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एक ही गांव से उठी थीं 3 अर्थियां, अब पंचायत का फैसला, न शराब पिएंगे, न ही पीने देंगे

Dainik Bhaskar

Jul 17, 2018, 09:27 AM IST

ग्रामीणों ने जिला कलेक्टर से मुलाकात कर उनसे गांव में स्थित शराब के ठेके को बंद करवाने की मांग की

barmer village ban liquor after death of three youth in an accident

बाड़मेर। भारत-पाक बॉर्डर पर स्थित मिठड़ाऊ गांव के लोगों ने एक हादसे से सबक लेते हुए अनूठी पहल की है। कुछ दिन पूर्व शराब के नशे में बाइक चला रहे गांव के तीन युवकों की मौत के बाद अब गांव की पंचायत में ग्रामीणों ने सर्वसम्मति से तय किया है कि न तो शराब पिएंगे और न ही पीने देंगे। इस प्रस्ताव को सैकड़ों ग्रामीणों का समर्थन मिल गया। इसके बाद सैकड़ों ग्रामीणों ने जिला कलेक्टर से मुलाकात कर उनसे गांव में स्थित शराब के ठेके को बंद करवाने की मांग की। इस कारण हुए प्रेरित….

- सीमा के निकट स्थित मिठड़ाऊ गांव में पांच सौ परिवार की आबादी है। नौ जुलाई को गुजरात में काम करने वाले गांव के तीन युवक एक बाइक पर सवार होकर निकट के किसी गांव में गए थे। वापसी में मिठड़ाऊ के समीप एक गोलाई में उनकी बाइक एक स्कूल बस से जा भिड़ी। इस हादसे में तीनों युवकों की मौत हो गई। हादसे क समय तीनों युवा शराब के नशे में थे, इस कारण वे बाइक पर नियंत्रण नहीं रख पाए। गांव में एक साथ तीन युवाओं की मौत ने सभी को हिलाकर रख दिया। किसी का सुहाग उजड़ा था तो किसी ने इकलौता बेटा खो दिया।

- 99 प्रतिशत एसी-एसटी के परिवार वाले इस गांव के लोगों में दर्द और गुस्सा था कि आखिर सरकार शराबबंदी क्यों नहीं कर देती। सरकार के फैसले के इंतजार किए बगैर ग्रामीणों ने पंचायत बुलाई और अपने आदर्श गांव से शराबबंदी की शुरुआत कर दी। पंचायत में सभी एक स्वर में बोले कि देश व राज्य में नहीं तो कम से कम हम गांव में तो शराबबंदी कर सकते हैं। ग्रामीणों ने फैसला लिया कि न तो शराब पिएंगे और न ही पीने देंगे।

- सैकड़ों ग्रामीण सोमवार को कलेक्टर के पास पहुंचे और हाथ जोड़कर बोले शराब ने हमारे गांव के तीन परिवारों को उजाड़ दिया है। अब हम गांव में शराब बिकने नहीं देंगे। ग्रामीणों ने मांग उठाई कि गांव से 24 घंटे में शराब ठेका हटाएं, नहीं तो वे ताला जड़ देंगे।

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