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लहसुन ने बढ़ाई किसानों की चिंता

तिंवरी मेंे लहसुन की फसल निकालते किसानों के माथे पर चिंता की लकीरें साफ दिख रही है। सही भाव नहीं मिलने तक ये फसल...

Bhaskar News Network | Last Modified - Apr 02, 2018, 03:00 AM IST

लहसुन ने बढ़ाई किसानों की चिंता
तिंवरी मेंे लहसुन की फसल निकालते किसानों के माथे पर चिंता की लकीरें साफ दिख रही है। सही भाव नहीं मिलने तक ये फसल नहीं बेचेंगे। इस साल लहसुन की पूरी पैदावार खेतों में ही पड़ी है। ऐसे में खेतों में ढेरियां लगी हुई है।

जिले भर में 20 हजार बीघा में हुई पैदावार, पिछले साल को छोड़ सबसे निचले स्तर पर

जेठमल जैन | तिंवरी

तीन साल पहले तक 100 रुपए प्रति किलो तक बिकने वाला लहसुन अब 10 से 20 रुपए में बिक रहा है। प्याज और मूंगफली के बाद अब इस नगदी फसल ने जिले के किसानों के आंसू निकाल दिए है। तिंवरी, बालरवा, बिंजवाड़िया, फलोदी व भोपालगढ़ आदि क्षेत्रों में 20 हजार बीघा क्षेत्र में बोए गए लहसुन की पैदावार बाजार में आ गई है। जिले की मंडियों में लहसुन 1000 से 2000 रुपए प्रति क्विंटल के भाव में बिक रहा है। इन भावों से लागत भी निकलनी मुश्किल है। पिछले 10 सालों में यह शुरुआती दौर में सबसे निचले स्तर पर है। हालांकि पिछले साल भी अगस्त-सितंबर में भाव 5 से 15 रुपए तक गए थे, लेकिन शुरुआती दौर 35 रुपए तक भाव मिले थे। ऐसे में किसान संघ ने सरकारी खरीद की मांग कर किसानों को राहत देने की मांग की है।

10 रु. तक पहुंचे भाव, प्रति बीघा 10 हजार का घाटा

खाद के भाव और मजदूरी बढ़ने से किसानों पर दोहरी मार, फसल बेचने नहीं जा रहे, सड़ने की आशंका

लहसुन के बीज के भाव बीते साल की तुलना में कम होने के कारण इस साल प्रति बीघा फसल की लागत में कमी आई थी, लेकिन खाद के भाव और मजदूरी बढ़ने से किसान इसका लाभ नहीं उठा पाए। किसानों के अनुसार प्रति बीघा 25 हजार रुपए की लागत आती है और प्रति बीघा 10 से 12 क्विंटल पैदावार होती है। मंदी के चलते किसानों को प्रति बीघा 10 हजार से अधिक का नुकसान हो रहा है।

पर्याप्त भाव नहीं मिलने के कारण किसान अपनी फसल बेचने मंडियों में नहीं जा रहे। पिछले साल भी आधी पैदावार खेतों में पड़ी सड़ गई है। इस साल भी ऐसी ही आशंका है। भदवासिया फल सब्जी मंडी के ब्रोकर हीरालाल सांखला के अनुसार मंडी में रोजाना 50 टन लहसुन की आवक हो रही है।लेकिन यह कोटा से आ रहा है। जोधपुर के किसान नहीं आ रहे।

तीन साल पहले 100 रुपए तक में बिका, पिछले साल अंतिम दौर में 5 रुपए तक गिरा

साल भाव (प्रति किलो)

2013 25 से 35 रुपए

2014 40 से 60 रुपए

2015 50 से 100 रुपए

2016 50 से 70 रुपए

साल भाव (प्रति किलो)

2013 25 से 35 रुपए

2014 40 से 60 रुपए

2015 50 से 100 रुपए

2016 50 से 70 रुपए

Rs. 50-60 भाव मिले तो ही हमारे लिए फायदेमंद रहेगा लहसुन

खेत में पांच माह देखरेख के बाद प्रति बीघा 10 से 12 क्विंटल पैदावार होती है। 50 से 60 रुपए प्रति किलो दाम मिलने पर ही यह फसल हमारे के लिए फायदे का सौदा होगी। सरकार को न्यूनतम मूल्य तय करना चाहिए। चावंडाराम , किसान, बालरवा

2017 मार्च-अप्रैल में Rs. 20 से 35 रुपए बिकने के बाद अगस्त-सितंबर तक 5 से Rs. 15 ही मिले भाव।

सरकार ने खरीद का प्रस्ताव स्वीकार नहीं किया तो आंदोलन

14 मार्च को सरकार से समझौते के बाद कृषि विभाग ने लहसुन खरीद का प्रस्ताव भेजा है। प्रस्ताव स्वीकार कर खरीद शुरु नहीं हुई तो संगठन आंदोलन को विस्तार देने पर मजबूर होगा। तुलछाराम सिंवर, आंदोलन संयोजक

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Web Title: लहसुन ने बढ़ाई किसानों की चिंता
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