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इंजीनियर ने इंटरनेट से सीखी खेती की हाइड्रोपोनिक तकनीक बिना मिट्टी छत पर उगा दी सब्जी, अब किसानों को देंगे ट्रेनिंग

News - बाप में एक साेलर कंपनी में कार्यरत इलेक्ट्रिकल इंजीनियर हरिराम शर्मा ने खेती की नई तकनीक हाइड्रोपोनिक में महारत...

Dainik Bhaskar

Apr 02, 2018, 02:10 AM IST
इंजीनियर ने इंटरनेट से सीखी खेती की हाइड्रोपोनिक तकनीक बिना मिट्टी छत पर उगा दी सब्जी, अब किसानों को देंगे ट्रेनिंग
बाप में एक साेलर कंपनी में कार्यरत इलेक्ट्रिकल इंजीनियर हरिराम शर्मा ने खेती की नई तकनीक हाइड्रोपोनिक में महारत हासिल की है। इस तकनीक से शर्मा ने बिना मिट्टी अपने घर की छत पर टमाटर, स्ट्राॅबेरी, भिंडी, तुरई, स्टीरिया, कृष्णा तुलसी , ऑडोमास व लेमन ग्रास आदि उगाने में सफलता पाई है। अब वे इस क्षेत्र के किसानों को भी इस तकनीकी की ट्रेनिंग देंगे। इस तकनीक की खास बात यह है कि इसमें मिट्टी का इस्तेमाल बिल्कुल भी नहीं होता और पानी भी बहुत कम लगता है। पौधों के लिए जरूरी पोषक तत्वों को पानी के जरिए सीधे जड़ों तक पहुंचाया जाता है। पौधों को आवश्यक पोषक तत्वों की आपूर्ति के लिए खनिजों के घोल की कुछ बूंदें ही महीने में केवल एक-दो बार डालने की जरूरत होती है, इसलिए इसकी मदद से पौधे कहीं भी उगा सकते हैं।

मूलत: भीलवाड़ा के कुंड़िया खुर्द निवासी शर्मा ने बताया कि वे किसान के बेटे हैं। पढ़-लिख जाने के बाद भी खेती से मोह नहीं छूटा। कुछ साल पहले उनके गांव में बंपर फसलें हुई। किसानों ने फसल खलिहानों में डाल दी थी। लेकिन तभी आई बांधी-बरसात ने सब कुछ चौपट कर दिया। तब उन्होंने किसानों के लिए कुछ करने की ठानी और इंटरनेट पर खेती के आधुनिक तरीकों के बारे में सर्च किया। 2013 में हाइड्रोपोनिक्स खेती के बारे में जाना। करीब चार साल तक इस पर रिसर्च करने के बाद उन्होंने स्वयं खेती शुरू कर दी। उनकी मंशा है कि प्रदेश के किसान इस खेती को समझें और इस तकनीक से खेती करें।

हाइड्रोपोनिक तकनीक: विशेष घोल से आवश्यक तत्व पहुंचाए जाते हैं पौधों की जड़ों तक

केवल पानी में या कंकड़ों के बीच नियंत्रित जलवायु में बिना मिट्टी के पौधे उगाने की तकनीक को हाइड्रोपोनिक कहते हैं। सामान्यतया पेड़-पौधे अपने आवश्यक पोषक तत्व जमीन से लेते हैं, लेकिन इस तकनीक में पौधों के लिए आवश्यक पोषक तत्व एक विशेष घोल से डाले जाते हैं। इस घोल में पौधों को बढ़वार के लिए आवश्यक खनिज व पोषक तत्व मिलाए जाते हैं। घोल में नाइट्रोजन, फास्फोरस, पोटाश, मैग्निशियम, कैल्शियम, सल्फर, जिंक और आयरन आदि तत्वों को एक खास अनुपात में मिलाया जाता है, ताकि पौधों को आवश्यक पोषक तत्व मिलते रहे।

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