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वित्त मंत्री: 2022 तक फसल की लागत से दोगुना मिलेगा फायदा

भास्कर न्यूज| जिले के विभिन्न अंचलों से बजट पेश करने के दौरान वित्त मंत्री ने 2022 तक किसानों की आय को दोगुना करने...

Danik Bhaskar | Feb 02, 2018, 07:10 AM IST
भास्कर न्यूज| जिले के विभिन्न अंचलों से

बजट पेश करने के दौरान वित्त मंत्री ने 2022 तक किसानों की आय को दोगुना करने का फिर वादा किया और नई योजनाओं की घोषणा की। आगामी खरीफ से सभी अघोषित फसलों का न्यूनतम समर्थन मूल्य उत्पादन लागत के कम से कम डेढ़ गुणा करने का फैसला किया है। जोधपुर जिले में मूंगफली, मूंग, गेहूं, सरसों, प्याज, जीरा, मिर्ची व लहसुन की खेती करने वाले बड़ी संख्या में किसान हैं। लेकिन लागत व बिक्री मूल्य में काफी अंतर है। खरीफ सीजन में मूंग, मूंगफली, सोयाबीन व उड़द की खरीद गत अक्टूबर माह से शुरू की गई थी जो जनवरी अतः तक बारदाने, वेअर हाउस, पंजीयन गड़बड़िय़ां, ट्रांसपोर्ट के अभाव में एक माह भी नहीं चल पाई। उत्पादन की 10 प्रतिशत की सरकारी खरीद नहीं हो पाई। जोधपुर जिले में गत 24 जनवरी से मूंगफली की खरीद बंद है। 7 हजार के करीब किसान ऑनलाइन पंजीयन करवाने के बावजूद फसल नहीं बेच पाए। खरीद केंद्रों के बाहर ट्रैक्टरों में फसल लादे सर्द रातों में 22 जनवरी से खड़े हैं। पश्चिमी राजस्थान के किसान बजट से हुए निराश, नदी जोड़ो परियोजना के बारे में नहीं हुई कोई विशेष घोषणा ग्रामीणों व किसानों ने बजट घोषणाओं को कुछ हद तक ठीक बताया लेकिन सभी को संदेह है कि ये धरातल पर पूरी शायद ही हो पाए। पीपाड़ के किसान बंशीलाल ने बताया कि प्रधानमंत्री पद प्रत्याक्षी के रूप में नरेंद्र मोदी ने 7 अप्रैल 2014 को रतकुड़िया गरंप अाए थे। वहां चुनावी रैली में उन्होंने पश्चिमी राजस्थान में हर खेत पानी का वादा करते हुए नदी जोड़ो परियोजना का जिक्र किया। चार साल बाद भी किसानों की यह उम्मीद कहीं नजर नहीं आ रही। इसी तरह किसानों का कहना है कि वर्ष 2020 तक लागत का दोगुना मूल्य का दावा कभी पूरा नहीं होगा। 2022 तक फसलों की लागत और बढ़ जाएगी।

भाजपा समर्थित किसान संगठन भी नाखुश

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फलोदी. लोहावट| समर्थन मूल्य पर मूंगफली की खरीद बंद होने के बाद से किसान फिर से खरीद शुरू होने की उम्मीद में पिछले 10 दिनों से खरीद केंद्रों पर डेरा जमाए हुए हैं। उन्हें अभी भी उम्मीद है कि फिर से मूंगफली की खरीद शुरू होगी। किसान बुद्धाराम चाडी, खेताराम देणोक, श्रवण बरजासर, भागचंदराम भींयासर 21 तारीख को मूंगफली लेकर पहुंचे थे। नंबर आता इससे पहले ही खरीद बंद हो गई। वापस नहीं गए, बल्कि घर से बिस्तर मंगवा लिए। शैतानसिंह नगर, भींयासर, बरजासर, लोहावट, बारू, पलीना, ढढू से आए कई किसानों के टिफिन घर से आ रहे हैं। कुछ मंडी के बाहर होटलों पर भी खा रहे हैं। प्रदेश में उपचुनावों के नतीजों के बाद कटाक्ष करते हुए पन्नाराम, गोरधनराम, बगड़ूराम, अनोपराम मांजू बताते हैं कि अब खरीद शुरू हो ही जाएगी। लोहावट में मूंगफली की ढेरियों की रखवाली कर रहे हैं। मंगनाराम खीचड़, हरीशकुमार राव, पूनाराम खीचड़, अशोककुमार व मांगीलाल बताते हैं कि बजट घोषणाएं अपनी जगह है लेकिन स्थिति तभी सुधरेगी जब कोई कानूनी प्रावधान बनाएंगे। सरकार के पास भंडारण की क्षमता नहीं है। वहीं, लोहावट प्रधान भागीरथ बेनीवाल ने केंद्रीय कृषि राज्य मंत्री गजेन्द्रसिंह शेखावत व कलेक्टर से बात कर खरीद पुनः शुरू करने की मांग की। मंत्री शेखावत ने खरीद प्रक्रिया दुबारा शुरू करने का भरोसा दिलाया है। वहीं, जिले के खरीद केंद्रों पर शुक्रवार से दो दिन टोकन वाले किसानों से मूंगफली की खरीद की जाएगी। किसानो ने अपना महापड़ाव स्थगित कर दिया है।

