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स्टूडेंट्स अपनी पत्नी-बच्चों संग हाथ में छड़ी थामे पहुंचे, पुराने दिन याद कर हुए रोमांचित

एमबीएम इंजीनियरिंग कॉलेज की एलुमिनी एसो. के आयोजन में 60 व 50 साल पहले के बैच के स्टूडेंट्स का गेट-टु-गेदर

Dainik Bhaskar

Dec 16, 2017, 07:19 AM IST
1957 बैच के स्टूडेंट भवानीसिंह ने कहा-अरे तेजसिंह (माथुर) तुम तो बूढ़े हो गए हो... तेजसिंह ने जवाब दिया- तुम कौनसे जवान हों? भवानीसिंह हंस कर बोले-मैं तो अभी भी नौकरी कर रहा हूं। इसके बाद दोनों गले मिल गए। 1957 बैच के स्टूडेंट भवानीसिंह ने कहा-अरे तेजसिंह (माथुर) तुम तो बूढ़े हो गए हो... तेजसिंह ने जवाब दिया- तुम कौनसे जवान हों? भवानीसिंह हंस कर बोले-मैं तो अभी भी नौकरी कर रहा हूं। इसके बाद दोनों गले मिल गए।

जोधपुर. एमबीएम इंजीनियरिंग कॉलेज के ऑडिटोरियम के मंच से आवाज आई लंच से पहले प्रो. गुप्ता की क्लास होगी। सभी स्टूडेंट्स उनकी क्लास में शामिल होने के लिए तुरंत इंटरनेशनल सेमिनार हॉल में पहुंचें।...किसी जमाने में तेज रफ्तार से दौड़ लगा कर कक्षाओं में पहुुंचने वाले स्टूडेंट्स आज अपनी पत्नी, बेटे, बेटी, पोते व दोहिते के साथ छड़ी थामे धीरे-धीरे सेमिनार हॉल की तरफ बढ़ने लगे। मौका था, एमबीएम इंजीनियरिंग कॉलेज के वर्ष 1957 व 1967 के बैच का डायमंड जुबली व गोल्डन जुबली प्रोग्राम का।

सेमिनार हॉल में प्रो. केएस गुप्ता के पहुंचते ही सभी स्टूडेंट्स जो आज 70 से 80 के पार हो चुके हैं, अपनी-अपनी जगह पर खड़े हो गए। कक्षा में उसी तरह सन्नाटा छा गया, जैसा वर्ष 1957 में उनकी कक्षाओं में रहता था। प्रो. गुप्ता ने मैकेनिकल इंजीनियरिंग के अपने चिरपरिचित अंदाज में पढ़ाना शुरू किया। अब वयोवृद्ध हो चुके उनके स्टूडेंट भी बड़ी तसल्ली से उन्हें सुन रहे थे।


एलुमिनी एसोसिएशन का खूब सहयोग मिला : कुलपति
जेएनवीयू के कुलपति प्रो. आरपी सिंह ने कहा, कि एमबीएम इंजीनियरिंग कॉलेज की एलुमिनी का इसके विकास में बहुत बड़ा योगदान है। वे उद‌्घाटन सत्र को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा, कि इस एलुमिनी की तरह यदि हर संकाय की एलुमिनी जुट जाए तो विश्वविद्यालय के सभी संकट समाप्त हो सकते हैं।

एसोसिएशन के अध्यक्ष पीसी पुरोहित व पूर्व अध्यक्ष रवि अग्रवाल ने एलुमिनी के कार्यों पर प्रकाश डाला। उन्होंने एमबीएम इंजीनियरिंग कॉलेज की साख बचाने के लिए फंड देने तथा नियुक्तियों की स्वीकृति दिलवाने के लिए राज्य के चीफ सेक्रेटरी अशोक जैन का आभार भी जताया।

इस अवसर पर 1957 बैच के स्टूडेंट्स का सम्मान किया गया। कार्यक्रम में कॉलेज के डीन प्रो. एसएस मेहता, पूर्व अध्यक्ष सोहन भूतड़ा, प्रो. जयश्री वाजपेयी, आरपीएससी के पूर्व अध्यक्ष एसएस टाक, एससी जैन, एनके खंडेलवाल, 1957 बैच के डीपी शर्मा सहित कई गणमान्य लोग मौजूद थे। आरंभ में जेएनवीयू के पूर्व कुलपति व एमबीएम इंजीनियरिंग कॉलेज के डीन प्रो. एमएल माथुर को श्रद्धांजलि दी गई।

