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स्कूल में फायरिंग कर कुवैत भाग रहा था अारोपी, बरामद दोनों बंदूकों का लाइसेंस नहीं मिला

महारावल स्कूल में हुई फायरिंग के दोनों आरोपियों से हिरासत में पूछताछ।

Dainik Bhaskar

Nov 17, 2017, 08:16 AM IST
पुलिस गिरफ्त में मुख्य आरोपी अ पुलिस गिरफ्त में मुख्य आरोपी अ

डूंगरपुर. शहर के महारावल स्कूल में बुधवार को फायरिंग के बाद कुवैत भाग रहे मुख्य आरोपी अमजद को पुलिस ने देररात शहर की सीमा से बाहर पकड़ लिया। गुरुवार सुबह एसपी शंकरदत्त शर्मा ने प्रेस कांफ्रेंस में इसका खुलासा किया। उसके पिता जुम्मे खान को पुलिस ने पहले ही गिरफ्तार कर लिया था। पुलिस दोनों आरोपियों से पूछताछ कर रही है।

- एसपी के अनुसार आरोपी अमजद कुवैत भागने की फिराक में था। वह कुवैत में ही रहकर नौकरी करता है। एक महीने पहले ही वह मां की मौत होने पर डूंगरपुर आया था। स्कूल में फायरिंग के बाद पिता के गिरफ्तार होते ही वह कुवैत भागने की फिराक में था। देररात काफी मशक्कत के बाद पुलिस ने उसे पकड़ने में सफलता पाई।

- पिता और पुत्र के खिलाफ जानलेवा हमले का केस दर्ज किया गया है। साथ ही घर से बरामद की गई दो टोपीदार बंदूकों को जब्त कर लिया गया है। उसमें से एक का लाइसेंस उपलब्ध करा दिया गया है। जुमे खान ने बताया कि दूसरे का भी लाइसेंस उसके पास है। एसपी का कहना है कि यदि दूसरी बंदूक का लाइसेंस सर्च में मिल गया तो ठीक है, नहीं तो आम्र्स एक्ट की धारा जुड़ जाएगी।

- इधर, फायरिंग की घटना के आरोपी पिता-पुत्र को गुरुवार शाम कोर्ट में पेश किया गया। कोर्ट ने दोनों को एक-एक दिन ही रिमांड पर भेज दिया है।

132 एकड़ जमीन को लेकर चल रहा है विवाद

एसपी ने बताया कि महारावल सीनियर स्कूल और जुमे खान के बीच वर्ष 1998 से 132 एकड़ जमीन को लेकर संपत्ति विवाद चल रहा है और उसका पट्टा भी उसके पास है। इसके बाद कुछ समय पहले उसी जमीन में से कुछ भाग पर बाद में महारावल स्कूल का कब्जा हो गया। उसका कहना था कि जिस जमीन का पट्टा उसके पास है, उसे कोई भी। इसी मामले को लेकर रेवेन्यू बोर्ड कोर्ट में केस चल रहा है। एसपी ने बताया कि जुमे खान की संपत्ति महारावल स्कूल की तीन तरफ से है। उसमें जुमे खान ने फलों का बगीचा लगा रखा है। स्कूल के बच्चे बगीचे में घुस जाते थे। वह चाहता था कि स्कूल की बाउंड्री ऊंची करा दी जाए, जिससे उसके बगीचे में कोई भी नहीं घुसे।

फायरिंग का सच
एसपी ने बताया कि बच्चों को डराने के लिए उसने टोपीदार बंदूक से फायर किया था, उसमें 23 छर्रे थे। इसमें से कुछ छर्रे कक्षा की खिड़की को भेदते हुए कक्ष में दाखिल हुए। इनमें से 7 छर्रे ही बरामद हो पाए। इन्हीं छर्रों से तीन छात्रों को चोटें आई थी।

सवाल यह भी
पुलिस के अनुसार कक्षा 12वीं बी का कक्ष इसी बगीचे से लगते हुए बना है। बच्चों ने यह बात सुबह 11.30 से 1.30 बजे तक इसलिए दबा रखी कि उन्हें डर था कि फायरिंग की वारदात उनके सिर मढ़ दी जाएगी। फिर एक शिक्षक को पता लगने से खुलासा हो सका।

