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डॉक्टर्स की हड़ताल: निजी हॉस्पिटल, सेना और रेस्मा बन सकते थे सहारा, जोधपुर प्रशासन ने 5 दिन में एक को भी एप्रोच नहीं किया

हालात बिगड़ते देख कलेक्टर ने अब निजी अस्पतालों को सौंपा मरीजों के उपचार का जिम्मा

Bhaskar News | Last Modified - Nov 11, 2017, 06:36 AM IST

  • डॉक्टर्स की हड़ताल: निजी हॉस्पिटल, सेना और रेस्मा बन सकते थे सहारा, जोधपुर प्रशासन ने 5 दिन में एक को भी एप्रोच नहीं किया
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    जोधपुर. सरकारी डॉक्टरों की हड़ताल शुक्रवार को लगातार पांचवें दिन भी जारी रही। शुक्रवार से हालात और खराब हो गए, क्योंकि प्रदेश भर के मेडिकल कॉलेजों से जुड़े सरकारी अस्पतालों में अब रेजिडेंट, सीनियर रेजिडेंट और अर्जेंट टेम्परेरी बेसिस (यूटीबी) पर लगे डॉक्टर भी इस हड़ताल में सेवारत डॉक्टरों के साथ हो गए हैं। इसके चलते बड़े सरकारी अस्पतालों में भी चिकित्सा व्यवस्था ठप हो गई है। एक ही दिन में दो दर्जन से ज्यादा मरीजों की मौत हो गई।
    इन हालात से निपटने के लिए निजी अस्पतालों, सेना, रेस्मा, सेवानिवृत्त डॉक्टरों आदि का सहारा लिया जा सकता था, लेकिन जिला प्रशासन ने किसी को एप्रोच नहीं किया। यहां तक कि, सरकार ने गुरुवार को घोषणा की थी कि सरकारी अस्पतालों में सेवा देने के इच्छुक गैर सरकारी एमबीबीएस डॉक्टर को रोजाना 3000 रुपए और विशेषज्ञ डॉक्टर को 4000 रुपए मानदेय दिया जाएगा। इसके अलावा नाइट ड्यूटी करने पर 700 रुपए अतिरिक्त मिलेंगे। इसके बावजूद एक भी डॉक्टर नहीं आया। हालांकि हालात बिगड़ते देख कलेक्टर ने शुक्रवार को मरीजों के इलाज का जिम्मा निजी अस्पतालों को सौंपा। वहीं, रेस्मा के तहत महज फलोदी में एक डॉक्टर को गिरफ्तार किया गया।

