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एटीएम पर स्कीमर लगाते हैं बदमाश, कार्ड के डाटा चुरा खातों से निकालते हैं हमारी खून-पसीने की कमाई

सरकार एक तरफ देशभर में डिजिटल लेनदेन को बढ़ावा देने के लिए करोड़ों रुपए खर्च कर रही है, वहीं कानून की खामियों का फायदा...

Bhaskar News Network | Last Modified - Apr 02, 2018, 02:55 AM IST

सरकार एक तरफ देशभर में डिजिटल लेनदेन को बढ़ावा देने के लिए करोड़ों रुपए खर्च कर रही है, वहीं कानून की खामियों का फायदा उठा शातिर रोज आम लोगों के खून-पसीने की कमाई ठग रहे हैं। ये शातिर कभी ऑनलाइन ठगी करते हैं, तो कभी एटीएम मशीनों पर ही कार्ड के डाटा चुराने के लिए स्कीमर का इस्तेमाल कर रहे हैं। स्कीमर से कार्ड के डाटा चोरी कर उसके डुप्लीकेट कार्ड तैयार कर खातों से रुपए निकालने की घटनाएं पूरे प्रदेश में हो रही हैं। जोधपुर में भी पिछले कुछ दिनों में ऐसी कई घटनाएं हो चुकी है। इनमें खाताधारक का असली कार्ड उनके पास रखे होने के बावजूद किसी दूसरे स्थान पर लगे एटीएम से रुपए निकालने की वारदातें हो रही हैं। हैरानी की बात तो यह है कि धोखाधड़ी व ठगी के मामलों में कई बार बदमाश पकड़ में भी आए हैं, लेकिन कुछ दिन बाद वे जेल से बाहर निकल दुबारा ऐसी ही वारदातों में जुट जाते हैं। जोधपुर शहर में फरवरी महीने में ऐसी दो वारदातें सामने आई। कई मामले जयपुर, उदयपुर सहित प्रदेश के कई अन्य शहरों में भी हो चुके हैं।

रातानाडा इलाके में डुप्लीकेट कार्ड बना दो खातों से निकाले 1.40 लाख रुपए

रातानाडा इलाके में स्थित मिलिट्री स्टेशन पर तैनात कैप्टन केशव की प|ी अनुजा मित्तल के खाते से किसी शातिर ने 24 फरवरी की रात 2:15 से 2:16 के बीच उदयपुर की पारस होटल के पास स्थित एटीएम से 20-20 हजार रुपए के तीन ट्रांजेक्शन कर 60 हजार रुपए निकाल लिए। अनुजा मित्तल का असली एटीएम कार्ड इनके पास ही था और वे जोधपुर में ही थीं। सुबह नींद से जागने के बाद मोबाइल पर मैसेज देख उन्हें रुपए निकलने का पता चला।

रातानाडा एयरफोर्स स्टेशन पर तैनात सुनील कुमार सौरभ के खाते से किसी शातिर ने 6 फरवरी को अलग-अलग एटीएम से ट्रांजेक्शन करके 80 हजार रुपए निकाल लिए। जबकि, असली एटीएम कार्ड उनके पास ही रखा था। रुपए निकलने का कोई मैसेज भी उनके मोबाइल पर नहीं आया। खुद सुनील कुमार ने 4 फरवरी के बाद 17 फरवरी को ही एटीएम का उपयोग किया था। आखिरी ट्रांजेक्शन के बाद पर्ची पर बैलेंस कम दिखा, तो उन्हें संदेह हुआ।

फैक्टचैक

तब, जबकि पढ़े-लिखे लोग भी बदमाशों के हाथों लुट रहे हों, आपको जानना जरूरी है कि आप इन स्थितियों से कैसे बच सकते हैं, खुद भी सावधान रहें और दूसरों को भी करें

कार्ड के एंट्री पाइंट पर चिपकाते हैं स्कीमर, डाटा दूसरे कार्ड पर लेते हैं

आमतौर बदमाश पर कम आवाजाही वाली जगहों पर लगे एटीएम पर शिकार ढूंढते हैं। ऐसी मशीनों पर, कार्ड के एंट्री पाइंट पर हू-ब-हू दिखने वाला स्कीमर चिपका देते हैं। यही एटीएम कार्ड के डाटा चोरी करने में काम आता है। ऐसी डिवाइस इंटरनेट पर 4 से 15-20 हजार रु.तक मिलते हैं। स्कीमर में स्टोर हुए डाटा को भी एक डिवाइस के जरिए नए कार्ड पर ट्रांसफर किया जाता है। ऐसे नए खाली मैग्नेटिक डेबिट-क्रेडिट कार्ड भी 50 से 200 रुपए तक ऑनलाइन मिल जाते हैं। इसके बाद कोई भी वहां अपना कार्ड लगाता है, उसके डाटा स्कीमर में चले जाते हैं और खाताधारक को भनक तक नहीं लगती। इस स्कीमर में एक साथ कई कार्ड के डाटा स्टोर हो सकते हैं। इसके साथ कुछ बदमाश तो रुपए निकालने वाले शख्स के पीछे या आसपास खड़े होकर एटीएम पिन नंबर देख लेते हैं और कुछ खुफिया कैमरे लगा देते हैं। कई बदमाश पिन नंबर हासिल करने के लिए एटीएम मशीन पर डुप्लीकेट की-बोर्ड भी लगा देते हैं, जिसमें बटन दबाने पर वे उसमें स्टोर हो जाते हैं। स्कीमर से चुराए डाटा से कार्ड का क्लोन तैयार करके वे पहले से हासिल पिन कोड का इस्तेमाल करके खाते से रुपए उड़ा लेते हैं।

