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डीएसओ निर्मला मीणा को हाईकोर्ट से राहत, गिरफ्तारी पर लगाई रोक

मीणा को 22 या इससे पहले जांच अधिकारी के समक्ष उपस्थित रहने के दिए निर्देश

Dainik Bhaskar

Feb 07, 2018, 07:43 AM IST
Relief from the High Court of ias Nirmala Meena

जोधपुर. निलंबित जिला रसद अधिकारी निर्मला मीणा को राजस्थान हाईकोर्ट से राहत मिली है। जस्टिस गोपालकृष्ण व्यास ने निलंबित डीएसओ की गिरफ्तारी पर अंतरिम रोक लगाते हुए उसे इंट्रोगेशन के लिए 22 फरवरी या इससे पहले जांच अधिकारी के समक्ष उपस्थित होने के आदेश दिए हैं। साथ ही जांच अधिकारी को निर्देश दिए कि वह मीणा से होने वाली पूछताछ व जांच रिपोर्ट 26 फरवरी को कोर्ट के समक्ष पेश करें।


जस्टिस मनोज कुमार गर्ग द्वारा याचिका पर सुनवाई से इनकार करने के बाद चीफ जस्टिस प्रदीप नंद्राजोग ने जस्टिस गोपालकृष्ण व्यास की बेंच में याचिका भेजी। मंगलवार को अग्रिम जमानत याचिका पर बहस करते हुए वरिष्ठ अधिवक्ता एमएस सिंघवी ने कोर्ट को बताया, कि कस्टोडियल इंट्रोगेशन की जरूरत नहीं है, वे जांच में सहयोग करने के लिए तैयार हैं और जांच अधिकारी के समक्ष उपस्थित हो जाएंगी।

उन्होंने यह भी कहा कि याचिकाकर्ता के पास तो अतिरिक्त कार्यभार था। याचिकाकर्ता का कोई लेना-देना नहीं है। जबकि एएजी राजेश पंवार ने कहा, कि निलंबित डीएसओ के खिलाफ भ्रष्टाचार का बड़ा मामला है, इसलिए कस्टोडियल इंट्रोगेशन की जरूरत है। विभिन्न गवाहों ने भी याचिकाकर्ता के खिलाफ गवाही दी है।

दोनों पक्ष सुनने के बाद जस्टिस व्यास ने याचिकाकर्ता को 22 फरवरी या इससे पहले जांच अधिकारी के समक्ष उपस्थित होने के निर्देश दिए हैं, लेकिन एसीबी को उसे गिरफ्तारी नहीं करने के लिए पाबंद किया है। साथ ही एसीबी को इस मामले में याचिकाकर्ता से की गई जांच की रिपोर्ट 26 फरवरी को कोर्ट के समक्ष पेश करने के निर्देश दिए हैं।

इस मामले में अगली सुनवाई 26 फरवरी को ही मुकर्रर की है। एसीबी के एसपी अजयपाल लांबा भी मौजूद थे। उल्लेखनीय है कि निर्मला मीणा ने वर्ष 2016 में डीएसओ रहते हुए 33 हजार परिवारों के फर्जी नाम लिखकर 35 हजार क्विंटल अतिरिक्त गेहूं उठाकर घपला किया था।

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