पति की मौत के बाद ऋण भरने के मिल रहे नोटिस, बच्चों को पालें या लोन चुकाए

नाथड़ाऊ| भालू अनोपगढ़ के किसान खेमाराम मेघवाल ने वर्ष 2008 में 90000 रुपए का ऋण लिया था। इसके कुछ महीने बाद खेमाराम का निधन हो गया। परिवार की स्थिति ऐसी है कि पालन पोषण करना भी मुश्किल है। दूसरी तरफ ऋण राशि बढ़कर 1.41000 लाख रुपए हो गई है। बैंक कई बार नोटिस भेज चुका है। लूणी देवी पति की मौत से ऊबर ही पाती कि दो जवान बेटे भी बीमार के कारण चल बसे। एक बेटे के गुर्दे की बीमारी है। छोटे बेटे मदाराम पर सारी जिम्मेदारी है। लूणी देवी व उनकी पुत्र वधु सुवा देवी की विधवा पेंशन से घर का खर्चा चल रहा है।

भास्कर न्यूज| जिले के विभिन्न अंचलों से

बजट पेश करने के दौरान वित्त मंत्री ने 2022 तक किसानों की आय को दोगुना करने का फिर वादा किया और नई योजनाओं की घोषणा की। आगामी खरीफ से सभी अघोषित फसलों का न्यूनतम समर्थन मूल्य उत्पादन लागत के कम से कम डेढ़ गुणा करने का फैसला किया है। जोधपुर जिले में मूंगफली, मूंग, गेहूं, सरसों, प्याज, जीरा, मिर्ची व लहसुन की खेती करने वाले बड़ी संख्या में किसान हैं। लेकिन लागत व बिक्री मूल्य में काफी अंतर है। खरीफ सीजन में मूंग, मूंगफली, सोयाबीन व उड़द की खरीद गत अक्टूबर माह से शुरू की गई थी जो जनवरी अतः तक बारदाने, वेअर हाउस, पंजीयन गड़बड़िय़ां, ट्रांसपोर्ट के अभाव में एक माह भी नहीं चल पाई। उत्पादन की 10 प्रतिशत की सरकारी खरीद नहीं हो पाई। जोधपुर जिले में गत 24 जनवरी से मूंगफली की खरीद बंद है। 7 हजार के करीब किसान ऑनलाइन पंजीयन करवाने के बावजूद फसल नहीं बेच पाए। खरीद केंद्रों के बाहर ट्रैक्टरों में फसल लादे सर्द रातों में 22 जनवरी से खड़े हैं। पश्चिमी राजस्थान के किसान बजट से हुए निराश, नदी जोड़ो परियोजना के बारे में नहीं हुई कोई विशेष घोषणा ग्रामीणों व किसानों ने बजट घोषणाओं को कुछ हद तक ठीक बताया लेकिन सभी को संदेह है कि ये धरातल पर पूरी शायद ही हो पाए। पीपाड़ के किसान बंशीलाल ने बताया कि प्रधानमंत्री पद प्रत्याक्षी के रूप में नरेंद्र मोदी ने 7 अप्रैल 2014 को रतकुड़िया गरंप अाए थे। वहां चुनावी रैली में उन्होंने पश्चिमी राजस्थान में हर खेत पानी का वादा करते हुए नदी जोड़ो परियोजना का जिक्र किया। चार साल बाद भी किसानों की यह उम्मीद कहीं नजर नहीं आ रही। इसी तरह किसानों का कहना है कि वर्ष 2020 तक लागत का दोगुना मूल्य का दावा कभी पूरा नहीं होगा। 2022 तक फसलों की लागत और बढ़ जाएगी।

