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चालीस हजार भारतीय सैनिकों के रण कौशल से थर्राया थार का रेगिस्तान

चालीस हजार भारतीय सैनिकों के रण कौशल से थर्राया थार का रेगिस्तान

Dainik Bhaskar

Dec 20, 2017, 10:12 AM IST
indian army shown its fire skill at thar desert

जोधपुर। पाकिस्तान बॉर्डर के नजदीक थार का रेगिस्तान इन दिनों टैंकों व तोप के गोलों से थर्रा रहा है। हर तरफ गोलों के धमाकों की गूंज सुनाई दे रही है। भारतीय सेना के करीब चालीस हजार सैनिक अपने पूरे साजो सामान के साथ हमेशा विजयी नाम के युद्धाभ्यास में जुटे है। दुश्मन के क्षेत्र में त्वरित गति के साथ गहराई तक जबरदस्त हमला बोलने की क्षमता का परीक्षण करने के साथ सेना परमाणु और रासायनिक हमलों से निपटने का भी अभ्यास कर रही है। ऐसे चल रहा है युद्धाभ्यास...


- भारतीय सेना की दक्षिणी कमान के चालीस हजार से अधिक जवान दो माह से अपनी क्षमताओं का परीक्षण करने में जुटे है। इसके तहत अलग-अलग युद्ध फॉर्मेशन के आधार पर अपनी क्षमता को परख रहे है।
- सेना के प्रवक्ता का कहना है कि हमेशा विजयी नाम के इस युद्धाभ्यास में प्रारंभिक प्रशिक्षण के बाद एकीकृत रूप से टैंक, बख्तरबंद गाड़ियां व वायुसेना के साथ पूरा तालमेल बिठाते हुए सैनिक इस युद्धाभ्यास को आगे बढ़ा रहे हैं।
- यूनिट एवं फार्मेशन अपने रण कौशल और रणनीति को उच्च कोटि का बनाने के लिए पिछले दो महीनों से प्रशिक्षण के दौर से गुजर रहे है। अब अगले कुछ दिनों में आला अधिकारियों के समक्ष वे अपने कौशल का प्रदर्शन करेंगे।
- इस युद्धाभ्यास में सर्विलान्स नेटवर्क की मदद से सटीक हमले और संयुक्त संचालन पर आधारित रणनीतिक और सामरिक उपकरणों का भी परीक्षण किया जाएगा। पारंपरिक युद्ध के अलावा, सैनिकों को रासायनिक और परमाणु आकस्मिकता के लिए भी अभ्यास कराया जा रहा है।
- इस युद्धाभ्यास का उद्देश्य एकीकृत रूप से दुश्मन के इलाकों की गहराई में जाकर सशस्त्र बलों की क्षमता का मूल्यांकन करना है। साथ ही सेना और वायु सेना के बीच एक उच्च स्तर के तालमेल का भी प्रदर्शन किया जाएगा।


ये है भारतीय सेना की कमान


- नई दिल्ली स्थित मुख्यालय के अलावा केन्द्रीय कमान, पूर्वी कमान, उत्तरी कमान, दक्षिण कमान, दक्षिण-पश्चिम कमान, पश्चिम कमान और सेना प्रशिक्षण कमान है।


ऐसी है दक्षिण कमान


- दक्षिण कमान का मुख्यालय पुणे में है। इस कमान में 41 वां तोपखाना, 12 कोर, चौथा बख्तरबंद दल, 340 वां यांत्रिक दल, 11 इन्फैंट्री डिवीजन, 12 इन्फैंट्री डिवीजन, 21 कोर सहित बड़ी संख्या में अन्य यूनिट शामिल है। इस कमान का दायरा पुणे से लेकर जोधपुर, भोपाल, अहमदाबाद व झांसी तक फैला है। इन स्थानों से सैनिक अपने पूरे साजो सामान के साथ युद्धाभ्यास में पहुंचे हुए है। इनमें से दो स्ट्राइक कोर भी शामिल है। युद्धकाल में ये दोनों कोर सबसे पहले रणक्षेत्र में पहुंच मोर्चा संभालती है।

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