महाशिवरात्रि / परशुराम महादेव मंदिर में रात 12 बजे महाकाल की हाेगी आरती, पुजारी एक पैर पर खड़े रहकर करेंगे पूजा

परशुराम महादेव की शृंगारित प्रतिमा। परशुराम महादेव की शृंगारित प्रतिमा।
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परशुराम महादेव की शृंगारित प्रतिमा।परशुराम महादेव की शृंगारित प्रतिमा।

  • कुंडधाम से लेकर फूटा देवल तक राेडलाइट की व्यवस्था, श्रद्धालु पूरी रात कर सकेंगे दर्शन

दैनिक भास्कर

Feb 18, 2020, 10:14 AM IST

सादड़ी(पाली). महाशिवरात्रि के दिन व रात में हजाराें श्रद्धालु परशुराम महादेव की पावन गुफा में स्थित स्वयंभू प्राकृतिक शिवलिंग के दर्शन करेंगे तथा अरावली की हरी-भरी वादियां भी महादेव के जयकाराे से गूंज उठेगी। 21 फरवरी काे महाशिवरात्रि के पावन पर्व पर विधिविधान से भगवान परशुराम महादेव की पूजा-अर्चना के बाद मंदिर दर्शनार्थ श्रद्धालुओं के लिए शुरू हाे जाएगा।


परशुराम महादेव तीर्थ पर महाशिवरात्रि काे चाराें प्रहर में चार महाआरतियां हाेती है। महाशिवरात्रि पर परशुराम महादेव में मध्य रात्रि काे 12 बजे हाेती है महाकाल की आरती, जिसे मंदिर के प्रमुख पुजारी महंत हरिहर पुरी गाेस्वामी एक पैर पर खड़े रहकर करते हैं। यह महाआरती भगवान परशुराम महादेव का श्रंगार भस्मी से हाेने के बाद हाेती है। परशुराम महादेव सेवा मंडल ट्रस्ट के अध्यक्ष गणेशसिंह परमार व व्यवस्थापक अम्बालाल गुर्जर ने बताया कि महाशिवरात्रि काे लेकर कुंडधाम की सीढ़ियाें के उपर से अमरगंगा, गुफा स्थल व फूटा देवल तक राेडलाइट की व्यवस्था कर रखी है।


महाशिवरात्रि पर महादेव का हाेगा जलाभिषेक
परशुराम महादेव कुंडधाम के उपाध्यक्ष व काेषाध्यक्ष एडवाेकेट मदन लुहार के अनुसार कुंडधाम पर सफाई, राेशनी व शुद्ध पेयजल का इंतजाम ट्रस्ट ने कर रखा है। परशुराम महादेव मेवाड़ व मारवाड़ का प्रमुख धाम है। 21 फरवरी महाशिवरात्रि काे भगवान परशुराम महादेव के दर्शनार्थ पाली, जालाेर, सिराेही, जाेधपुर, नागाैर, राजसमंद, उदयपुर, चित्ताैड व भीलवाड़ा सहित प्रदेश भर से श्रद्धालु यहां पर आते हैं। परशुराम महादेव निज मंदिर में महाशिवरात्रि पर रूद्राभिषेक, जलाभिषेक व दुग्धाभिषेक के साथ श्रद्धालु भगवान परशुराम महादेव काे बिल पत्र अर्पण करेंगे।


चाराें प्रहर हाेगी आरती
प्रमुख पुजारी हरिहरपुरी गाेस्वामी ने बताया िक महाशिवरात्रि के अवसर पर परशुराम महादेव में प्रथम आरती 9 बजे, द्वितीय आरती 12 बजे, तृतीय आरती 3 बजे व चाैथी आरती 6 बजे हाेगी। इन चाराें आरतियाें में रात 12 बजे हाेने वाली महाकाल की आरती का विशेष महत्व है।
 

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