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राजनीति / जादूगर गहलोत के गढ़ जोधपुर में आज गरजेंगे संगठन के बाजीगर अमित शाह



भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह। भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह।
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भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह।भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह।
  • पांच साल से उपेक्षित कार्यकर्ताओं को साधने की भी रहेगी चुनौती

Dainik Bhaskar

Sep 16, 2018, 09:23 AM IST

 

जोधपुर। भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह आज जोधपुर आएंगे। वे यहां पार्टी कार्यकर्ताओं में जीत का मंत्र फूंकने को आ रहे है। राजनीति के जादूगर माने जाने वाले पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के गढ़ में संगठन के बाजीगर माने जाने वाले शाह जमकर गरजेंगे। गहलोत के अलावा उनके समक्ष पांच साल से उपेक्षित कार्यकर्ताओं को साधने की भी बड़ी चुनौती होगी।

 

मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे ने मारवाड़ में अपनी गौरव यात्रा के दौरान जोधपुर की यात्रा को स्थगित कर दिया था। उस समय कहा गया कि जोधपुर में गहलोत को घेरने के लिए अमित शाह को बुलाया जाएगा। उस कड़ी में अमित शाह आज जोधपुर के तूफानी दौरे पर आ रहे है। वे यहां शक्ति प्रमुखों को बूथ प्रबंधन का गुर सिखा कर जाएंगे।

 

साथ ही वे युवा सम्मेलन के माध्यम से भाजपा के प्रमुख वोट बैंक माने जाने वाली युवा शक्ति को भी साधने का प्रयास करेंगे। इसके अलावा वे शहर के प्रबुद्ध नागरिकों से संवाद कर अपनी बात रखेंगे।

 

शाह की जोधपुर यात्रा को राजनीतिक हलकों में बहुत महत्वपूर्ण माना जा रहा है। प्रदेश में कांग्रेस के कद्दावर नेता और कांग्रेस के राष्ट्रीय संगठन महासचिव अशोक गहलोत को घर में ही घेरने की रणनीति के तहत शाह आज जोधपुर आ रहे है।

 

दो बार प्रदेश के मुख्यमंत्री रह चुके गहलोत की पूरे मारवाड़ में मजबूत पकड़ मानी जाती है, हालांकि गत चुनाव में भाजपा ने मारवाड़ में कांग्रेस के किले को ढहा दिया था। लेकिन अब हालात पूरी तरह से बदल चुके है। गहलोत आक्रामक अंदाज में लगातार राज्य सरकार पर प्रहार कर रहे है।

 

गौरव यात्रा के पश्चात भाजपा पूरी तरह से चुनावी मोड में आ चुकी है। कांग्रेस ने पचपदरा में बड़ी रैली का आयोजन कर चुनावी तैयारियों का आगाज अवश्य कर दिया, लेकिन अभी तक उसका प्रचार अभियान गति नहीं पकड़ पाया है।

 

पच्चीस वर्ष से राजस्थान में हर पांच वर्ष के पश्चात सत्ता बदल जाती है। लोग हर बार नई सरकार चुन लेते है। ऐसे में अमित शाह के समक्ष सबसे बड़ी चुनौती इस परम्परा पर विराम लगाने की है। राजनीतिक विशलेषकों की निगाह इस ओर लगी है कि शाह आज गहलोत पर उनके घर में किस अंदाज में शब्दों के तीर चलाएंगे।

 

शाह को संगठन का बाजीगर कहा जाता है। बूथ प्रबंधन कौशल के साथ ही कार्यकर्ताओं में जोश का संचार करने में शाह माहिर माने जाते है। लेकिन पांच वर्ष से उपेक्षित कार्यकर्ताओं का जोश ठंडा पड़ा है। ऐसे में देखने वाली बात होगी कि वे किस अंदाज में मंत्र फूंकते है कि ढीले पड़ चुके कार्यकर्ता एक बार फिर खड़े होकर मारवाड़ में पार्टी का बिगुल बजा दे।

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