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दहेज में 1 रुपया लेकर घर ला रहे बहू, लाखों रुपए बचा रहे

फिजूलखर्ची रोकने के लिए कई समाज और संगठनों की गांवों में शुरू की मुहिम अब रंग ला रही है

Dainik Bhaskar

Dec 18, 2017, 05:13 AM IST
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जोधपुर. शादी समारोहों में फिजूलखर्ची रोकने के लिए कई समाज और संगठनों की गांवों में शुरू की मुहिम अब रंग ला रही है। इससे अब शादी समारोह में लोग लाखों रुपए बचा रहे हैं। दिन में विवाह, प्रीतिभोज में चुनिंदा मिष्ठान, बारात में न बाजा न डीजे। बरसों से चले आ रहे नशे का प्रचलन भी बंद कर दिया गया है। जो नशामुक्त शादी कर रहे हैं, उन्हें सामाजिक तौर पर सम्मानित कर हौसला बढ़ाया जा रहा है। कुरीतियों के उन्मूलन के लिए युवाओं के साथ बुजुर्ग भी सक्रिय हैं। बाल विवाह की खिलाफत का असर यह है कि अब रात में कोर्ट में पेश कर लोगों को पाबंद किया जा रहा है।

बहू को बेटी मान दहेज में लिया 1 रुपया

जैसलमेर के मोरिया गांव से पिछले दिनों आई दो बारात ने दहेज रहित विवाह कर मिसाल कायम की। 4 दिसंबर को मोरिया में स्वरूपसिंह रूपावत की दो बेटियों मधु व सीमा की शादी में एक बारात शैतानसिंह भाटी के पुत्र उदयसिंह की माडवा गांव जैसलमेर व दूसरी प्रयागसिंह भाटी के पुत्र जगमालसिंह की बडोड़ा गांव जैसलमेर से आई। दोनों दूल्हों के पिता ने दहेज में केवल एक रुपया ही स्वीकार किया।

बाल विवाह रोकने आधी रात को खुलीं अदालतें

नाबालिग बच्चों की शादियां न करने के लिए ग्रामीण जागरूक हो रहे हैं। चोरी छिपे बाल विवाह करवाना मुश्किल है। बाल विवाह रोकने के लिए आधी रात को अदालतें खुल रही हैं। हाल में सिविल न्यायालय पीपाड़ में तहसीलदार द्वारकाप्रसाद शर्मा के परिवाद पर नाबालिग के विवाह की तैयारियां कर रहे दपंती को देर रात अदालत में पेश किया। खिंदाकोर में दो नाबालिग के बाल विवाह सूचना पर रात 8 बजे तक कोर्ट खुला रहा।

नशामुक्त शादियों का चलन बढ़ा
देचू-शेरगढ़ क्षेत्र में जाट जागृति मंच व बालेसर-शेरगढ़ में राजपूत समाज ने नशामुक्त समारोह की मुहिम चलाई है। अफीम-डोडा की मनुहार पर रोक है। एक साल से चल रहे इस अभियान से प्रेरणा लेकर हाल में लुंबासर, पदमगढ़, जेठानिया, किशोर नगर व चाबा में शादी में नशे की मनुहार नहीं की। मंच सदस्य भंवर सोऊ ने बताया कि लोगों ने निर्णय लिया कि शादी, मृत्युभोज में नशे की मनुहार नहीं होगी।

सुबह बुलाई बारातें, दोपहर तक फेरे-विदाई

लांबा में विश्नोई समाज ने शादी समारोह में फिजूलखर्ची रोकने के लिए अनूठी पहल की है। यहां सामूहिक विवाह में न डीजे था न ढोल। बारात भी दिन में बुलाई। दोपहर तक फेरे करवा विदाई दी। लांबा के लाखाराम ईशराम परिवार ने यह शुरुआत की है। दिन में शादी का यह पहला मौका था। रात में शादी-समारोह होने से टेंट, बिस्तर, लाइटें व अन्य चीजों पर लाखों रुपए खर्च होते थे।

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