--Advertisement--

45 साल की उम्र में इस मां ने दी थी कैंसर को मात, गिनीज बुक में दर्ज है नाम

एक एयरफोर्स अफसर की वाइफ शशि ने 45 साल की उम्र में कैंसर को मात दी।

Dainik Bhaskar

Feb 05, 2018, 11:24 AM IST
हसबैंड के साथ शशि शोभावत। हसबैंड के साथ शशि शोभावत।

जोधपुर. कहते हैं हिम्मत करने वालों की कभी हार नहीं होती। जोधपुर की शशि शोभावत पर यह लाइन बिल्कुल फिट बैठती है। एयरफोर्स इंजीनियर की वाइफ शशि ने 45 साल की उम्र में कैंसर को मात दी। यही नहीं, कैंसर ट्रीटमेंट के दौरान ही उन्होंने ऐसा कारनामा किया कि अब उनका नाम गिनीज बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड्स में दर्ज हो गया। DainikBhaskar.com इसी दिलेर महिला के बारे में बता रहा है।

ऐसे पता चला कैंसर के बारे में

- शशि बताती हैं, "मैं तब 45 साल की थी। मेरे सीने पर एक फुंसी हुई थी, जिसमें दर्द भी रहता था। मैंने लोकल हॉस्पिटल में इलाज करवाया। वहां के डॉक्टर्स ने कैंसर का शक जाहिर किया। मेरी पूरी फैमिली शॉक्ड थी, लेकिन मैंने हिम्मत नहीं हारी। मैं अपने हसबैंड कुलदीप सिंह शोभावत के साथ जयपुर स्थित महावीर कैंसर हॉस्पिटल ट्रीटमेंट के लिए पहुंची।"
- "मेरे दिमाग में बस एक ही बात चल रही थी। अगर मुझे कुछ हो गया तो मेरे पति और तीन बच्चों का ध्यान कौन रखेगा। सभी हर छोटे काम के लिए मुझ पर डिपेंड करते हैं। मेरा छोटा बेटा तब 7वीं में था और छोटी बेटी 10वीं में। बड़ी बेटी ने बीकॉम फर्स्ट ईयर में एडमिशन ही लिया था। इसी चिंता ने मुझे सबसे ज्यादा हिम्मत दी।"
- "6 कीमोथैरेपी सेशन्स के दौरान मुझे असहनीय दर्द से गुजरना पड़ा, लेकिन फैमिली के ख्याल ने ही मुझे उसे सहने की शक्ति दी।"

वर्ल्ड रिकॉर्ड के सर्टिफिकेट के साथ शशि शोभावत। वर्ल्ड रिकॉर्ड के सर्टिफिकेट के साथ शशि शोभावत।

बनाया ये वर्ल्ड रिकॉर्ड

 

 

- शशि शोभावत जनवरी 2016 में बने 120001 फीट 72 इंच (11,148.5 वर्ग मीटर) लंबा क्रोएशिया कम्बल बनाने वाले बुनकरों में शामिल थीं। गिनीज बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड में दर्ज इस रिकॉर्ड में कैंसर पेशेंट शशि शोभावत ने 45 वर्ग मीटर का कॉन्ट्रिब्यूशन किया था। जयपुर से सबसे ज्यादा कंबल बनाने वाली वो नंबर 1 महिला रहीं। यह इवेंट चेन्नई में मदर इंडिया क्रोशेट क्वींस नाम से हुआ था।
- शशि बताती हैं, "मेरे डॉक्टर ने मुझसे कहा था कि मैं खुद को ज्यादा से ज्यादा बिजी रखूं। इससे मेरे अंदर नेगेटिविटी नहीं आएगी। मैं रोजमर्रा के काम के साथ ही अपने समाज के ग्रुप इवेंट्स में पार्टिसिपेट करती थी। वहीं से मुझे इस इवेंट के बारे में पता चला। मुझे तब क्रोएशिया चलाना नहीं आता था। मैंने सिर्फ इसी इवेंट के लिए उसे सीखा। तब तक मेरी कीमोथैरेपी खत्म हो चुकी थी और मैं रिकवरी के लिए मेडिकेशन पर थी।"

हसबैंड और बेटी के साथ कैंसर सर्वाइवर शशि शोभावत। हसबैंड और बेटी के साथ कैंसर सर्वाइवर शशि शोभावत।

लोन लेकर हुआ इलाज

 

 

- शशि बताती हैं, "हमारी मिडल क्लास फैमिली है। मेरी बीमारी फैमिली के लिए इमोशनल ट्रॉमा के साथ ही फाइनेंशियल प्रेशर भी लेकर आई। हालांकि, मेरे हसबैंड ने कभी महसूस नहीं होने दिया कि मुझ पर कितना खर्च हो रहा है।"
- "मेरे इलाज के लिए फैमिली को 3 लाख रुपए का लोन लेना पड़ा था। मिडल क्लास फैमिली के लिए आज से 6 साल पहले यह काफी बड़ा अमाउंट था।"

कैंसर पेशेंट्स के साथ शशि शोभावत। कैंसर पेशेंट्स के साथ शशि शोभावत।

कैंसर ने ली दो परिजनों की जान

 

 

- शशि बताती हैं, "कैंसर का इलाज दवाइयों के साथ ही सेल्फ कॉन्फिडेंस से भी होता है। मेरी एक ननद भी कैंसर का शिकार हुई थी। एक और रिश्तेदार को यूटरस में कैंसर हुआ था। दोनों अब इस दुनिया में नहीं हैं। वो दोनों ही इस बीमारी से हार गए थे।"

- "मेरी ननद को मैं और मेरे हसबैंड खूब समझाते थे कि हिम्मत रखो, सब अच्छा होगा, लेकिन वो अंदर से टूट गई थी। इस बीमारी में अंदर से स्ट्रॉन्ग रहना बहुत जरूरी होता है। अगर आप अंदर से हार गए तो दुनिया की कोई मेडिसिन ठीक नहीं कर सकती।"

- शशि अब कैंसर पेशेंट्स के लिए कैंप ऑर्गेनाइज कर उन्हें मोटिवेट करती हैं। वो पूरी तरह सोशल वर्क से जुड़ी हुई हैं।

X
हसबैंड के साथ शशि शोभावत।हसबैंड के साथ शशि शोभावत।
वर्ल्ड रिकॉर्ड के सर्टिफिकेट के साथ शशि शोभावत।वर्ल्ड रिकॉर्ड के सर्टिफिकेट के साथ शशि शोभावत।
हसबैंड और बेटी के साथ कैंसर सर्वाइवर शशि शोभावत।हसबैंड और बेटी के साथ कैंसर सर्वाइवर शशि शोभावत।
कैंसर पेशेंट्स के साथ शशि शोभावत।कैंसर पेशेंट्स के साथ शशि शोभावत।
Bhaskar Whatsapp

Recommended

Click to listen..