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मुस्लिम परिवार तीन पीढ़ियों से कर रहे गौ सेवा, गाय के मांस को छूते तक नहीं

नौगांवा से 7 किमी दूर हरियाणा सीमा पर बसे राजस्थान के नंगलीवाल गांव पहुंचा भास्कर, इस गांव में 60 फीसदी मुस्लिम परिवार

Bhaskar News | Last Modified - Dec 27, 2017, 02:16 AM IST

मुस्लिम परिवार तीन पीढ़ियों से कर रहे गौ सेवा, गाय के मांस को छूते तक नहीं

नौगांवा/अलवर. मेवात क्षेत्र में रहने वाले लोगों पर गोतस्करी और गोकशी के आरोप लगते रहे हैं, लेकिन हरियाणा की सीमा पर बसे राजस्थान की सीमा के आखिरी गांव नंगलीवाल की गिनती उन गांवों में होती है, जहां न केवल गाय पाली जाती है बल्कि इसे पूरा सम्मान भी दिया जाता है। यह गांव नौगांवा से करीब सात किलोमीटर दूर है।

- यहां तक पहुंचने के लिए हरियाणा की फिरोजपुर झिरका पंचायत समिति की ग्राम पंचायत दोहा के गांव पाटन उदयपुरी से होकर जाना पड़ता है।

- अरावली पर्वतमाला की तलहटी में बसे राजस्थान की हाजीपुर ग्राम पंचायत के इस गांव में 172 परिवार रहते हैं।

- इनमें 60 फीसदी परिवार मुस्लिम समुदाय के हैं। इस गांव के मुस्लिम समुदाय के लोग तीन पीढ़ियों से गौ पालन से जुड़े हैं।

- मंगलवार को जब भास्कर संवाददाता नंगलीवाल गांव पहुंचा तो यहां गोकुल जैसा नजारा दिखा। मुस्लिम समुदाय के हर दूसरे-तीसरे मकान में गाय बंधी मिली।

- इन दिनों अलवर और भरतपुर जिलों में गोतस्करी का मुद्दा गर्माया हुआ है और इस मुद्दे पर राजनीति से जुड़े लोग एक-दूसरे को जिम्मेदार ठहरा रहे हैं।

- ये लोग पूरे मेवात क्षेत्र को कठघरे में खड़ा करने की कोशिश कर रहे हैं। ऐसे लोग यदि एक बार भी नंगलीवाल जा आएं तो इनकी सोच बदल जाए।

परिवार का गुजर-बसर होता है गौ पालन से
- नंगलीवाल गांव के मुस्लिम परिवारों के लोगों का मुख्य व्यवसाय कृषि एवं गौ पालन है। इसी से उनके परिवार का पालन पोषण होता है।

- गायों के दूध से एक ओर उनके बच्चों के कंठ तर होते हैं, तो वहीं इसी दूध को बेचकर परिवार का गुजर बसर होता है।

गांव में चारा नहीं है इसलिए रोज पहाड़ पर गायों को ले जाते हैं

- नंगलीवाल गांव के सुभान खां ने बताया कि उनके पास 58 गाय हैं। गांव में चारे और पानी की कमी है इसलिए वे रोज अपनी गायों को पहाड़ पर ले जाते हैं, जहां गायों को भरपूर चारा और पानी मिल जाता है। - सुभान खां ने बताया कि उनकी तीन पीढ़ियां गौ पालन से जुड़ी हैं। गाय का दूध बेचकर जो पैसा मिलता है, उसी से परिवार चलता है। सुभान खां के भाई व रिश्तेदार भी गाय पालते हैं और दूध बेचने का काम करते हैं।

- इसी गांव के बशीर खां ने बताया कि इस गांव का कोई भी मुस्लिम समाज का व्यक्ति गोतस्करी जैसे अपराध से जुड़ा नहीं है, बल्कि वो और उनका समाज इसके खिलाफ है।

- पुलिस जब भी गोतस्करों पर कार्रवाई करती है, पूरा गांव पुलिस की मदद करता है। बशीर ने बताया कि उनके गांव में कई मुस्लिम परिवार तो ऐसे हैं जिनके पास 50-50 गाय हैं।

सरपंच ने कहा- यहां के मुस्लिम समुदाय के लोग गोमांस को छूते तक नहीं

- हाजीपुर सरपंच दर्शना बाई ने बताया कि नंगलीवाल में हिन्दू-मुस्लिम मिलकर रहते हैं। हर त्योहार साथ-साथ मनाते हैं। इसी तरह गौ पालन भी दोनों समुदाय के लोग मिलकर करते हैं। यहां के मुस्लिम समुदाय के लोग गौ मांस को छूते तक नहीं। कोई उनकी गाय को बुरी नजर से देखे तो हथियार उठा लेते हैं।

गांवों में चला रहे गौ रक्षा की मुहिम

- मेवात के कुछ लोगों द्वारा की जा रही गोकशी एवं गोतस्करी की वजह से बदनामी का दंश झेल रहे इस क्षेत्र के मुस्लिम समाज के लोगों को जागरूक करने का बीड़ा अंजुमन शिक्षण विकास समिति ने उठा रखा है।

- संस्था के अध्यक्ष एवं रामगढ़ के पूर्व प्रधान नसरू खां गांव-गांव जाकर मुस्लिम समाज के लोगों से गोतस्करी को रोकने के लिए प्रशासन का सहयोग करने की अपील करते हैं।

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Web Title: muslim parivaar teen piढ़iyon se kar rahe gaau sevaa, gaaay ke maans ko chhute tak nahi
(News in Hindi from Dainik Bhaskar)

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