भाजपा समर्थित किसान संगठन भी नाखुश

2018 में मूंगफली की लागत 60 रु. किलो, सरकारी मूल्य 44, हर फसल 10 से 20 रु. किलो कम में बेचने की मजबूरी

7 हजार किसानों के पास खरीद का टोकन लेकिन 10 दिन से तुलाई बंद, कोई 20 किमी दूर घर से खाना मंगा रहा तो कोई होटल पर, देर रात खुशखबर आई-आज से दो दिन खरीद होगी

किसान संघ के आंदोलन प्रमुख तुलछाराम सिंवर ने बताया कि सरकार ने अक्टूबर में शुरू की खरीफ फसलों की खरीद के आंकड़ों पर गौर करें तो उत्पादन के मुकाबले 10 प्रतिशत फसल भी खरीद नहीं की गई है। यह सरकार की किसानों को घोषित समर्थन मूल्य दिलाने की आज बजट में केंद्रीय वित्त मंत्री अरुण जेटली के घोषित मूल्य दिलाने के प्रति प्रतिबद्धता के वक्तव्य के विरुद्ध धरातल पर कहीं नजर नहीं आता। समर्थन मूल्य दिलाने में सरकार नाकाम रही है। फसल के दाम बढ़ाने की घोषणा महज धोखा है। किसानों के साथ यह खूबसूरती से किया छल है।

दूध की खरीद 3 रुपए प्रति लीटर कम, पीएम फसल बीमा योजना की जानकारी ही नहीं

बिलाड़ा| डेयरी में बेचे जाने वाले दूध का खरीद मूल्य घटने से पशुपालन के प्रति रुझान कम होगा। पिछले माह 3 रुपए दूध खरीद मूल्य कम हो गए, जबकि उपभोक्ताओं को बेचे जाने वाले दूध के मूल्य में कोई कटौती नहीं की। प्रगतिशील किसान व पशुपालक भंवरलाल सीरवी ने बताया कि पशुपालन को लेकर किसान चिंतित है। भारतीय किसान संघ के तहसील अध्यक्ष अध्यक्ष बिलाड़ा तुलछाराम सीरवी ने बताया कि फसल बीमा योजना का लाभ किसानों को नहीं मिला। योजना के बारे में किसानों काे जानकारी देने वाला कोई नहीं।

संयुक्त खातेदारी में 100 क्विंटल तक फसल सरकार सिर्फ 25 क्विंटल ही खरीद रही

बालेसर| किसान गिरधारीदान कविया बताते हैं कि सरकार समर्थन मूल्य पर देरी से खरीद शुरू करती है। उसमें भी प्रति किसान की खरीद सीमा 25 किव्टंल तय कर रखी है। ज्यादातर किसानों के पास 100 किव्टंल से ज्यादा की मंूगफली होती है। ऐसे में 75 क्विंटल मूंगफली बहुत कम दामों में बिक रही है। गोरखाराम सुथार बताते हैं कि बैंकों से मोटे ब्याज पर ऋण लेकर फसल लेते हैं, मगर लागत के अनुसार भाव नहीं मिलते। कर्ज बढ़ रहा है। किसान ओमाराम माली बेलवा ने बताया कि ऋण लेकर जीरा, इसबगोल, गेहूं की खेती करते हैं। मगर फसलें खराब होती है मुआवजा नहीं मिलता।

प्रति िक्वंटल इतना अंतर

फसल लागत मूल्य बाजार मूल्य समर्थन मूल्य

सरसों 6658 3700 4000

मूंगफली 6711 3350 4450

प्याज 1450 200 -

गेंहू 3200 1500 1735

लहसुन 3500 1500 3500