Hindi News »Rajasthan »Jodhpur »News» Thailand S Dragon Fruit Craze In Desert

थाइलैंड के ड्रैगन फलों का क्रेज, पहली बार 4 गांवों के किसानों ने लगाए 2000 पौधे

गुजरात के गांधीधाम से जानकारी जुटाने के बाद सिवाना क्षेत्र के किसानों ने की शुरुआत

पूनमसिंह राठौड़ | Last Modified - Jan 16, 2018, 05:19 AM IST

थाइलैंड के ड्रैगन फलों का क्रेज, पहली बार 4 गांवों के किसानों ने लगाए 2000 पौधे

बाड़मेर. धोरों में बागवानी को लेकर किसानों में क्रेज बढ़ रहा है। अब तक खजूर व अनार की खेती करने वाले बाड़मेर के किसान थाइलैंड के ड्रैगन फल भी उगाने लगे हैं। जिले के 4 गांवों के किसानों ने पहली बार ड्रैगन के 2000 पौधे लगाए हैं। वातावरण मुफीद रहने से रेगिस्तानी इलाकों में इसकी खेती का प्रयोग सफल साबित हुआ है। यह फल मूल रूप से मध्य अमेरिका का है। इसके अलावा यह थाइलैंड, वियतनाम इजराइल और श्रीलंका में भी उपजता है। चीन में इसकी सबसे अधिक मांग होने से इसे ड्रैगन फ्रूट के नाम की पहचान मिली है।

जिले के सिवाना क्षेत्र के मिठौड़ा, पादरु, जागसा व बुड़ीवाड़ा में थाइलैंड के ड्रैगन फलों की खेती की जा रही है। प्रगतिशील किसान ओमसिंह बताते हैं कि गुजरात के गांधीधाम से ड्रैगन की खेती की जानकारी जुटाई। पहले तो सिर्फ 12 पौधे लगाए। मौसम अनुकूल होने से वृद्धि होने लगी। इसके बाद फौजाराम, राजू पटेल, विक्रमसिंह व कलाराम ने भी अपने फार्महाउस में ड्रैगन के पौधे लगाए हैं। उन्होंने बताया कि देश में अभी महाराष्ट्र, गुजरात, कर्नाटक और आंध्रप्रदेश में इसकी खेती होती है।


40 डिग्री तक तापमान सहने की क्षमता है पौधे में

ड्रैगन फ्रूट के पौधे को इसके बीजों से भी तैयार किया जाता है। बीजारोपण के बाद 11 से 14 दिन के अंतराल में यह पौधा उगना शुरू हो जाता है। अच्छे फलों के लिए पौधे में से ही 20 सेमी लंबी कटिंग लेकर नर्सरी में रोपना चाहिए। जड़ें निकलने के बाद खेत और घरों में लगाया जा सकता है। दस पौंड वजनी होने पर इस पौध में से फूल आने लगते हैं और उसके बाद फल। यह पौधा 30 से 40 डिग्री तक तापमान सह सकता है, लेकिन ज्यादा ठंड इसके लिए ठीक नहीं होती। राजस्थान का तापमान इस फल का उपजाने के लिए मुफीद माना जा रहा है।

ये है सार-संभाल का तरीका

सीमेंट कंक्रीट के 7.5 फीट लंबे और 6 इंच चौड़े पिलर तैयार करने चाहिए। 3 गुणा 3 मीटर की दूरी पर लगाए जाने वाले इन पिलर पर 2 फीट व्यास की रिंग लगानी चाहिए, जिसमें चारों ओर एक-एक छेद हो। हर पिलर के चारों ओर एक-एक पौधे का रोपण करना चाहिए। एक हैक्टेयर में 1111 पिलर लगाए जा सकते हैं, इस प्रकार इसमें 4444 पौधे लग सकते हैं। पिलर से पहले 2 फीट का गड्ढा खोदकर कार्बनिक खाद 100 सुपर फाॅस्फेट मिलाकर गड्ढा भर दिया जाता है। नियमित बूंद-बूंद सिंचाई की जरूरत होती है।

दैनिक भास्कर पर Hindi News पढ़िए और रखिये अपने आप को अप-टू-डेट | अब पाइए Jodhpur News in Hindi सबसे पहले दैनिक भास्कर पर | Hindi Samachar अपने मोबाइल पर पढ़ने के लिए डाउनलोड करें Hindi News App, या फिर 2G नेटवर्क के लिए हमारा Dainik Bhaskar Lite App.
Web Title: thaailaind ke draigan flon ka krej, pehli baar 4 gaaanvon ke kisaanon ne lgaaae 2000 paudhe
(News in Hindi from Dainik Bhaskar)

More From News

    Trending

    Live Hindi News

    0

    कुछ ख़बरें रच देती हैं इतिहास। ऐसी खबरों को सबसे पहले जानने के लिए
    Allow पर क्लिक करें।

    ×