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जयपुर में जेडीए ने गोरखनाथ मंदिर की दीवार तोड़ी, एसपी एपीओ, 2 को हटाया

News - जयपुर विकास प्राधिकरण (जेडीए) की प्रवर्तन विंग को टोंक रोड के सीतापुरा क्षेत्र स्थित गोरखनाथ मंदिर की दीवार...

Dainik Bhaskar

Mar 01, 2018, 05:35 AM IST
जयपुर में जेडीए ने गोरखनाथ मंदिर की दीवार तोड़ी, एसपी एपीओ, 2 को हटाया
जयपुर विकास प्राधिकरण (जेडीए) की प्रवर्तन विंग को टोंक रोड के सीतापुरा क्षेत्र स्थित गोरखनाथ मंदिर की दीवार तोड़ना भारी पड़ गया। मंदिर तोड़ने के बाद स्थानीय स्तर पर विरोध हुआ और कुछ ही घंटों में मामला सरकार तक पहुंच गया। इसके बाद 24 घंटे तक चले राजनैतिक घटनाक्रम में सरकार ने पहले प्रवर्तन विंग के मुखिया पुलिस अधीक्षक राहुल जैन को एपीओ किया। जोन 8 के प्रवर्तन अधिकारी नरेंद्र खींचड़ व तहसीलदार रेखा यादव को भी जेडीए से हटा दिया। हालांकि सरकारी जमीन पर अतिक्रमण हटाने की फाइल पर जेडीए कमिश्नर वैभव गालरिया व जोन 8 के डिप्टी कमिश्नर प्रवीण अग्रवाल की भी अप्रूवल है। जेडीए में पहली बार एक मंदिर की दीवार हटाने पर तीन अफसरों को हटाया। वहीं एपीओ हो चुके पुलिस अधीक्षक राहुल जैन ने बताया कि प्रवर्तन विंग ने पूरी कार्यवाही नियमानुसार की है।

2015 में योगी आदित्यनाथ ने किया था विरोध

मंदिर के महंत राम सिंह का कहना है कि यह मंदिर 42 साल से है और सड़क सीमा से बाहर है। यहां पर दूसरा भी मंदिर बना हुआ है, लेकिन पीछे स्थित दुकानों को फायदा देने के लिए जेडीए अफसरों ने मंदिर में तोड़ फोड़ की है। जेडीए की गलत कार्रवाई को लेकर 2015 में तत्कालीन सांसद व यूपी के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने भी जेडीए को पत्र लिख कर मना किया था। मंगलवार की कार्रवाई को लेकर भी यहां रहने वाले गोरखपुर के लोगों में आक्रोश था।

इधर, जोधपुर में जैन के कार्यकाल में चौकसी केस पर लगी एफआर की ईडी ने मांगी रिपोर्ट

जोधपुर | जयपुर विकास प्राधिकरण के एसपी राहुल जैन को एपीओ करने की कई वजह हो सकती हैं, लेकिन उनके जोधपुर में डीएसपी ईस्ट कार्यकाल में ही मेहुल चौकसी के खिलाफ दर्ज मुकदमे में एफआर लगी थी। रातानाडा पुलिस चौकसी को गिरफ्तार करने के लिए मुंबई पहुंच गई थी, लेकिन यह कह कर वापस बुला लिया गया था कि दोनों पार्टियां समझौता कर रही हैं। जांच अधिकारी के लौटते ही केस को सिविल नेचर के लेन-देन का विवाद बता कर एफआर के आदेश दिए गए थे, एफआर लगने के बीस दिन बाद ही जैन का यहां से ट्रांसफर हो गया था। अब जब चौकसी और उनके भानजे नीरव मोदी हजारों करोड़ का घपला कर देश से भाग चुके हैं, तो प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) दोनों के खिलाफ देश-दुनिया में दर्ज मुकदमों की छानबीन कर रहा है। इसी सिलसिले में जोधपुर के रातानाडा थाने में दर्ज मुकदमे और एफआर की रिपोर्ट भी ईडी को भिजवाई जा चुकी है।

करोड़ों के डायमंड का लेन-देन का विवाद था

रेजिडेंसी रोड पर जैन ज्वैलर्स के नाम से शोरूम चलाने वाले शिशिर जैन ने 11 फरवरी 2015 को गीतांजलि जेम्स के एमडी मेहुल चौकसी के खिलाफ धोखाधड़ी का केस दर्ज कराया था। चौकसी ने कई प्रलोभन व मोटे मुनाफे का झांसा देकर जैन को फ्रेंचाइजी थमा दी। जैन ने करीब दो करोड़ रुपए दे दिए, उसके बदले में सप्लाई किए डायमंड आधी कीमत के भी नहीं थे। बाद ने उसने पैसा लौटाने से इनकार कर दिया था। तत्कालीन जांच अधिकारी एसआई कपूराराम ने बताया कि चौकसी को गिरफ्तार करने मुंबई गए थे, वहां दो दिन तक उसकी तलाश की पर वह नहीं मिला। उसके बाद तत्कालीन डीसीपी राहुल जैन ने इस केस में एफआर लगाने के निर्देश दिए और 1 जून 2015 को एफआर लग गई।

अब क्या: ईडी समझौते की छानबीन कर सकती है

मोदी व चौकसी पर शिकंजा कसने के लिए ईडी देश-दुनिया में दर्ज मुकदमों की छानबीन कर रही है। एक ओर लेटर अॉफ रोगेटरी (एलआर), जो दूसरे देशों की अदालतों को दिया जाने वाला पत्र होता है, जारी हो रहा है। दूसरी ओर देश में दर्ज केस की जानकारी भी जुटाई जा रही है। ईडी ने पीएचक्यू से यह जानकारी मांगी थी, जिस पर एडीजी (क्राइम ब्रांच) ने जोधपुर कमिश्नरेट से रातानाडा केस की रिपोर्ट मंगवा कर ईडी को भिजवाई है। डीसीपी ईस्ट क्राइम ब्रांच ने एफआईआर व एफआर की स्कैन कॉपी भेजी है। ईडी इसमें समझौते की जांच करवा कर लेन-देन का हिसाब निकाल सकती है।

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