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लाइम लाइट से दूर सामान्य बच्चों के समान पढ़ रही है यह प्रिंसेज

लाइम लाइट से दूर सामान्य बच्चों के समान पढ़ रही है यह प्रिंसेज

SUNIL CHOUDHARY | Last Modified - Dec 09, 2017, 10:22 AM IST

जोधपुर। मारवाड़ का पूर्व राजघराने की वराह राजे रविवार को छह साल की हो जाएगी। पूर्व महाराजा गजसिंह की पौत्री वराह राजे अकसर उनके साथ नजर आती है, हालांकि राजपरिवार का प्रयास रहता है कि वह लाइम लाइट से दूर ही रहे। वराह अभी राजमाता कृष्णा कुमारी स्कूल में पढ़ाई कर रही हैं। कौन है वराह कुमारी राजे...


- जोधपुर के पूर्व महाराजा गजसिंह के इकलौते पुत्र शिवराज सिंह और गायत्री कुमारी की पुत्री वराह राजे का जन्म दस दिसम्बर 2011 को हुआ। अरबों रुपए की सम्पत्ति के मालिक यह राजपरिवार दुनिया के सबसे बड़े महल के रूप में प्रसिद्ध उम्मेद भवन पैलेस में निवास करता है।
- वर्ष 2005 में पोलो खेलते समय नीचे गिरने के कारण सिर में लगी चोट से उसके पिता शिवराज सिंह अभी तक पूरी तरह से उबर नहीं पाए है। इस कारण वे सार्वजनिक समारोह से दूर ही रहते है। ऐसे में वराह हमेशा अपनी दादी पूर्व महारानी हेमलता राजे के साथ साए के समान चिपकी रहती है। वह अपने दादा-दादी के साथ सार्वजनिक समारोह में नजर आती है।


स्कूल में सामान्य है यह प्रिंसेज


- अपने परिवार की ओर से संचालित स्कूल में पढ़ने वाली इस प्रिंसेज के बारे में नाम न छापने की शर्त पर एक शिक्षक ने बताया कि स्कूल में वे अन्य बच्चों के समान ही रहती है। उन्हें किसी तरह की विशेष सुविधा प्रदान नहीं की हुई है। पढ़ने में होशियार यह प्रिंसेज हमेशा समय पर अपना होमवर्क पूरा कर लाती है। अन्य बच्चों के साथ वराह का व्यवहार भी बहुत ही दोस्ताना रहता है। उम्मेद भवन के निकट स्थित इस स्कूल में रोजाना यह अपनी कार से पहुंचती है।

ऐसी है ये स्कूल

- राजमाता कृष्णा कुमारी ने मारवाड़ की लड़कियों को स्तरीय स्कूली शिक्षा उपलब्ध कराने के लिए एक स्कूल खोलने का प्रस्ताव रखा था। इस पर पूर्व महाराजा गजसिंह ने अपनी राइकाबाग स्थित अपनी दो पुरानी हवेलियों को मिलाकर करीब पांच एकड़ क्षेत्रफल पर वर्ष 1992 में अपनी माता के नाम पर राजमाता कृष्णाकुमारी गर्ल्स स्कूल की शुरुआत की। पूर्व महाराजा गजसिंह स्वयं इसके चेयरमैन है।

- इस स्कूल में प्रवेश के समय करीब एक लाख रुपए सालाना फीस ली जाती है। इसके बाद प्रत्येक कक्षा के अनुसार सालाना 75 हजार से एक लाख रुपए तक फीस ली जाती है।

ये है वराह के माता-पिता

- वराह के पिता 43 वर्षीय शिवराज सिंह जोधपुर के पूर्व राजघराने के उत्तराधिकारी है। मार्च 2010 में उनका विवाह उत्तराखंड के आसकोट रियासत की राजकुमारी गायत्री कुमारी के साथ हुआ। पोलो के बेहतरीन खिलाड़ी रहे शिवराज सिंह फरवरी 2005 में जयपुर में घोड़े से नीचे गिरने के कारण गंभीर रूप से घायल हो गए थे। अब उनकी सेहत में काफी सुधार हुआ है, लेकिन वे सार्वजनिक समारोह से दूर ही रहते है। जबकि वराह की मां गायत्री कुमारी राजपरिवार से जुड़े समारोह में अकसर नजर आती है। वराह का एक छोटा भाई दो वर्षीय सिराज देव सिंह है।


विदेश में पढ़ चुके है परिवार के अधिकांश सदस्य


- वराह राजे के शाही परिवार के अधिकांश सदस्य विदेश में पढ़ाई कर चुके है। उनके दादा पूर्व महाराजा गजसिंह व पिता शिवराज सिंह व बुआ ने अपनी प्रारंभिक शिक्षा अजमेर में पूरी की। इसके बाद वे विदेश में पढ़ाई करने चले गए। वहीं उनकी दादी हेमलता राजे व मां गायत्री कुमारी की शिक्षा शिमला और दिल्ली में हुई।

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Web Title: Photos: raajsthaan ke liye bahut khaas ye bachchi, kuchh aisi hai iski kahani
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