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150 करोड़ हड़पने वाला खेतेश्वर क्रेडिट सोसायटी का चेयरमैन जोधपुर से पकड़ा गया

सिरोही पुलिस ने लिया हिरासत में, गिरफ्तारी के लिए जोधपुर के निवेशकों ने बना रखा था संगठन

Dainik Bhaskar

Jan 10, 2018, 07:18 AM IST
Kheteshwar Credit Society Chairman in police custody

सिरोही/जोधपुर. सोसायटी के जरिए जमाकर्ताओं के करीब डेढ़ सौ करोड़ से ज्यादा हड़पने के आरोपी खेतेश्वर सोसायटी के चेयरमैन विक्रमसिंह राजपुरोहित को सिरोही पुलिस ने मंगलवार शाम को जोधपुर से हिरासत में ले लिया। पुलिस उसे लेकर देर रात को सिरोही पहुंची।

- दरअसल, करीब डेढ़ साल पहले सोसायटी में निवेशकों की जब जमाएं पूरी हुई तो वे अपनी रकम लेने पहुंचे, लेकिन उस समय उन्हें रकम देने की बजाय किसी तरह टाल दिया गया। एक के बाद एक इस तरह के कई मामले सामने आए और जमाकर्ताओं ने विभिन्न थानों में सोसायटी के खिलाफ मामले दर्ज करवाए थे। तब से ही पुलिस विक्रमसिंह को तलाश रही थी।

- इस सोसायटी की राजस्थान, गुजरात और महाराष्ट्र में करीब 48 ब्रांच हैं और मुख्यालय सिरोही है। गबन सामने आने के बाद कई लोगों ने सोसायटी के खिलाफ उपभोक्ता मंच सिरोही में भी वाद दायर किए।

- पुलिस अब विक्रमसिंह से पूछताछ करेगी। इसके बाद ही सामने आ सकेगा कि कुल कितने जमाकर्ताओं की कितनी रकम अटकी हुई है।

- बहरहाल, पुलिस की इस कार्रवाई से सोसायटी के इन सभी जमाकर्ताओं को आस बंधी है कि उनकी रकम संभवत मिल सकेगी। जोधपुर के कई जमाकर्ताओं ने तो इसके लिए एक संगठन भी बना रखा है।


उपभोक्ता मंच में 150 वाद

- सोसायटी के खिलाफ सिरोही उपभोक्ता मंच में 150 से अधिक वाद दायर हैं। इनमें से कुछ के फैसले भी सोसायटी के खिलाफ आ चुके हैं। जिनमें मंच ने सोसायटी को जमाकर्ता की रकम ब्याज व जुर्माने समेत लौटाने के आदेश दिए हुए हैं। इनमें कई मामले जोधपुर के, कुछ सिरोही के व पिंडवाड़ा के हैं।

जीवन भर की कमाई डूबी, गुजरात से राजस्थान तक ऐसे कई मामले

वैसे तो पिछले करीब दो साल में कई सोसायटीज के मामले सामने आए। इनमें से कुछ के संचालक जेल में भी हैं, लेकिन खेतेश्वर सोसायटी के मामले अधिक सामने आए हैं। इनमें कई लोग ऐसे भी हैं जिनकी जिंदगी भर की कमाई डूब गई। निवेशक जब अपनी जमा राशि की मियाद पूरी होने पर ब्रांच में पहुंचे तो या तो वह बंद मिली या फिर रकम देने से इंकार कर दिया गया। सोसायटी की मुंबई, गुजरात, राजस्थान में करीब 48 ब्रांच हैं। इनमें से अधिकांश ब्रांचों के गबन संबंधी मामले दर्ज हैं।


करीब दो साल से था फरार
सोसायटी में गबन की हकीकत करीब डेढ़ साल पहले सामने आई थी। तब से ही विक्रमसिंह फरार चल रहा था। इसके बाद जोधपुर, पाली, सिरोही, पिंडवाड़ा, गुजरात के दमन व दीव समेत कई जगहों पर उसके खिलाफ मामले दर्ज हुए। शुरुआत मे संबंधित थानों की पुलिस भी केवल मामले दर्ज कर मामले को रफा दफा कर देती, लेकिन करीब पौने दो सौ करोड़ के गबन और गिरफ्तारी के लिए लगातार बढ़ रहे दबाव के बाद आखिर सिरोही कोतवाली पुलिस ने इसे गिरफ्तार कर लिया।

रकम वापस मिल पाएगी- यह अब भी तय नहीं
इस पूरे मामले से कई जमाकर्ता जुड़े हैं। उन सभी के जेहन में एक ही सवाल है कि क्या उनकी जमापूंजी वापस मिल पाएगी। हालांकि आरोपी के पकड़ में आने से उन्हें उम्मीद बंधी है, लेकिन रकम वापस मिल पाना अभी इतना आसान नहीं होगा। इससे पूर्व भी विभिन्न सोसायटीज के संचालकों को पुलिस गिरफ्तार कर चुकी हैं। उन सभी के खिलाफ मामले भी दर्ज हैं, लेकिन जमाकर्ताओं की रकम वापस नहीं मिल पाई है। हालांकि इतना तय है कि इससे आरोपी पर दबाव आएगा।

परिवार में आना-जाना तक नहीं, सबसे नाता तोड़ा
पुलिस हिरासत में आने के बाद विक्रमसिंह बदला हुआ नजर आया। उसने दाढ़ी बढ़ा रखी है और एकदम चुपचाप रहता है। पुलिस जीप में भी वह एकदम चुप बैठा रहा। उसने अधिक कोई जानकारी नहीं दी है। विक्रमसिंह के एक भाई श्यामसिंह राजपुरोहित भारतीय प्रशासनिक सेवा के अधिकारी हैं। पुलिस कार्रवाई के बाद उन्होंने भास्कर को बताया कि पिछले लंबे समय से हमारा उससे कोई लेनादेना नहीं है। वह परिवार में आता जाता भी नहीं। बोलचाल तक का संबंध भी नहीं है। यहां तक कि चार माह पहले मेरी पत्नी की मौत हुई। विक्रमसिंह तब बैठने तक नहीं आया। मेरा उसकी सोसायटी से भी कोई लेनादेना नहीं है।


चार साल में ही कमाए करोड़ों
यह सोसायटी खेतेश्वर अरबन क्रेडिट सोसायटी के नाम से संचालित की जाती थी। चेयरमैन विक्रमसिंह ने करीब वर्ष 2012 में अपना कारोबार गुजरात में फैलाया। उस समय वहां नौ ब्रांच खोली गई। जिनमें वलसाड, वापी, सेलवास, दमण, सरीगांव, उमरगांव,धरमपुर और चिखली ब्रांचें प्रमुख हैं। इन सभी में बाकायदा मैनेजर और अन्य स्टाफ रखा गया। इसके बाद आकर्षक जमा योजनाओं के जरिए लोगों की जमाएं ली गई। लोगों में विश्वास बढ़ाने के लिए स्थानीय स्टाफ को वरियता दी गई। हालांकि बीच में यदि किसी जमाकर्ता की मियाद पूरी हुई तो उसे रकम लौटाई भी गई, लेकिन उसी रकम को जमा करने के लिए दूसरी आकर्षक योजनाएं लाई गई और इस तरह लोगों का पैसा अटकता गया। जानकारी के अनुसार जुलाई 2016 में राजस्थान और गुजरात की सभी सोसायटीज पर एक साथ ताले लगा दिए गए।

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