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तीन दिन नहीं होगी जलापूर्ति

तीन दिन नहीं होगी जलापूर्ति

Dainik Bhaskar

Dec 28, 2017, 03:29 PM IST
वाटर कैनन से पानी की बौछार कर ए वाटर कैनन से पानी की बौछार कर ए

जोधपुर। इंडियन एयर फोर्स ने पांच दशक से अधिक समय तक अपने सबसे अधिक भरोसेमंद फाइटर जेट मिग- 21 को विदाई दे दी। बीकानेर के नाल एयर बेस पर एयर मार्शल बीएस धनोआ ने इस विमान से अंतिम उड़ान भरी। इसके बाद इसे शानदार तरीके से विदाई दे दी गई। हालांकि मिग-21 का अपग्रेड वर्जन बाइसन अभी एयर फोर्स का हिस्सा बना रहेगा। ऐसे आयोजित किया गया समारोह…

- भारत के पास आठ सौ से अधिक मिग-21 श्रेणी के विमान रहे। करीब 53 बरस से एयर फोर्स का मुख्य फाइटर रहे इस बेहतरीन जेट विमान को आज बीकानेर के नाल एयर बेस पर विदाई दे दी गई। अब यह एयर फोर्स का हिस्सा नहीं रहेगा। ​- मिग-21 के रिटायरमेंट समारोह को यादगार बनाने के लिए एयर चीफ मार्शल बीएस धनोआ ने इस विमान को अंतिम बार उड़ाया। वाटर कैनन से पानी की बौछार के बीच एयर चीफ मार्शल ने इसे उड़ा अपनी पुरानी यादों को ताजा किया। उनके इस विमान को वापस नीचे लेकर आने के साथ यहां तैनात 108 स्क्वाड्रन के सभी मिग-21 विमान को रिटायर कर दिया गया।

ऐसा रहा मिग-21 का सफर

- तत्कालीन सोवियत संघ में निर्मित इस सुपर सोनिक विमान को पहली बार वर्ष 1964 में इंडियन एयर फोर्स में शामिल किया गया था। वर्ष 1965 में पाकिस्तान के साथ युद्ध शुरू होने तक इसे उड़ाने में भारतीय पायलट्स पूरी तरह से प्रशिक्षण नहीं ले पाए थे। ऐसे में इसका उपयोग नहीं किया जा सका। इसके बाद वर्ष 1971 के युद्ध में इस फाइटर जेट ने अपनी उपयोगिता साबित की। दुनिया के बेहतरीन फाइटर जेट्स में शुमार मिग-21 का बेड़ा एयर फोर्स में बढ़ता गया। आठ सौ से अधिक मिग-21 विमानों ने बरसों तक भारत के वायुक्षेत्र की रक्षा करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

फ्लाइंग कोफिन के नाम से बदनाम भी हुआ

- मिग-21 विमानों के बढ़ते हादसों से कारण एयर फोर्स में आम बोलचाल में इसे फ्लाइंग कोफिन का नाम दे दिया गया। आठ सौ से अधिक विमानों में से आधे हादसों का शिकार हो गए। वर्ष 1970 से लेकर अब तक इन हादसों में एयर फोर्स को सौ से अधिक पायलट्स से हाथ धोना पड़ा।

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