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रेगिस्तानी गांव के सरकारी स्कूल से निकल कर अब अंग्रेजी में क्रिकेट कमेंट्री कर रहा है यह युवा

रेगिस्तानी गांव के सरकारी स्कूल से निकल कर अब अंग्रेजी में क्रिकेट कमेंट्री कर रहा है यह युवा

Dainik Bhaskar

Dec 19, 2017, 11:05 AM IST
जोधपुर जिले के एक छोटे से गांव जोधपुर जिले के एक छोटे से गांव

जोधपुर। रेगिस्तान के बीच स्थित एक गांव के सरकारी स्कूल के हिन्दी माध्यम में पढ़ने वाले किसी छात्र के लिए अंग्रेजी किसी हव्वा से कम नहीं होती। लेकिन ऐसे ही एक गांव से निकल कर जोधपुर के देवेन्द्र कुमार अब अंतरराष्ट्रीय स्तर पर क्रिकेट मैचों में कमेंट्री कर रहे है। कमेंट्री के क्षेत्र में रिटायर्ड खिलाड़ियों के दबदबे के बीच वे अपना मुकाम बनाने जा रहे है। ऐसे सीखा अंग्रेजी बोलना...


- जोधपुर जिले के रेगिस्तान क्षेत्र क्षेत्र शेरगढ़ के एक छोटे से गांव चतरपुरा में रहकर गांव की सरकारी स्कूल में पढ़ने वाले किसी छात्र के लिए अंग्रेजी अपने आप में बड़ी डरावनी होती है। देवेन्द्र ने इसी अंग्रेजी में महारत हासिल करने की ठानी।
- बगैर किसी ट्यूटर की मदद से उन्होंने अपने दादा के रेडियो से बीबीसी और वॉयस ऑफ अमेरिका के प्रोग्राम सुनने शुरू किए। वॉयस ऑफ अमेरिका पर तड़के सवा तीन बजे डायनामिक इंग्लिश नाम से एक प्रोग्राम आता था। इस प्रोग्राम में अंग्रेजी के शब्दों को बहुत धीमी रफ्तार के साथ स्पष्ट उच्चारण के साथ बोला जाता था। देवेन्द्र ने इस प्रोग्राम को महिनों तक सुन अपनी अंग्रेजी बोलने के उच्चारण को सुधारा।

आसान नहीं थी शुरुआत


- देवेन्द्र का कहना है कि सिर्फ अंग्रेजी बोलने से ही कोई कमेंटट्रेटर नहीं बन जाता। इसके लिए खेल की पर्याप्त जानकारी होना भी अनिवार्य है। उन्होंने एक के बाद एक कर कई खेलों की जानकारी पढ़-पढ़ कर हासिल की। इसके बाद कई मुश्किलों का सामना किया लेकिन एक बेहतरीन कमेंटट्रेटर बनने के अपने लक्ष्य को छोड़ा नहीं। आखिरकार उन्हें डीडी स्पोर्ट्स में कमेंट्री करने का अवसर मिलना शुरू हुआ।


ऐसे मिला अवसर


- डीडी स्पोर्ट्स के लिए काम करने के दौरान उनकी मुलाकात न्यूजीलैंड के पूर्व खिलाड़ी और वर्तमान में बरसों से कमेंट्री करने वाले डैनी मॉरिसन से हुई। मॉरिसन उनसे बहुत प्रभावित हुए और उन्होंने देवेन्द्र का नाम कई जगह पर चलाया। इसी आधार पर उन्हें हाल ही शारजाह में आयरलैंड और अफगानिस्तान के बीच आयोजित एक दिवसीय अंतरराष्ट्रीय मैचों के दौरान वर्ल्ड सीरिज की तरफ से कमेंट्री करने बुलाया गया। उन्होंने तीन मैचों में कमेंट्री की।


बीबीसी रेडियो है लक्ष्य


- देवेन्द्र का कहना है कि उनका लक्ष्य बीबीसी रेडियो पर आने वाली टेस्ट मैच कमेंट्री टीम का हिस्सा बनने का है। इसके लिए वे पूरा प्रयास कर रहे है। क्रिकेट कमेंट्री के लिए यह दुनिया का सबसे पुराना रेडियो चैनल है।


अलग क्वालिटी से मिलता है अवसर


- क्रिकेट कमेंट्री के क्षेत्र में रिटायर्ड खिलाड़ियों ने अपना दबदबा कायम कर रखा है। इस बारे में देवेन्द्र का कहना है कि ऐसे में अवसर मुश्किल से ही मिलते है, लेकिन आपके पास बेहतरीन स्किल हो तो कोई उसे नजर अंदाज नहीं कर सकता है।

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