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इस गांव के हर दूसरे घर का युवा विदेशों में सिखा रहा है घुड़सवारी

Bhaskar News Network | Last Modified - Mar 04, 2018, 03:15 AM IST

जोधपुर के सगरां गांव के 150 से ज्यादा युवा हॉर्स राइडिंग फील्ड में

महेश रामावत | देचू (जोधपुर)

जोधपुर से 130 किमी दूर है सगरां गांव। यहां 300 घर हैं। खास बात यह है कि गांव में रहने वाले 150 से ज्यादा युवा अरब देशों के शेखों व रइसों को घुड़सवारी सिखा रहे हैं। कुछ युवा इंग्लैंड में भी प्रशिक्षण दे रहे हैं। यह शुरुआत 12 साल पहले हुई थी। तब गांव के पदमसिंह मजदूरी करने के लिए पुणे गए थे। वहां एक रिश्तेदार के यहां ठहरे। काम की तलाश में एक दिन वे घोड़ों के अस्तबल भी पहुंचे। वहां काम करना शुरू कर दिया।

शुरू में मात्र 1500 रुपए हर महीने मिलते थे। लेकिन यहां उन्होंने घुड़सवारी अच्छी सीख ली। इसमें वह ऐसे पारंगत हुए कि कुछ समय बाद ही एक कर्णसिंह से मुलाकात हुई। वे कुवैत में काम करते थे। पदमसिंह उनके साथ कुवैत चले गए। वहां घोड़ों की रेस करवाने वाले शेखों व रइसों से मुलाकात हुई तो उनके अस्तबल में काम करने लगे। बाद में पद्मसिंह की देखा-देखी गांव के कई लोग पुणे में अस्तबलों में काम करने लगे। आज 150 युवा हॉर्स राइडिंग की फील्ड में विदेशों में काम कर रहे हैं।

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इस गांव के हर दूसरे घर...

पदमसिंह के अलावा भोजराजसिंह, हरिसिंह, श्रवणसिंह व नरेन्द्रसिंह 5 साल से ज्यादा इंग्लैंड में रहने के कारण वहां की नागरिकता हासिल कर चुके हैं। भोजराजसिंह व पदमसिंह दोनों 7 यूरोपियन देशों में बिना वीजा कभी भी आ जा सकते हैं। सगरां गांव के करीब सौ युवा अकेले दुबई में रहते हैं। शेष मलेशिया, इंग्लैंड, न्यूजीलैंड सहित अन्य देशों में हॉर्स राइडिंग सिखा रहे हैं। अलग-अलग देशों में अलग-अलग सैलरी मिल रही है। सगरां गांव पहुंचने के लिए रेतीले टीलों व उबङ-खाबड़ रास्तों से होकर जाना पड़ता है। ग्रामीण किशनसिंह व खीवसिंह बताते हैं कि पहले ग्रामीण खेती पर ही निर्भर थे। गिने-चुने लोग सेना व अन्य नौकरी में थे। लेकिन एक दशक से गांव की स्थिति बदल गई है। विभिन्न देशों में गांव के 150 युवा घुड़सवारी सिखा रहे हैं।

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Web Title: इस गांव के हर दूसरे घर का युवा विदेशों में सिखा रहा है घुड़सवारी
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