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लूणी प्रधान नीरज कंवर का जाति प्रमाण पत्र खारिज: जोधपुर का मूल निवासी दिखाने के लिए लगाया दूसरे का राशन कार्ड

मंडोर प्रधान के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पास होने के बाद अब लूणी प्रधान के खिलाफ कानूनी कार्रवाई का शिकंजा बढ़ता...

Danik Bhaskar | Mar 01, 2018, 04:30 AM IST
मंडोर प्रधान के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पास होने के बाद अब लूणी प्रधान के खिलाफ कानूनी कार्रवाई का शिकंजा बढ़ता जा रहा है। लूणी प्रधान की ओबीसी सीट पर सामान्य वर्ग के होते हुए भी जाली जाति प्रमाण से उम्मीदवार बन चुनाव जीतने का आरोप नीरज कंवर पर है। इनके खिलाफ हाईकोर्ट में भी मामला विचाराधीन है। इसी मामले में हाईकोर्ट ने जिला प्रशासन को निर्देश दिए थे कि जाति प्रमाण पत्र की सत्यता को लेकर दोनों पक्षों को सुनने के बाद निर्णय कोर्ट में पेश किया जाए। इसको लेकर जिला कलेक्टर की अध्यक्षता में हुई जिला छानबीन समिति की बैठक में फैसला लिया गया है, कि नीरज कंवर को जारी अन्य पिछड़ा जाति का प्रमाण पत्र निरस्त करने योग्य है। यह रिपोर्ट हाईकोर्ट में भी पेश की जाएगी। दरअसल, लूणी तहसील के गंगाणा गांव निवासी बाबूराम ने 28 मार्च 2017 को इस आशय की शिकायत की थी, कि नीरज कंवर को जारी जाति प्रमाण पत्र गलत है। इसको लेकर छानबीन समिति ने तहसीलदार से मामले की जांच करवाई। रिपोर्ट में सामने आया कि यह प्रमाण पत्र मिथ्या दस्तावेज देकर हासिल किया गया है। इस बीच, राजस्थान हाईकोर्ट ने गत 6 फरवरी को बाबूराम की याचिका के तहत छानबीन समिति से फैसला मांगा, जो 26 फरवरी तक कोर्ट में पेश किया जाना था। समिति ने दोनों पक्षों को बुलाकर सुनवाई की। आरोप यह था कि नीरज कंवर ने अधिकारियों व कर्मचारियों से मिलीभगत कर अपनी जाति उप वर्ग कुम्भावत के स्थान पर परमार बताकर अनुचित फायदा उठाया। शिक्षक मगसिंह ने नीरज कंवर के पिता को कृषक मानकर वार्षिक आय 70 हजार का प्रमाण पत्र दे दिया। नीरज कंवर के पिता जयपुर में कांस्टेबल हैं, यह तथ्य छुपाया गया। उन्होंने अपनी सर्विस बुक में खुद को राजपूत सामान्य वर्ग का बताया हुआ है। उनका नाम जयपुर के विद्यानगर विधानसभा क्षेत्र की मतदाता सूची में दर्ज है। समिति की बैठक में नीरज कंवर की ओर से जवाब दिया गया कि उनका परिवार पैतृक रूप से अग्निवंशी राजपूत है जिसमें परमार उप जाति भी होती है और वह परमार उप जाति से जुड़ी हैं, इसलिए यह आरोप गलत है। उनके परिवार के अन्य सदस्य जयपुर की आमेर तहसील में खेती करते हैं, इसलिए वे कृषक परिवार से हैं। उनकी जाति की तस्दीक करने वाले व्यक्तियों से न तो पूछताछ की गई और न बयान दर्ज किए गए।

नीरज कंवर व बाबूराम की ओर से पेश किए गए तथ्यों का विश्लेषण करने के बाद जिला स्तरीय छानबीन समिति के सदस्यों ने माना कि नीरज कंवर के पिता भवानी सिंह ने अपना निवास स्थान जोधपुर दर्शाने के लिए शपथ पत्र में जो राशन कार्ड संख्या व वार्ड अंकित किया है, वह पन्नेसिंह के नाम पर है। जाति प्रमाण पत्र के लिए पिता के सरकारी सेवा में होने का तथ्य छुपाया गया। पत्रावली में ऐसा कोई सबूत पेश नहीं किया गया, जिसमें उनकी जाति कृषक (करसा) राजपूत (परमार) साबित होती हो। इसके आधार पर समिति ने नीरज कंवर को जनवरी 2015 में जारी ओबीसी का प्रमाण पत्र खारिज करने की अनुशंसा की।

नीरज कंवर

जाति प्रमाण पत्र जारी करने वाले कर्मचारियों के खिलाफ कार्रवाई के निर्देश

समिति अध्यक्ष जिला कलेक्टर डॉ. रविकुमार सुरपुर ने इस संबंध में जारी कार्यवाही विवरण में लिखा है कि आवश्यक दस्तावेज व आवेदन पत्र की समस्त प्रविष्टियों में कमी के आधार पर जाति प्रमाण पत्र जारी करना गलत है। सही दस्तावेज और सही जानकारी के साथ सक्षम अधिकारी के समक्ष पुन: आवेदन किया जा सकता है। इसके साथ, अपूर्ण आवेदन पत्रों पर जाति प्रमाण पत्र जारी करने वाले कर्मचारियों के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई के निर्देश दिए हैं।

इधर, नंदवान सरपंच राजेश्वरी का निर्वाचन कोर्ट से शून्य घोषित

लीगल रिपोर्टर. जोधपुर| अतिरिक्त वरिष्ठ सिविल न्यायाधीश एवं अतिरिक्त मुख्य महानगर मजिस्ट्रेट नीलम शर्मा ने एक चुनाव याचिका आंशिक रूप से स्वीकार करते हुए नंदवान (जोधपुर जिला) सरपंच राजेश्वरी पटेल के निर्वाचन को शून्य घोषित कर दिया है। कोर्ट ने आदेश की प्रति जिला निर्वाचन अधिकारी (पंचायत) को देकर अग्रिम कार्यवाही के निर्देश दिए हैं। प्रार्थी कमला मोटडा प|ी सोहम मोटडा ने सरपंच राजेश्वरी के विरुद्ध राजस्थान पंचायतीराज अधिनियम 1994 के तहत चुनाव याचिका दायर की थी। इसमें बताया गया कि अप्रार्थी ने 31 जनवरी 2015 को नामांकन दाखिल किया, जिसमें दो संतानों की जानकारी दी गई, जबकि उसके एक और संतान है जो ननिहाल में रहती है। अप्रार्थी ने तीसरी संतान के बारे में कोई जानकारी नहीं दी।