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डॉक्टर सा’ब ! क्या आपकी पत्नी-बच्चे ऐसे गंदे शौचालयों का इस्तेमाल करेंगे

यदि नहीं तो मरीज व उनके परिजन क्यों करें: कोर्ट

Danik Bhaskar | Dec 16, 2017, 06:51 AM IST

जोधपुर. अदालती आदेश के तीन महीने बाद भी शहर के तीन बड़े अस्पतालों की सफाई व्यवस्था दुरुस्त नहीं होने पर राजस्थान हाईकोर्ट के न्यायाधीश गोपालकृष्ण व्यास व डॉ. वीरेंद्र कुमार माथुर की खंडपीठ ने कड़ी नाराजगी जताई। कोर्ट ने मथुरादास माथुर, महात्मा गांधी और उम्मेद अस्पताल में गंदे पड़े शौचालयों के संबंध में अस्पतालों के अधीक्षकों से पूछते हुए मौखिक रूप से कहा- ‘क्या आप अपने बच्चों और पत्नियों को ऐसे शौचालय का इस्तेमाल करने के लिए भेज सकोगे? अगर नहीं तो फिर मरीज और उनके परिजन ऐसे शौचालय क्यों इस्तेमाल करें? निर्देश के बावजूद अस्पतालों में गंदगी होना शर्मनाक है। कलेक्टर के आश्वस्त करने के बाद भी ऐसे हालात हैं।’ कोर्ट ने इस मामले में कलेक्टर को तलब किया। उन्होंने व्यवस्थाओं में सुधार करने के लिए फिर से आश्वस्त करते हुए एक पखवाड़े की मोहलत मांगी। अब इस मामले में 10 जनवरी को सुनवाई होगी।


17 करोड़ के बजट की मंजूरी का हवाला दे मांगी मोहलत
- कलेक्टर डॉ. रविकुमार सुरपुर लंच के बाद कोर्ट में पेश हुए। उन्होंने बताया, कि अस्पतालों की सफाई में सुधार आया है। एमजीएच में 305, उम्मेद अस्पताल में 180 और एमडीएमएच में 220 शौचालय हैं। अस्पताल प्रबंधन सफाई व्यवस्था मेंटेन नहीं रख पा रहे हैं।

- जस्टिस संदीप मेहता के निरीक्षण के बाद आए सुझावों को अमल में लाने के लिए राज्य सरकार को 17 करोड़ रुपए का बजट मंजूरी के लिए भिजवाया है। छोटी सी बात को लेकर सफाई कर्मचारी भी शुक्रवार को हड़ताल पर चले गए थे। वे सारे जरूरी कदम उठाएंगे, केवल एक पखवाड़े की मोहलत और दी जाए

- कोर्ट ने उनका आग्रह स्वीकार करते हुए अगली सुनवाई 10 जनवरी को मुकर्रर की है। कलेक्टर ने तीनों अस्पतालों के अधीक्षकों सहित नर्सिंग अधीक्षक व पीडब्ल्यूडी के अफसरों की बैठक लेकर तुरंत प्रभाव से व्यवस्थाओं में सुधार के निर्देश भी दिए।

- कलेक्टर ने बताया, कि सफाई व्यवस्था में सुधार के लिए जिम्मेदारियां बांट दी गई हैं। अस्पताल में विजिटर्स की एंट्री की समीक्षा की गई है। रात में अस्पतालों की व्यवस्थाओं की निगरानी करने और उन्हें साफ-सुथरा बनाए रखने के लिए निरीक्षण करने को कहा गया है।

वरिष्ठ अधिवक्ता ने तस्वीरें पेश कर बताई असली पिक्चर

- सुबह 11 बजे सुनवाई शुरू करते ही जस्टिस व्यास ने अस्पताल अधीक्षकों से पूछा, कि पीडब्ल्यूडी ने मॉड्यूलर ऑपरेशन थिएटर तैयार कर लिए हैं, ये पजेशन देना चाहते हैं, क्या तकनीकी रूप से पूरी तरह तैयार हैं? इस पर तीनों अधीक्षकों ने सहमति जताई।

- इस बीच वरिष्ठ अधिवक्ता महेंद्रसिंह सिंघवी ने कहा, कि ओटी व अन्य व्यवस्थाअों के बारे में जो भी रिपोर्ट पेश की गई है, वह झूठी है। उनके साथ न्यायमित्र हेमंत दत्त रात को 11 बजे आकस्मिक रूप से हॉस्पिटल के हालात देखने खुद गए थे, वहां बेहद हालात खराब हैं। उन्होंने कुछ तस्वीरें भी कोर्ट के समक्ष पेश की।

- उन्होंने बताया, कि मरीजों व परिजनों के इस्तेमाल के लिए बनाए गए शौचालयों पर लॉक लगे हुए हैं और इनका केवल अस्पताल का स्टाफ उपयोग कर रहा है। शौचालय चॉक पड़े हैं। कहीं वॉश बेसिन के पाइप नहीं हैं, तो कहीं नल ही नहीं हैं। जगह-जगह कचरा बिखरा पड़ा है। हालात यह है कि मॉड्यूलर ऑपरेशन थिएटर के बाहर भी गंदगी पड़ी है, जिससे संक्रमण फैलने की पूरी आशंका है।

बिना देखे वेरिफाई करने वालों को सस्पेंड करने और वेतन रोकने की बात कही
- कोर्ट ने मौखिक टिप्पणी की- ‘काम हुआ या नहीं, इसका वेरिफिकेशन बिना देखे ही किया जा रहा है। ऐसे अफसरों को निलंबित करो।’ पीडब्ल्यूडी एक्सईएन चैनाराम विश्नोई बोल पड़े, कि उपकरण लोग तोड़ देते हैं।

- इस बात पर जस्टिस व्यास ने कड़ी नाराजगी जताई, कि ये क्या बोल रहे हो? ऐसे कैसे तोड़ देते हैं? मॉनिटरिंग क्यों नहीं की जाती? लेडीज टॉयलेट बंद पड़े हैं। फंड की दिक्कत है तो हमें बताइए। एक जनवरी तक सभी शौचालय आदि रिपेयर करो, नहीं तो अफसरों की तनख्वाह रोकनी पड़ेगी।’

- जस्टिस व्यास ने एडीएम सिटी सीमा कविया से कहा, कि उन्हें कई बार नियुक्त करने के बावजूद हालात नहीं सुधरे। कविया ने बताया, कि वे रिपोर्ट में उल्लेख कर चुकी हैं, कई बार अधीक्षकों को हिदायत भी दी, लेकिन सुधार नहीं हो रहा है। कोर्ट ने कविया को न्यायमित्र हेमंत दत्त व एडवोकेट वीआर चौधरी के साथ मौके पर भेजकर तथ्यात्मक रिपोर्ट तलब की।