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शिक्षाविदों ने जताई वेदों के अनुसंधान की आवश्यकता

4 वर्ष पहले
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जोधपुर पंडितमधुसूदन ओझा प्रकोष्ठ, संस्कृत विभाग, जेएनवीयू एवं श्री शंकर शिक्षायतन, नई दिल्ली के संयुक्त तत्वावधान में गुरुवार को गांधी शांति प्रतिष्ठान केंद्र में पंडित मोतीलाल शास्त्री स्मृति व्याख्यानमाला का आयोजन किया गया। पंडित मधुसूदन ओझा प्रकोष्ठ के पूर्व निदेशक एवं राष्ट्रपति से सम्मानित प्रो. गणेशीलाल सुथार ने पंडित ओझा रचित शारीरिक विमर्श ग्रंथ के वैशिष्ट्य को उद्घाटित किया। प्रो. सत्यप्रकाश दुबे ने कहा, कि वेद मंत्रों का उच्चारण पर्याप्त नहीं, उसके अर्थ के अनुसंधान की भी आवश्यकता है। शोध प्रकोष्ठ की निदेशक एवं अध्यक्ष प्रो. प्रभावती चौधरी ने शोध प्रकोष्ठ की स्थापना के उद्देश्य पर प्रकाश डालते हुए पं. ओझा के व्यक्तित्व कृतित्व से अवगत करवाया। इस अवसर पर गत 20 वर्षों से प्रकोष्ठ की निस्वार्थ सेवा में संलग्न डाॅ. छैलसिंह राठौड़ का अभिनंदन किया। संचालन डाॅ. दीपमाला गहलोत ने किया एवं पं. नीतेश व्यास ने वैदिक मंगलाचरण किया। संस्कृत विभाग के वरिष्ठ आचार्य प्रो. मंगलाराम विश्नोई ने धन्यवाद ज्ञापित किया।

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