ऐसे करें स्कीमर कैमरा या डुप्लीकेट की-बोर्ड की पड़ताल

एटीएम मशीन पर कार्ड लगाने से पहले एंट्री पाइंट वाले हिस्से को हाथ से हल्का सा हिलाकर या बारीकी से देखने पर स्कीमर के चिपके होने का पता चल सकता है। स्कीमर होने पर एटीएम मशीन की बॉडी और स्कीमर के बीच हल्की जगह भी नजर आ सकती है। एटीएम स्क्रीन या की-बोर्ड के ऊपरी हिस्से में हाथ फेरकर देखें कि वहां कोई खुफिया कैमरा तो नहीं लगा है। इसी तरह, की-बोर्ड भी सामान्य से ऊंचा उठा होने, इससे छेड़छाड़ की आशंका होने पर भी उस एटीएम का उपयोग नहीं करें। संदेह होने पर एटीएम के आसपास लिखे हेल्पलाइन पर भी कॉल कर सकते हैं।

भास्कर गाइड

इन बातों का भी रखें ख्याल

यथासंभव कार्ड पर अंकित गुप्त कोड सीवीवी संख्या को याद करके या कहीं लिख लें और कार्ड पर अंकित नंबर स्क्रैच कर मिटा दें।

इंटरनेट बैंकिंग पासवर्ड अति सुरक्षित हो, जिसमें अल्फा-न्यूमेरिक वैल्यू के साथ बहुत मजबूत है।

खाते में हर ट्रांजेक्शन पर एसएमएस की सुविधा का चयन जरूर करें।

अपने बैंकिंग पासवर्ड को कभी भी फोन या ईमेल में साधारण अंग्रेजी शब्दों में स्टोर नहीं करें।

जहां तक संभव हो, कार्ड का बीमा जरूर करवाएं।

कभी भी कार्ड पर अंकित सीवीवी नंबर और वैधता तिथि किसी को भी फोन या ईमेल पर नहीं बताएं। बैंक कभी भी ऐसी जानकारी नहीं मांगता।

रेस्टोरेंट हो या पेट्रोल पंप, कार्ड से भुगतान करने पर पिन नंबर खुद ही लगाएं, किसी दूसरे को नहीं बताएं।

खुद के मोबाइल में बैंक के टोल फ्री व आपातकालीन ग्राहक सेवा नंबर जरूर सेव रखें। जरूरत पड़ने पर तत्काल कॉल किया जा सकता है।

आरबीआई के नियमानुसार बैंक करे धोखाधड़ी राशि की भरपाई

गत वर्ष 6 जुलाई को आरबीआई ने ऑनलाइन बैंकिंग लेन-देन में ग्राहकों के साथ होने वाली धोखाधड़ी से संबंधित नियमों में बदलाव किया था। इसके तहत कार्ड क्लोनिंग से जुड़े मामलों में ग्राहक को होने वाले नुकसान की भरपाई के लिए संबंधित बैंक जिम्मेदार होगा। इसके लिए ग्राहक को तत्काल फ्रॉड की सूचना अपनी ब्रांच में देनी चाहिए। ऐसे मामलों की शिकायत के लिए बैंकों को 24 घंटे वेबसाइट, फोन बैंकिंग, एसएमएस, ई-मेल, टोल फ्री हेल्पलाइन, होम ब्रांच रिपोर्टिंग की सुविधा उपलब्ध करानी चाहिए। शिकायत मिलते ही इसे दर्ज कर ग्राहक को पंजीकृत प्रतिक्रिया संख्या की सूचना भी भेजनी चाहिए। इसके साथ संबंधित पुलिस थाने में भी एफआईआर दर्ज करानी चाहिए। ग्राहक को भी अपनी ब्रांच में स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोसिजर फॉर्म भरकर देना चाहिए। इस पर बैंक की कमेटी नुकसान की भरपाई का निर्णय करेगी। बैंक अपने ऐसे ग्राहक, जो अपने मोबाइल नंबर खाते से नहीं जुड़वाते है, उसे एटीएम नकद निकासी के अलावा कोई भी इलेक्ट्रॉनिक लेनदेन की सुविधा नहीं दे सकते।

कार्ड प्रोटेक्शन प्लान के तहत इंश्योरेंस सुविधा भी

कार्ड क्लोनिंग या अन्य तरह की धोखाधड़ी से बचने के लिए खाताधारक कार्ड प्रोटेक्शन प्लान के तहत डेबिट या क्रेडिट कार्ड का बीमा भी करवा सकता है। इसके लिए एसबीआई, आईसीआईसीआई, एक्सिस बैंक, कोटक महिंद्रा सहित कई अन्य बैंक सीपीपी प्लान के तहत अपने ग्राहक को कार्ड खोने, चोरी होने या धोखाधड़ी से होने वाले नुकसान से बचाने के लिए बीमा सुविधा उपलब्ध करवाते हैं।

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