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कोर्ट में पीड़िता पक्ष का तर्क बचाव पक्ष के पहले पेश दस्तावेज में केजी तक ही एंट्री थी, जिरह में दूसरी कक्षा तक कैसे हो गई?

यौन उत्पीड़न के आरोपी आसाराम के मामले में शुक्रवार को एससी एसटी कोर्ट के पीठासीन अधिकारी मधुसूदन शर्मा ने सुनवाई...

Danik Bhaskar | Apr 01, 2018, 03:45 AM IST
यौन उत्पीड़न के आरोपी आसाराम के मामले में शुक्रवार को एससी एसटी कोर्ट के पीठासीन अधिकारी मधुसूदन शर्मा ने सुनवाई की। पीड़िता की ओर से अंतिम बहस में तर्क दिया गया, कि पीड़िता की आयु मेट्रिकुलेशन सर्टिफिकेशन के आधार पर ही मानी जाएगी। उन्होंने इस संबंध जेजे एक्ट नियम 12 का भी जिक्र किया। समयाभाव के चलते अंतिम बहस अधूरी रही, जो सोमवार को भी जारी रहेगी।

पीड़िता की ओर से अधिवक्ता पीसी सोलंकी ने अंतिम बहस करते हुए कहा, कि बचाव पक्ष द्वारा पॉक्सो एक्ट के तहत आयु की जांच करने का प्रार्थना पत्र पेश किया था। शंकर मुमुक्षु विद्यापीठ शाहजहांपुर के कुछ दस्तावेज पेश किए थे। तब डेट ऑफ एडमिशन और डेट ऑफ प्रमोशन केवल नर्सरी क्लास की दिखाई, जबकि केजी क्लास का डेट ऑफ एडमिशन दिखाया गया, यहां तक ही एंटी थी। इसके पश्चात क्लास प्रथम व द्वितीय की कोई एंट्री नहीं थी। इस प्रार्थना पत्र को विचारण न्यायालय ने खारिज कर दिया। इसे हाईकोर्ट में चुनौती दी, उसे भी 15 मई 2014 को खारिज कर दिया गया। फिर पीड़िता से जिरह शुरू हुई उस दौरान शंकर मुमुक्षु विद्यापीठ के इसी दस्तावेज को बतौर प्रदर्श न्यायालय में प्रदर्शित करवाया, उस समय इस दस्तावेज में कक्षा द्वितीय तक की एंट्री कर ली गई, इससे स्पष्ट है कि, इन दस्तावेज के साथ छेड़छाड़ कर न्यायालय में पेश किया है। अधिवक्ता सोलंकी ने यह भी तर्क दिया, कि नाबालिग बच्चों की आयु संबंधी जांच जुवेनाइल जस्टिस एक्ट के तहत होती है। इसी एक्ट के वर्ष 2007 के रूल 12 के अनुसार आयु का आधार मेट्रिकुलेशन सर्टिफिकेट ही माना जाएगा। अगर यह सर्टिफिकेट नहीं होता है तो स्कूल द्वारा जारी प्रमाण पत्र मान्य होगा, लेकिन इसमें प्ले स्कूल द्वारा जारी प्रमाण पत्र शामिल नहीं है। सुनवाई के लिए आसाराम को भी कोर्ट के समक्ष पेश किया गया।