    रिटायर्ड डॉक्टर्स तैयार पर सरकार ने पूछा तक नहीं
    दैनिक भास्कर ने शहर के प्रमुख 4 रिटायर्ड डॉक्टरों से बात की, तो उन्होंने कहा कि वे वॉलिंटियर सर्विस देने के लिए तैयार हैं, लेकिन सरकार बुलाने की औपचारिकता तो पूरी करे। डॉ. एसएन मेडिकल कॉलेज के पूर्व प्राचार्य डॉ. अरविंद माथुर (मेडिसिन), डॉ. कांता तिवाड़ी (गायनी), डॉ. कमलकांत(सर्जरी) और डॉ. राजेश्वर कल्ला (अॉर्थोपेडिक) ने कहा, कि वे मरीजों की सेवा के लिए हमेशा तैयार हैं।
    जोधपुर में 5 दिन बाद तक भी नहीं बुलाया
    जैसलमेर में कलेक्टर केसी मीणा के अनुराेध पर बीएसएफ आैर सेना ने डॉक्टर्स भेजे। सेना की बैटल एक्स डिवीजन और आर्मी मेडिकल कोर के डॉक्टर के साथ स्टाफ भी सेवाएं दे रहा है। बाड़मेर में भी सेना के साथ बीएसएफ के डॉक्टर मरीजों के उपचार में जुटे हैं। दूसरी ओर, जोधपुर में अभी तक दोनों ही एजेंसियों से मदद नहीं ली गई है। कलेक्टर डॉ. रवि कुमार सुरपुर का कहना है कि सेना व बीएसएफ से मदद लेने के बारे में जयपुर में बातचीत हुई थी। जोधपुर स्थित मिलिट्री हॉस्पिटल में सिविलियंस का उपचार किया जा रहा है। कलेक्ट्रेट में शुक्रवार शाम को हुई मीटिंग में उन्हें नहीं बुलाया गया था, जब जरूरत होगी तब बुला लिया जाएगा।
    सरकार द्वारा रेस्मा लागू करने के बाद डॉक्टरों को गिरफ्तार किया जाना था, लेकिन गुरुवार तक एक भी जगह रेस्मा के तहत कार्रवाई नहीं की। शुक्रवार से जब कार्रवाई की गई, तब तक ज्यादातर डॉक्टर अंडरग्राउंड हो गए। पुलिस अधीक्षक (जोधपुर ग्रामीण) डॉ. रवि ने बताया कि ग्रामीण जिले के विभिन्न इलाकों में डॉक्टरों की तलाश में शुक्रवार को पुलिस टीमों ने जगह-जगह दबिश दी, लेकिन अधिकांश डॉक्टर नहीं मिले। हालांकि, इस दौरान फलौदी थानाधिकारी मदनसिंह की टीम ने शुक्रवार देर शाम दंत रोग विशेषज्ञ डॉ. सुनील विश्नोई को उनके बापू नगर स्थित आवास से गिरफ्तार कर लिया। इसी तरह, जोधपुर कमिश्नरेट क्षेत्र में डॉक्टर्स की धरपकड़ के लिए पुलिस ने छापेमारी की, लेकिन कोई पकड़ में नहीं आया।

    नहीं मिला इलाज, मासूम ने दम तोड़ा
    लोहावट| मासूम को समय पर इलाज नहीं मिलने के कारण उसकी मौत हो गई। कस्बे में आरओबी पर काम करने वाले मजदूर झाबुआ निवासी जंगल का 1 वर्षीय पुत्र जयसिंह शुक्रवार रात करीब आठ बजे अपनी मां के पास खेलते हुए अचेत हो गया। परिजनों को सरकारी अस्पताल में किसी डॉक्टर के नहीं होने की जानकारी थी। इसके चलते वे उसे एक सरकारी डॉक्टर के ही निजी क्लिनिक पर लेकर गए। क्लिनिक पर भी कोई डॉक्टर नहीं मिला। वहां मौजूद जीएनएम ने बच्चे को कृत्रिम सांस देकर बचाने का प्रयास किया, लेकिन बच्चे की मौत हो चुकी थी।
    सरकारी पर्ची लाने वाले मरीजों के लिए निजी अस्पतालों की ओपीडी फ्री
    कलेक्टर डॉ. रविकुमार सुरपुर ने शुक्रवार को पहली बार निजी अस्पतालों की बैठक रखी। इसमें करीब दो दर्जन अस्पताल संचालकों ने सरकारी अस्पताल से पर्ची बनवाकर आने वाले मरीजों के लिए अपने यहां फ्री ओपीडी की सुविधा के लिए सहमति दी। कलेक्टर ने कहा, कि निजी अस्पताल उस मरीज के कोई जांच भी लिखे तो सरकारी अस्पताल से वह जांच करा सकेगा। सहमति देने वालों में विनायका, संचेती, गोयल, कमला नगर, लोकसेवा, मेडिपल्स, पालीवाल, प्रेक्षा, राज, राजस्थान केयर, श्रीराम, सोना मेडीहब, ताराबाई देसाई नेत्र, वसुंधरा, यश अमन, शुभम, ग्लोबल केयर, बालाजी नेत्र, फाॅर्टिस बालाजी व डऊकिया अस्पताल शामिल हैं। निजी अस्पताल ग्रामीण क्षेत्र में सीएचसी-पीएचसी में भी ओपीडी लगा सकेंगे।
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