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वजन बढ़ने के डर से मीठा नहीं खाते है ये महाराजा, मारवाड़ी और थाई खाने के है दीवाने

वजन बढ़ने के डर से मीठा नहीं खाते है ये महाराजा, मारवाड़ी और थाई खाने के है दीवाने

SUNIL CHOUDHARY| Last Modified - Dec 19, 2017, 02:32 PM IST

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afraid of wait increase this king avoid sweet food
इस अंदाज में भोजन करते है जोधपुर के पूर्व महाराज गजसिंह।

जोधपुर। लोगों में हमेशा यह उत्सुकता रहती है कि जोधपुर के पूर्व महाराजा गजसिंह कैसा भोजन करते है। यह पूर्व महाराजा राजस्थानी और थाई भोजन को सबसे अधिक पसंद करते है। खासियत की बात यह है कि वजन बढ़ने के डर से ये महाराजा मीठा बिलकुल भी नहीं खाते है। हालांकि इन्हें गैस तक चलाना नहीं आता है, लेकिन एप्रिन पहन ये कई बार अपने किचन में पहुंच जाते है और वहां कर्मचारियों को गाइड कर अपनी पसंद का भोजन तैयार कराते है।
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ऐसा भोजन पसंद है इस महाराजा को...


- मारवाड़ रॉयल फैमिली के इस मुखिया को परम्परागत मारवाड़ी भोजन सबसे अधिक प्रिय है। उनका मानना है कि यहां के खाने में बहुत अधिक वैरायटी है। इसके अलावा उनको थाई भोजन बहुत पसंद है। उनका मानना है कि ये मसालेदार अवश्य होता है, लेकिन तेल नहीं होता। इसके अलावा उन्हें सीफूड और फ्रेंच स्टाइल में सॉस से तैयार भोजन भी अच्छा लगता है। लेकिन उनका कहना है कि ये भोजन आप रोजाना नहीं खा सकते। पूर्व महाराजा गजसिंह मीठा खाना पसंद नहीं करते। उनका मानना है कि मीठे खाने से वजन बढ़ जाता है। ऐसे में पसंद होने के बावजूद मैं मीठा खाने से बचता रहता हूं।


खड़े रहकर बनवाते है पसंद का खाना


- मारवाड़ के ये पूर्व नरेश अपनी व्यस्तताओं के बीच उम्मेद भवन की रसोई में अपने पसंद के व्यंजन तैयार करवाने का समय निकाल ही लेते है। हालांकि वे रोज ऐसा नहीं कर पाते, लेकिन कभी मूड जमने पर वे अपने रंग में आ जाते है और पहुंच जाते है रसोई में। उम्मेद भवन स्थित उनके निवास की रसोई में महाराजा आफ जोधपुर लिखा एक एप्रॅन हमेशा तैयार रहता है। वे अपनी रसोई में कई बार अलग-अलग शैली को मिलाकर या यों कहा जाए कि इनके फ्यूजन से अलग ही व्यंजन तैयार करते है। उनकी रसोई में दुनिया भर की कुकिंग रेसिपी पर लिखी अधिकांश पुस्तकें उपलब्ध है।


खाने से अधिक कंपनी महत्वपूर्ण


- पूर्व नरेश गजसिंह विशेष रूप से घर में बने राजस्थानी देसी खाने के शौकीन है। उनका मानना है कि इस तरह के खाने में बहुत वैरायटी है। साथ ही उनका मानना है कि खाने का स्वाद इस बात पर निर्भर करता है कि आप किसके साथ बैठ कर भोजन कर रहे हो। यदि साथ में बैठा व्यक्ति अच्छे खाने का शौकीन और जानकार है तो उसका अलग ही आनंद है। हालांकि वे स्वीकार करते है कि मैं बहुत अच्छा कुक नहीं हूं, लेकिन कौनसी चीज किसके साथ मिलाने से कैसी बनेगी ऐसे प्रयोग बहुत अच्छे से कर लेता हूं। ये प्रयोग रसायन विज्ञान की किसी प्रयोगशाला के समान ही होते है। इन्हें मूर्त रूप देने के लिए सहयोगियों की आवश्यकता रहती है। जैसे उन्होंने एक बार स्वीकार किया वे गैस नहीं जला सकते, लेकिन मैं फौज के बेहतरीन जनरल के समान रसोई की टीम को प्रॉपर वे में गाइड कर सकता हूं। पढाई के दौरान बरसों तक इंग्लैंड में रहने के दौरान उन्होंने वहां के खाने का बहुत गहराई से अध्ययन भी किया। ऐसे में वे थाई, चाइनीज और फ्रेंच खाने के भी शौकीन है।

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अपने निवास स्थान उम्मेद भवन पैलेस के सामने गजसिंह।
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अपनी पत्नी हेमलता राजे के साथ पूर्व महाराजा।
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इस तरह सजाई जाती है महाराजा के खाने की टेबल।
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अपनी पुत्री शिवरंजनी सिंह के साथ गजसिंह।
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अपनी पौत्री वराह राजे के साथ गजसिंह।
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