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शिकार किया होता तो सलमान को जू में शूटिंग की इजाजत नहीं मिलती : बचाव पक्ष

Bhaskar News | Last Modified - Nov 05, 2017, 09:02 AM IST

बहुचर्चित काले हिरणों के शिकार मामले में बचाव पक्ष की ओर से अंतिम बहस शनिवार को भी हुई।
शिकार किया होता तो सलमान को जू में शूटिंग की इजाजत नहीं मिलती : बचाव पक्ष
जोधपुर. मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट देवकुमार खत्री की अदालत में विचाराधीन बहुचर्चित काले हिरणों के शिकार मामले में बचाव पक्ष की ओर से अंतिम बहस शनिवार को भी हुई। अगली सुनवाई 6 नवंबर को होगी। सलमान खान के अधिवक्ता हस्तीमल सारस्वत ने तर्क दिया कि अभियोजन की कहानी के अनुसार एक हिरण का शिकार प्रहलादराम की ढाणी के पास व दूसरे हिरण का शिकार ओमाराम भील की ढाणी के पास होना बताया गया, लेकिन अभियोजन पक्ष ने दोनों ही गवाहों को पेश नहीं किया बल्कि कथित घटनास्थल से दो-तीन किलोमीटर दूर रहने वाले पूनमचंद, शेराराम व मांगीलाल को अदालत में पेश कर उनके बयान करवाए।
- मध्य रात्रि को एक और दो बजे के बीच दो-तीन किलोमीटर दूर हो रहे शिकार की जानकारी इन गवाहों को हो जाना और उनके द्वारा शिकार होते देखना कतई विश्वसनीय नहीं है।
- सारस्वत ने यह भी तर्क दिया कि अनुसंधान अधिकारी ने एक जाति विशेष के लोगों को ही संपूर्ण कार्यवाही में शामिल किया, इसलिए अभियोजन की संपूर्ण कहानी संदेहास्पद हो जाती है। इस पर कतई विश्वास नहीं किया जा सकता है।
एफआईआर 2 अक्टूबर को दर्ज हुई होती तो 4 को शूटिंग की परमिशन कैसे मिलती
- अधिवक्ता सारस्वत ने ठोस सबूत पेश करते हुए तर्क दिया कि वन विभाग ने दो अक्टूबर 1998 को रिपोर्ट दर्ज करना बताया है, जबकि वास्तव में दो अक्टूबर को रिपोर्ट ही दर्ज नहीं हुई थी।
- उन्होंने कहा कि 4 अक्टूबर को सलमान खान, सैफ अली खान, नीलम, तब्बू और सोनाली बेंद्रे ने वन विभाग की अनुमति के तहत पब्लिक पार्क में स्थित जू में फिल्म ‘हम साथ साथ है’ की शूटिंग की थी, यदि दो अक्टूबर को इन लोगों के विरुद्ध एफआईआर दर्ज हो जाती तो इन्हें शूटिंग की अनुमति कतई नहीं दी जाती।
एफआईआर नंबर नहीं लिखे थे
- सारस्वत ने कहा कि 4 अक्टूबर को एक स्थानीय समाचार पत्र में काले हिरणों के शिकार के संबंध में खबर प्रकाशित हुई, उसके पश्चात वन विभाग के अधिकारी हरकत में आए और उसी दिन सर्वप्रथम राजश्री प्रोडक्शन के मैनेजर सुरेंद्र प्रसाद को पत्र प्रेषित कर फिल्म यूनिट में आए लोगों, उनके साथ लाए हथियारों व यूनिट के साथ लगे वाहनों की सूची मांगी।
- इसके बाद 6 अक्टूबर को समाचार पत्र के संपादक को पत्र प्रेषित कर उनसे आग्रह किया कि समाचार के संबंध में सूचना प्राप्ति का स्रोत व तथ्यात्मक विवरण बताएं, जिससे दोषियों के विरुद्ध कानूनी कार्यवाही की जा सके। उन्होंने यह भी तर्क दिया कि दोनों ही पत्रों में एफआईआर के नंबर अंकित नहीं थे। इससे स्पष्ट है कि 6 अक्टूबर तक कोई एफआईआर दर्ज नहीं हुई थी।
एफआईआर की कॉपी 24 घंटे में नहीं, 6 दिन बाद अदालत भेजी थी
- राजश्री प्रोडक्शन के मैनेजर की ओर से फिल्म यूनिट के साथ लगे वाहनों की सूची नंबरों सहित वन विभाग को उपलब्ध करवाने के बाद जिप्सी के नंबर ज्ञात होने पर आरटीओ ऑफिस से जिप्सी मालिक का नाम पता मालूम कर झूठे गवाह तैयार करके 7 अक्टूबर अथवा 8 अक्टूबर को एफआईआर दर्ज की गई।
- यही कारण था कि एफआईआर की प्रति 24 घंटे के भीतर अदालत में नहीं भेजी गई, बल्कि 6 दिन बाद भेजी गई। असाधारण देरी से एफआईआर की प्रति अदालत में भेजने का कोई उचित कारण अभियोजन पक्ष द्वारा नहीं बताया गया है। अधिवक्ता ने कहा कि ऐसी फर्जी, बनावटी एफआईआर पर की गई कार्यवाही के आधार पर आरोपियों को दंडित नहीं किया जा सकता है।
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Web Title: shikar kiyaa hotaa to salman ko ju mein shutinga ki ijaajt nahi milti : bchaav pks
(News in Hindi from Dainik Bhaskar)

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