गुलेल से पत्थर मार कर बच्चों और स्कूल प्रशासन को करता था परेशान

आरोपी जुम्मे खान पिछले 20 वर्षों से दो बार जमीन का केस हार चुका है। ऐसे में वह स्कूल की जमीन हथियाने के लिए कई बार स्कूल प्रशासन और बच्चों से उलझता रहता था। कई बार उसने स्कूल के बगीचे पर कब्जा करने का प्रयास किया था। वहीं इस बगीचे में ठेके पर कार्य करने वाले किसानों को भी डरा-धमका कर भेज देता था, जिससे वह पिछले कई वर्षों से जमीन को लेकर महारावल स्कूल प्रशासन और बच्चों से झगड़ते रहता था। उसको आज तक स्कूल प्रशासन कानूनी रूप से ही समझाने का प्रयास करते रहते थे।

जमीन का हक का केस हार चुका है जुम्मे खान
- रियासत काल में महारावल स्कूल के साथ करीब 50 बीघा से अधिक जमीन जुड़ी हुई थी। राज दरबार की ओर से स्कूल के खर्चे और आत्मनिर्भर बनाने के लिए जमीन से होने वाली आय को महारावल स्कूल के खाते जमा कराई जाती थी।

- इस बगीचे में पहले राजदरबार के लिए फल, फूल और सब्जियों का उत्पादन होता था। रियासत काल खत्म होने के बाद जमीन को महारावल स्कूल में हस्तांतरित कर दिया गया। इस जमीन में कई वर्ष तक कृषि विशेषज्ञ, शिक्षक और कृषि संकाय के बच्चों ने फलदार पौधे लगाकर समृद्ध कर रखा था।

- इसके बाद करीब वर्ष 1994 में जुम्मे खान और कयूम लाला ने मिलकर जमीन को पुश्तैनी मानते हुए कोर्ट में केस किया। इसके बाद वर्ष 1997 में कोर्ट ने जमीन का मालिक महारावल स्कूल को मानते हुए पूरा अधिकार स्कूल का बताया। इसके बाद जुम्मे खान जमीन का केस अजमेर रेवेन्यू कोर्ट तक लेकर गया। वहां से उसे असफलता हाथ मिली।
- ऐसे में जमीन के मामले में वर्ष 2006 और 2016 में केस हार गया था। इसके बाद अलग-अलग खसरों पर अपना अधिकार मानते हुए कोर्ट में केस दाखिल कर रखा है।

बगीचे का टेंडर करने से रोका

- महारावल स्कूल के पीछे बगीचे का संचालन करने के लिए किसानों को जमीन टेंडर पर दी जाती है। ऐसे में आरोपी जुम्मे खान ने कई बार किसानों और टेंडर लेने वाले ठेकेदार को रोकने का प्रयास किया है। इस कारण इस वर्ष भी बगीचे का टेंडर नहीं हो पाया है।
- वहीं महारावल स्कूल के पीछे बने प्रतिभावान छात्रावास के बच्चों को आने-जाने से रोकने के लिए कई बार कांटे की बाड़ेबंदी की थी, जिसे प्रशासन ने हटाने का प्रयास किया।

92 फीट लंबी और 6 फीट ऊंची दीवार बनाने के निर्देश

कलेक्टर ने गुरुवार को महारावल स्कूल और बगीचे का निरीक्षण कर दीवार ऊंची करने के प्रस्ताव बनाने के निर्देश दिए। कलेक्टर ने शिक्षा विभाग को 6 फीट ऊंची और 92 फीट लंबी दीवार बनाने के प्रस्ताव तैयार करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि टीएडी विभाग से हाथोंहाथ स्वीकृति दिलाएंगे। उन्होंने स्कूल को भी दीवारों को ऊंची करने के निर्देश दिए।

जमीन को अतिक्रमण मुक्त कराने की मांग
कलेक्टर के निरीक्षण से पूर्व विधायक देवेंद्र कटारा ने स्कूल का निरीक्षण किया। इसमें जमीन पर चल रहे कानूनी केस की सभी जानकारी ली। प्रधानाचार्य दीपिका द्विवेदी ने वर्ष 1997, 2002 और 2016 में केस हारने की जानकारी दी। इस पर विधायक ने कोर्ट के अस्थाई आदेश के आधार पर जमीन पर अतिक्रमण हटाकर अधिग्रहण करने का सुझाव दिया। वहीं कानूनी केस संबंधित पत्रावली की प्रतिलिपि मांगी।

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