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नाबालिग बेटे की हो रही थी शादी की तैयारियां, लड़के ने लिखा- मैं शादी के लायक नहीं

एक नाबालिंग लड़के ने अपना बाल विवाह रुकवाने के लिए कलेक्टर को पत्र लिखा।

Bhaskar News | Last Modified - Nov 05, 2017, 09:08 AM IST

नाबालिग बेटे की हो रही थी शादी की तैयारियां, लड़के ने लिखा- मैं शादी के लायक नहीं
जोधपुर.बिलाड़ा के जैतीवास गांव निवासी एक लड़के ने अपना बाल विवाह रुकवाने के लिए कलेक्टर को पत्र लिखा। इसके बाद बाल विवाह प्रतिषेध अधिकारी व कार्यवाहक तहसीलदार मदाराम पटेल ने बताया कि महेंद्र देवासी पुत्र खींयाराम 18 साल का नहीं है। वह वर्तमान में अपने परिवार के साथ कैलाशपुरी उदयपुर में रहता है। वहां 11वीं में पढ़ाई कर रहा है। उसने बाल विवाह रुकवाने के लिए उदयपुर जिला कलेक्टर को पत्र लिखा है।
बताया गया कि उसके पिता शादी की तैयारियां करने गांव आए थे। कलक्टर को लिखे पत्र में बताया कि मुझे मेरे परिवार से सूचना मिली कि समाज के कुछ लोग परिवार पर दबाव बनाते हुए मेरा बाल विवाह कराने जा रहे हैं, जबकि मेरी उम्र 17 साल ही है। मैं विवाह के योग्य नहीं है।पिताजी को बाल विवाह कराने के लिए मजबूर किया जा रहा है। उन्होंने कलेक्टर से बाल विवाह नहीं कराने के लिए समाज के लोगों को पाबंद करने का आग्रह किया।
महेंद्र के पत्र के बाद हरकत में आया प्रशासन
- महेंद्र का पत्र उदयपुर कलेक्टर को मिलते ही उन्होंने बड़गांव तहसीलदार को बाल विवाह रुकवाने के आदेश दिए। साथ ही जोधपुर कलेक्टर को भी सूचना दी। इस पर जाेधपुर कलेक्टर ने उपखंड अधिकारी को बाल विवाह रुकवाने व पाबंद करने के निर्देश दिए।
- कलेक्टर के आदेश के बाद शनिवार को आरआई लिखमाराम सीरवी, जैतीवास कनिष्ठ लिपिक विनोद परिहार, आंगनवाड़ी कार्यकर्ता सुखी देवी व परमादेवी, समाजसेवी महेंद्रसिंह आदि जैतीवास स्थित खीयाराम के घर पहुंचे और महेंद्र के पिता और परिवार को बाल विवाह के बारे में समझाया और पाबंद किया।
- कार्यवाहक तहसीलदार मदाराम पटेल ने बताया कि परिवार को पाबंद किया गया है। परिवार वालों ने भी कहा कि बाल विवाह नहीं करेंगे। लड़के की बारात दांतीवाड़ा के पास एक गांव में जानी थी और 6 नवंबर को विवाह होना था। इस पर लड़की वाले परिवार को भी पाबंद किया गया है। साथ ही उदयपुर प्रशासन द्वारा लड़के को उदयपुर ही रखा गया है ताकि बाल विवाह न हो।
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हाल ही में 4 मामले सामने आये बाल विवाह के
हाल ही में 4 मामले बाल विवाह के आ चुके हैं। एक मामले में कोर्ट को रात ग्यारह बजे पाबंद करना पड़ा। वहीं बाल विवाह की आशंका के चलते प्रशासन द्वारा परिवार के मुखिया को पाबंद किया गया था।
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