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अहंकार ही मनुष्य के विनाश का कारण: गोविंदराम शास्त्री

कुड़ी स्थित श्री सुजाननाथ महाराज गोशाला में रामस्नेही संप्रदाय रामधाम खेड़ापा के महंत पुरुषोत्तमदास महाराज के...

Bhaskar News Network | Last Modified - Apr 02, 2018, 02:15 AM IST

अहंकार ही मनुष्य के विनाश का कारण: गोविंदराम शास्त्री
कुड़ी स्थित श्री सुजाननाथ महाराज गोशाला में रामस्नेही संप्रदाय रामधाम खेड़ापा के महंत पुरुषोत्तमदास महाराज के सान्निध्य में श्रीमद्भागवत कथा सप्ताह के तहत कथावाचक गोविंदराम शास्त्री ने रविवार को प्रवचन देते हुए कहा कि अहंकार ही मनुष्य के विनाश का कारण है। जब जीव अपने आप को ही सर्वज्ञ मान बैठता है तभी अहंकार का आगमन होता है और वहीं अहंकार मनुष्य की नश्वरता का कारण बनता है। इसलिए मनुष्य को चाहिए कि मन प्रभु की भक्ति में लगाए इससे अहंकार न पनप पाए। इस दौरान युवाचार्य गोविंदराम शास्त्री ने गौ माता की सेवा के लिए रामस्नेही भक्तों को आह्वान किया व नशा मुक्ति के लिए हाथ खड़े करवाकर जयकारे लगाए। भागवत कथा के समापन पर गांव में झांकियां सजाकर शोभायात्रा निकाली। इस दौरान संत बालूदास महाराज, सीताराम महाराज, केंद्रीय ऊन विकास बोर्ड के पूर्व चेयरमैन जसवंतसिंह विश्नोई, चौधरी चरणसिंह मेमोरियल सोसायटी के प्रदेशाध्यक्ष राजेश जाखड़, सरपंच गीता डूडी, जालाराम डूडी, कोजाराम सारण, ओमाराम सारण, किशोर सारण, अशोक देदर सहित श्रद्धालु मौजूद थे।

भोपालगढ़. श्रीमद्भागवत कथा के समापन पर निकली शोभायात्रा में शामिल हुए ग्रामीण और श्रीमद्भागवत कथा सप्ताह के तहत कथावाचक गोविंदराम शास्त्री ने रविवार को प्रवचन देते हुए।

हतुंडी में भागवत कथा 4 से, पोस्टर का विमोचन

बावड़ी | हतुंडी ग्राम पंचायत में 4 से 10 अप्रैल तक श्रीमद्भागवत कथा का आयोजन संत राजाराम महाराज के सान्निध्य में किया जाएगा। कथावाचन युवाचार्य संत कृपाराम महाराज द्वारा प्रतिदिन 12 से 4 बजे तक किया जाएगा। रविवार को कार्यक्रम के पोस्टर का विमोचन ओसियां विधायक व संसदीय सचिव भैराराम सियोल द्वारा किया। इस दौरान सरपंच बाबूराम मेघवाल, उपसरपंच पीराराम जाखड़, शेरसिंह, हनुमानसिंह, कल्याणसिंह, जेठाराम, उगराराम, देवराम, अशोक कुमार सहित कई ग्रामीण मौजूद थे।

समय के साथ परंपरा परिवर्तन जरूरी : संत श्रीरामगोपाल

नाथड़ाऊ | ठाकुरजी मंदिर प्रागंण में सप्त दिवसीय श्रीमद्भागवत कथा के चौथे दिन संत श्रीराम गोपाल महाराज ने कहा कि समय के साथ हर समाज को अपनी परंपरा में परिवर्तन लाते हुए अच्छी बातों को स्वीकार करना ही चाहिए। बाल विवाह, मृत्यु भोज जैसी सामाजिक कुरीतियों को बंद करने पर जोर दिया। कथा में देवराज इंद्र के अभिमान के मर्दन करने वाले लीलाधर गोपाल ने गोवर्धन पर्वत को एक अंगुली पर धारण करके संसार को बता दिया कि तीनों लोको के भार को उन्होंने ही संभाला है।

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