गले मिले, हंसी के पल और स्टूडेंट्स लाइफ के किस्से

1957 बैच के स्टूडेंट भवानीसिंह ने कहा-अरे तेजसिंह (माथुर) तुम तो बूढ़े हो गए हो... तेजसिंह ने जवाब दिया- तुम कौनसे जवान हों? भवानीसिंह हंस कर बोले-मैं तो अभी भी नौकरी कर रहा हूं। इसके बाद दोनों गले मिल गए।


वॉश रूम गया तो परीक्षा में बैठने नहीं दिया
1957 बैच के तेजसिंह माथुर ने बताया, कि प्रो. वीएस गरड़े सख्त प्रिंसिपल थे। परीक्षा में कोई भी पांच मिनिट भी देरी से आता तो बैठने नहीं देते थे। मैं पांच मिनिट जल्दी आ गया और फिर वॉश रूम चला गया, जब आया तो देरी हो गई। मुझे कक्षा में प्रवेश से मना कर दिया। बाद में प्रिंसिपल से बार-बार अनुरोध करना पड़ा तब जाकर इजाजत मिली।

नंबर कम आए तो प्रोफेसर को स्कूटर चलाना सिखाया

1967 बैच के स्टूडेंट यूएम लोढ़ा ने बताया, कि जब वे पढ़ते थे तो एक बार हाइड्रोलिक का प्रैक्टिकल खराब हो गया। उसके पास स्कूटर था जो शहर भर में कोई चार-पांच ही हुआ करते थे। मैं दूसरे दिन स्कूटर लेकर प्रोफेसर साहब के घर चला गया। उनकी पत्नी ने उनसे कहा, कि आपके स्टूडेंट के पास स्कूटर है, आप भी ले लो। उन्होंने कहा, मुझे चलाना नहीं आता। बाद में मैंने उन्हें स्कूटर चलाना सिखाया। इसके बाद उन्हें परीक्षा में अच्छे अंक भी आ गए।

टूर पर प्रो. मोहली हो गए थे बेहोश
1957 बैच के श्यामलाल माथुर ने बताया, कि हमारा बैच श्रीनगर के टूर पर गया था। वहां झील में दो बोट किराए पर ली। दोनों खड़ी थी और एक से दूसरी बोट में जाने के लिए बीच में पट्‌टा लगा रखा था। प्रो. पीपी मोहली एक बोट में बैठे स्टूडेंट्स को डांटते हुए पट्‌टे से दूसरी बोट की तरफ बढ़े। इसी बीच पट्‌टा खिसक गया और वे झील में गिर गए और बेहोश हो गए। उन्हें गर्म पानी छिड़क कर होश में लाए।

सर कोई भी स्टूडेंट आपके चैप्टर को नोट नहीं कर रहा : परमजीत कुकरेजा सर कोई भी स्टूडेंट आपके चैप्टर को नोट नहीं कर रहा : परमजीत कुकरेजा

एक महिला की आवाज आई, कि सर कोई भी स्टूडेंट आपके चैप्टर को नोट नहीं कर रहा है। यह आवाज थी प्रो. गुप्ता के स्टूडेंट रहे वीएस कुकरेजा की धर्मपत्नी परमजीत कुकरेजा की। वह अपनी सीट से उठी और मिस्टर कुकरेजा को पैन और पेपर थमाया और कहा, कि प्रोफेसर साहब पढ़ा रहे हैं, आप नोटिंग करें। इसके बाद कोटा टेक्नीकल यूनिवर्सिटी के वाइस चांसलर रहे प्रो. दामोदर शर्मा ने भी क्लास ली, क्योंकि वे भी इन स्टूडेंट्स के टीचर रह चुके हैं। इसके बाद यहां मौजूद पूर्व छात्र केके शर्मा ने अपने अनुभव सुनाए। एलुमिनी एसोसिएशन के अध्यक्ष पीसी पुरोहित ने दोनों शिक्षकों का आभार जताया।

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1957 बैच के स्टूडेंट भवानीसिंह ने कहा-अरे तेजसिंह (माथुर) तुम तो बूढ़े हो गए हो... तेजसिंह ने जवाब दिया- तुम कौनसे जवान हों? भवानीसिंह हंस कर बोले-मैं तो अभी भी नौकरी कर रहा हूं। इसके बाद दोनों गले मिल गए।1957 बैच के स्टूडेंट भवानीसिंह ने कहा-अरे तेजसिंह (माथुर) तुम तो बूढ़े हो गए हो... तेजसिंह ने जवाब दिया- तुम कौनसे जवान हों? भवानीसिंह हंस कर बोले-मैं तो अभी भी नौकरी कर रहा हूं। इसके बाद दोनों गले मिल गए।
सर कोई भी स्टूडेंट आपके चैप्टर को नोट नहीं कर रहा : परमजीत कुकरेजासर कोई भी स्टूडेंट आपके चैप्टर को नोट नहीं कर रहा : परमजीत कुकरेजा
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