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फुटपाथी बच्चों को दे रहे एजुकेशन, 15 दिन में ही बोलने लगे गुड मॉर्निंग-थैंक्यू

रेलवे-बैंक कर्मचारी साल भर में 1000 बच्चों को करेंगे साक्षर, उनकी बेटी-पत्नियां भी कर रहीं हैं सहयोग

Dainik Bhaskar

Jan 08, 2018, 08:51 AM IST
people gives Education to footpath children in udaipur

जोधपुर. रेलवे और बैंक में कार्यरत कुछ कर्मचारियों ने शहर के फुटपाथी बच्चों को साक्षर करने का बीड़ा उठाया है। इस काम में उनकी बेटी-पत्नियां भी सहयोग कर रही हैं। इनका संकल्प है, कि साल भर में एक हजार फुटपाथी और कामकाजी बच्चों को शिक्षा के साथ संस्कारित करेंगे।

- अशोक गोयल, रजनीश मित्तल, ललित गर्ग, विनोद और नरेंद्र गर्ग रेलवे में कार्यरत हैं, जबकि रामकुमार बैंक में सर्विस करते हैं। इन लोगों के मन में आया कि अपने काम के साथ समाज के लिए भी कुछ करें। बस कुछ हटकर करने की चाह में इन्होंने समूह बनाया और झुग्गी-झोपड़ियों के बच्चों को शिक्षित करने की ठानी। शुरुआत वीर दुर्गादास मल्टीलेवल रेलवे ओवरब्रिज के नीचे स्थित एक बस्ती से की।

-एक महीने से वे यहां 20-25 बच्चों के समूह को शिक्षा के साथ-साथ जीने के तौर-तरीके भी सिखा रहे हैं। सात दिन की क्लास में अंग्रेजी, हिंदी व गणित का अभ्यास करवाया जाता है। साथ ही जीवन के जरूरी संस्कार भी दे रहे हैं।

7 दिन का ऐसे तय किया शिड्यूल

पहले 6 दिन यानी सोमवार से शनिवार तक अशोक गोयल, रजनीश मित्तल, ललित गर्ग, विनोद, नरेंद्र गर्ग और रामकुमार क्लास लेते हैं। रविवार को अशोक गोयल की पुत्री मनीषा अग्रवाल (डीपीएस में टीचर), रजनीश मित्तल की पत्नी प्रीति मित्तल व अनिता मिर्धा (सरकारी स्कूल में टीचर) क्लास लेती हैं। बच्चों को खाने-पीने की सामग्री, पाठ्य सामग्री व साबुन, तेल, शैम्पू भी वितरित करते हैं। समय-समय पर बाल कटवाना, नाखून काटना, बच्चों के मनोरंजन के लिए एक्टिविटीज सहित चित्रकला व योगाभ्यास करवाया जाता है। नियमित भोजन भी दिया जा रहा है। भविष्य में कपड़े, चप्पल आदि उपलब्ध कराए जाएंगे। क्लास की शुरुआत प्रार्थना व राष्ट्रगान सहित जय हिंद, भारत माता की जय आदि नारों से की जाती है।

विषय की जानकारी के साथ ये जरूरी बातें भी बताते हैं
- सुबह उठकर माता-पिता को प्रणाम करें।
- मिलने वाले हर व्यक्ति को नमस्कार करें।
- रोजाना स्नान व मंजन करें व स्वच्छ रहें।
- कोई वस्तु दी जाए तो धन्यवाद दें।
- वार और तिथि का भी ध्यान रखें।
- हर त्योहार को समझने की कोशिश करें।
- जहां रहते हैं वहां सफाई का ध्यान रखें ।

15 दिन की कक्षा का यह फायदा हुआ
इस बस्ती के सभी बच्चे लोगों को प्रणाम करने लगे हैं। सुबह उठकर कुछ बच्चे मंजन और नियमित स्नान भी करते हैं। वस्तु लेने पर धन्यवाद या थैंक्यू बोलते हैं। सभी शिक्षक व आगंतुकों को नमस्कार, गुड मॉर्निंग बोलते हैं। भोजन से पहले साबुन से हाथ साफ करते हैं। कक्षा प्रारंभ होने से पहले अपने आसपास का पूरा क्षेत्र साफ करते हैं।

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