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18 साल पहले 6 माह के लहूलुहान बेटे को नहीं मिल पाए थे फैक्टर, मुहिम छेड़ मुफ्त कराई व्यवस्था

गिरीश शर्मा. उदयपुर| लगातार खून बहाने वाली जानलेवा बीमारी हिमोफीलिया का एमबी अस्पताल में मुफ्त इलाज एक रियल हीरो...

Bhaskar News Network | Last Modified - Apr 02, 2018, 03:00 AM IST

गिरीश शर्मा. उदयपुर| लगातार खून बहाने वाली जानलेवा बीमारी हिमोफीलिया का एमबी अस्पताल में मुफ्त इलाज एक रियल हीरो के संघर्ष का नतीजा है। ये हैं शहर में यूनिवर्सिटी रोड के रहने वाले बाबूलाल पुरोहित, जिन्होंने अपनी टीम के 10 साथियों के साथ प्रदेशभर में मुहिम छेड़ रखी है। मकसद इस बीमारी से मासूम और जरूरतमंद की जान नहीं जाने देने कस है। भास्कर ने इस जिद और जुनून का बैकग्राउंड जाना तो जज्बे से भरी कहानी सामने आई। बकौल पुरोहित, 18 साल पहले उनका छह महीने का बेटा घर के अहाते में गिर गया था। मुंह से खून बहने लगा। उदयपुर में राहत नहीं मिली। मुंबई तक जांचें करवाईं। फिर पता लगा कि बच्चा हिमोफीलिया से पीड़ित है। उसके इलाज के दौरान जो हालात बने, उनका सामना किसी और को नहीं करना पड़े इसलिए अपने शहर और संभाग के लिए बीड़ा उठाया। आज सरकार अपने अस्पतालों 5 से 17.5 हजार रुपए तक के फैक्टर निशुल्क दे रही है। संभाग में हिमोफीलिया के 150 से ज्यादा मरीज हैं।

मुंबई में मुफ्त इलाज था, लेकिन दूसरे राज्य वालों के लिए नहीं, झकझोर गई व्यवस्था

पुरोहित ने बताया कि बेटा साल 2000 में जख्मी हुआ था। खून से लथपथ था। उदयपुर के कई विशेषज्ञ डॉक्टरों के पास ले गए, लेकिन राहत नहीं मिली। नाजुक हालत में जैसे-तैसे मुंबई के केईएम अस्पताल लेकर गए। जांच रिपोर्ट में हीमोफीलिया 7-ए बताया। एक सप्ताह में फ्रेश फ्रोजन प्लाज्मा और क्रायो प्रेसीपिटेट से ब्लीडिंग रोकी गई, क्योंकि फैक्टर वहां भी एक-एक लाख रुपए के थे। बूते से बाहर थे, इसलिए लगवा नहीं सके। बच्चे की सेहत थोड़ी सुधरी कि पुरोहित उसी साल हीमोफीलिया सोसायटी मुंबई के मेम्बर बने। तब महाराष्ट्र सरकार हीमोफीलिया मरीजों को मुफ्त फैक्टर मुहैया कराती थी। हालांकि यह सुविधा दूसरे राज्य के मरीजों के लिए नहीं थी। ठीक चार साल बाद पुरोहित ने 2004 में ऐसे 10 लोगों से संपर्क साधा, जिनके बच्चे इसी बीमारी से ग्रस्त थे। यही था हीमोफीलिया सोसायटी का उदयपुर चैप्टर। उदयपुर और जयपुर सोसायटी ने जोधपुर हाईकोर्ट में रिट दायर की। हीमोफीलिया मरीजों के लिए यह पैरवी मुख्यमंत्री निशुल्क योजना में शामिल कराने के लिए थी।

हालांकि वर्ष 2011 में सरकार ने हीमोफीलिया को मुख्यमंत्री रक्षा कोष में शामिल किया। इसके साथ ही उदयपुर के आरएनटी मेडिकल कॉलेज के बाल चिकित्सालय में हीमोफीलिया वार्ड भी बना, जिसका जिम्मा डॉ. लाखन पोसवाल और डॉ. बलदेव मीणा को दिया गया था। अब यहां मरीजों को हर वक्त निशुल्क फैक्टर की सुविधा दी जा रही है। बता दें कि हीमोफीलिया रोगी अब दिव्यांग श्रेणी में हैं।

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(News in Hindi from Dainik Bhaskar)

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