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छह हजार किलोमीटर की यात्रा कर यहां पहुंचते है हजारों पक्षी, देखने को उमड़ते है लोग

SUNIL CHOUDHARY | Last Modified - Dec 14, 2017, 12:26 PM IST

खींचन में इन दिनों हजारों कुरजां ने डेरा जमा रखा है। इन्हें देखने बड़ी संख्या में लोग पहुंच रहे है।
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    जोधपुर जिले के खींचन गांव के ऊपर ऐसे मंडराती है कुरजां।

    जोधपुर। जोधपुर जिले का खींचन गांव एक बार फिर हजारों प्रवासी पक्षी कुरजां के कलरव से गुंजायमान है। करीब छह हजार किलोमीटर लम्बा सफर तक कर साइबेरिया से यहां पहुंचे इन हजारों प्रवासी पक्षियों को देखने के लिए बड़ी संख्या में लोग यहां पहुंच रहे है। खींचन के लोग भी मेहमान बन यहां पहुंचे इन परिंदों का दिल खोल कर स्वागत कर रहे है। ऐसे कर रहे है सेवा...


    - इन परिंदों की बरसों से सेवा कर रहे सेवाराम का कहना है कि अब तक करीब 18 हजार कुरजां यहां पहुंच चुकी है। अगले कुछ दिन में इनकी संख्या पच्चीस हजार को पार कर जाएगी।
    - इन विदेशी मेहमानों को अभी रोजाना बारह क्विन्टल ज्वार खिलाई जा रही है। अब पक्षी बढ़ने के साथ इसकी मात्रा भी बढ़ाई जा रही है।
    - कुरजां के लिए दाना-पानी की व्यवस्था खींचन का जैन समाज करता है। कई बार अन्य समाज के लोग भी दिल खोलकर मदद करते है।
    - खींचन में हजारों कुरजां के एक साथ दाना चुगने के लिए बनाए गए चुग्गाघर का आकार भी इस बार ग्रामीणों के सहयोग से दो गुना कर दिया गया है।
    - ये पक्षी रात को गांव के निकट स्थित खेतों में चले जाते है। दिन निकलते ही भोजन के लिए गांव पहुंच जाते है। भोजन करने के बाद दोपहर में गांव के तालाब किनारे धूप में बैठे रहते है।
    - गांव के लोग सामूहिक रूप से इन मेहमानों की सुरक्षा करते है। इस गांव के आसपास आजतक किसी कुरजां का शिकार नहीं हो पाया है। वहीं घायल या बीमार पक्षियों के इलाज की भी अलग से विशेष व्यवस्था की हुई है।
    - इन पक्षियों के कारण गांव में पर्यटकों की आमद काफी बढ़ गई है। इससे कई लोगों को रोजगार मिलना शुरू हो गया है।


    इनकी टाइमिंग के कायल है पक्षी विशेषज्ञ


    - पक्षी विशेषज्ञ हेमसिंह गहलोत का मानना है कि कुदरत ने पक्षियों को कुछ विशेष क्षमता प्रदान की है। इस क्षमता के बल पर कुरजां साइबेरिया के मौसम में शुरू होने वाले बदलाव को पहले से जान लेती है कि अब मौसम बदलने वाला है।
    - मौसम में बदलाव शुरू होते ही हजारोंं की तादात में कुरजां भारतीय मैदानों की तरफ उड़ान भरना शुरू कर देती है। बगैर किसी जीपीएस की मदद के ये पक्षी करीब छह हजार किलोमीटर का सफर तय कर मारवाड़ पहुंच जाती है।
    - इन पक्षियों की टाइमिंग की गणना इतनी सटीक है कि इतने लम्बे सफर में एक दिन भी ऊपर-नीचे नहीं होता। खींचन में इनकी देखभाल करने वाले सेवाराम का कहना हैै कि कुछ बरस से कुरजां लगातार तीन सितम्बर को यहां पहुंच रही है और इस बार भी ऐसा ही हुआ।
    - इस बारे में गहलोत का कहना है कि विशेषज्ञ भले ही मौसम चक्र में बदलाव का दावा करें लेकिन कुरजां की यात्रा और इसके आगमन से स्पष्ट है कि साइबेरिया के मौसम चक्र में कोई बदलाव नहीं आया है।
    - सर्दी के आगमन के साथ ही कुरजां के समूह वहां से उड़ान भरना शुरू कर देते है और मारवाड़ में रातों के ठंडा होना शुरू होने के साथ यहां पहुंच जाती है।

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    इन दिनों खींचन में हर तरफ कुरजां के झुंड नजर आते है।
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    अब तक यहां करीब 18 हजार कुरजां पहुंच चुकी है।
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    इन्हें रोजाना बारह क्विंटल दाना डाला जा रहा है।
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    गांव के लोग इनकी देखभाल करते है।
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    प्रवासी पक्षी कुरजां पूरी सर्दी यहां रहेगी।
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    अगले कुछ दिन में इनकी संख्या पच्चीस हजार तक पहुंच जाएगी।
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    खींचन के चुग्गाघर में बैठी कुरजां।
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Web Title: After Travel Six Thousand Kilometer Travel Demoiselle Crane Reached Here
(News in Hindi from Dainik Bhaskar)

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