युद्धाभ्यास / वाॅरगेम में पहली बार हवाई करतब नहीं, सिर्फ फायर पावर डेमोंस्ट्रेशन देंगे ‘रुद्र’ जैसे विमान

Dainik Bhaskar

Feb 12, 2019, 03:22 AM IST


Aircraft like 'Rudra' will give power Demonstrations only
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Aircraft like 'Rudra' will give power Demonstrations only
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  • चांधण फील्ड फायरिंग रेंज में सबसे बड़ा वारगेम ‘वायु शक्ति’ 16 से, फुल ड्रेस रिहर्सल 14 से, जोधपुर से 4 घंटे में उड़ेंगे 60 लड़ाकू विमान
  • 180 विमान दिन में 3 बार क्षमता का प्रदर्शन करेंगे, लड़ाकू विमान हवा से जमीन, हवा से हवा में टैंक व मिसाइल नष्ट कर अपनी क्षमता बताएंगे

जोधपुर ( डीडी वैष्णव). चांधण फील्ड फायरिंग रेंज में 16 फरवरी को हो रहे भारतीय वायुसेना के सबसे बड़े वार गेम ‘वायु शक्ति-2019’ में पहली बार सिर्फ फायर पावर डेमोंस्ट्रेशन ही होगा। जिसमें विमान हवा से जमीन व हवा से हवा में प्रहार करने की क्षमता का प्रदर्शन करेंगे। युद्धाभ्यास में पहली बार स्वदेशी अटैक हेलिकॉप्टर एएलएच मार्क 4 (एडवांस लाइट हेलिकॉप्टर) ‘रुद्र’ ताकत दिखाएगा।

 

जमीन व हवा में दुश्मन को नेस्तनाबूद करने में सक्षम रूद्र 70 एमएम रॉकेट दागकर दुश्मन के टैंक, गोलियों से दुश्मन तथा मिसाइल को हवा में ही नेस्तनाबूद करेगा। शॉर्ट नोटिस पर सर्जिकल स्ट्राइक जैसी कार्रवाई को बखूबी अंजाम देने में माहिर इस हेलिकॉप्टर की क्षमता भी इससे परखी जा रही हैं। इस बार करीब 180 से ज्यादा विमान अलग-अगल पैकेज में डे, डस्क व नाइट में अपनी क्षमता का प्रदर्शन करेंगे। अकेले जोधपुर एयरबेस से 60 से ज्यादा लड़ाकू विमान उड़ान भरेंगे। इस युद्धाभ्यास का फुल ड्रेस रिहर्सल 14 फरवरी को चांधण में होगा। इस युद्धाभ्यास की शुरुआत के दौरान इस बार एयरोबेटिक्स नहीं होगा।  

 

मिसाइल को हवा में ही नष्ट करने में सक्षम

हिंदुस्तान एयरोनोटिक्स लिमिटेड (एचएएल) में निर्मित इस हेलिकॉप्टर की जमीन पर हमला करने में सक्षम है। इसके लिए हेलिकॉप्टर के आगे बड़ी गन लगी हुई है। सटीक निशाना साधने के लिए इसके ऊपर ही 20 एमएम की केनन यानी कैमरे के लैंस लगे है। इससे जमीन पर हमला करने में कारगर है। इस केनन की मदद से पायलट एयर टू एयर व एयर टू ग्राउंड अटैक करने में समक्ष होते हैं। दोनों ही जगह पर एक समय में 6 से 8 किमी के दायर में इससे बड़ी तबाही मचाई जा सकती है। इसमें 70 एमएम के रॉकेट तथा मिसाइल सिस्टम लगा हुआ है। एक साथ ये 40 से 45 रॉकेट तथा 8 मिसाइल ले जाने में सक्षम है। इसके फ्यूल टैंक पर गोली लगने के बाद भी ये नहीं फटेगा। गोली लगते ही ये सील हो जाएगा, जिससे हादसा नहीं होगा। इसकी पूरी कॉकपिट कांच की बनी हुई है। इसके अलावा ये 290 से 300 किमी प्रति घंटा की स्पीड से उड़कर हमला करता है। स्वदेश निर्मित एंटी टैंक मिसाइल हेलिना को इस पर लेस किया गया है।

 

आयरन फीस्ट की बजाय इस बार वायु शक्ति नाम
वायुसेना अपनी ताकत को परखने के लिए हर तीन साल बाद चांधण फील्ड फायरिंग में युद्धाभ्यास का आयोजन करता रहा है। पहले इस युद्धाभ्यास का नाम वायु शक्ति था। वर्ष 2013 में आयोजित किए गए इस युद्धाभ्यास का नामकरण ‘आयरन फीस्ट’ यानी फौलादी मुक्का रखा गया। इसके बाद वर्ष 2016 में आयोजित युद्धाभ्यास के दौरान भी यहीं नाम था। इस बार वायुसेना ने इसका नाम पुन: वायु शक्ति रख दिया है। युद्धाभ्यास के दिन करीब 180 विमान उड़ान भरेंगे। सबसे ज्यादा जोधपुर एयरबेस से उड़ेंगे। इसके अलावा जैसलमेर, बाड़मेर, फलौदी व नाल एयरबेस से विमान उड़कर चांधण फायरिंग रेंज आएंगे।  


पीएम के आने की संभावना कम, राष्ट्रपति आएंगे
इसके लिए अधिकांश लड़ाकू विमान जोधपुर से उड़ेंगे। वारगेम के साक्षी बनने के लिए तीनों सेनाओं के सुप्रीम कमांडर राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, रक्षा मंत्री निर्मला सीतारमण के आने की संभावना है। इनका अंतिम कार्यक्रम एयरफोर्स व प्रशासन को नहीं मिला हैं। राष्ट्रपति इसमें आ सकते है, लेकिन प्रधानमंत्री मोदी के चुनावी व्यस्तताओं के चलते यहां आने की संभावनाएं कम ही जताई जा रही है । इसके अलावा चालीस से ज्यादा देशों के रक्षा अटैची इसमें शिरकत करने जा रहे हैं।

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