सिंह और दीपिका पादुकोण के खिलाफ दायर एफआईआर अपास्त की जाती है। इनके खिलाफ डीडवाने थाने में धार्मिक भावनाएं आहत करने को लेकर एफआईआर दर्ज कराई गई थी।

    - फिल्म निर्माता भंसाली ने इसे खारिज करने की याचिका लगाई थी। इससे एक दिन पहले न्यायाधीश संदीप मेहता की बैंच ने सोमवार रात को पद्मावत मूवी देखी थी, इसके बाद यह फैसला सुनाया गया। सुनवाई शुरू होने से पहले ही कोर्ट रूम खचाखच भर गया। फैसले के बाद कोर्ट परिसर में पुलिस जाब्ता तैनात किया गया। जजों के घर जाने के समय उनके रूट पर हथियारबंद जवान लगाए गए।

    - सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता संजय लीला भंसाली की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता रवि भंसाली और अधिवक्ता निशांत बोड़ा ने कोर्ट को बताया कि एफआईआर प्री मैच्योर है, क्योंकि इसे दर्ज कराने के ग्यारह माह बाद 25 जनवरी, 2018 में फिल्म रिलीज हुई। ऐसे में बिना देखे कैसे कहा गया कि भावनाएं आहत हुई हैं।

    - उन्होंने यह भी तर्क दिया कि सेंसर बोर्ड को सिनेमेटोग्राफी एक्ट के तहत मूवी को रिलीज करने के लिए मंजूरी देने का अधिकार है तथा सेंसर बोर्ड संवैधानिक संस्था है, ऐसे में बोर्ड द्वारा मंजूर की गई मूवी के खिलाफ भावनाएं भड़काने या अन्य आरोप लगाकर एफआईआर दर्ज नहीं कराई जा सकती है। अगर कोई सेंसर बोर्ड के सर्टिफिकेशन से सहमत नहीं है तो ऑथोरिटी में अपील कर सकता है, लेकिन इस मामले में तो सीधे एफआईआर ही दर्ज करा दी गई, जो कि विधिसम्मत नहीं है।

    हाईकोर्ट ने कहा- फिल्म में मेवाड़ के गौरव का गुणगान
    - सभी पक्ष सुनने के बाद कोर्ट ने कहा फिल्म में किसी दो समुदायों या जाति के बीच शत्रुता का संप्रवर्तन करने या सौहार्द पर प्रतिकूल प्रभाव डालने वाले कोई तथ्य नहीं हैं।

    - जस्टिस मेहता ने मौखिक रूप से कहा कि मूवी के डिस्क्लेमर को पढ़कर ही सारी शंकाएं दूर हो जाती हैं।

    - फिल्म में राजस्थान, मेवाड़ के गौरव का गुणगान करने के अलावा रानी पद्मावती के साहस तथा कौशल को बखूबी दिखाया गया है।

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Web Title: Jodhpur High Court There Is Nothing Like Feeling Hurt In Padmaavat
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