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उम्मेद भवन पैलेस में एक बार फिर सजेगा दरबार, हाथों में तलवार लेकर पहुंचेंगे दरबारी

उम्मेद भवन पैलेस में एक बार फिर सजेगा दरबार, हाथों में तलवार लेकर पहुंचेंगे दरबारी

Danik Bhaskar | Dec 19, 2017, 12:01 PM IST
अपने जन्मदिन पर पूर्व महाराजा अपने जन्मदिन पर पूर्व महाराजा

जोधपुर। महज चार वर्ष की उम्र में मारवाड़ राजघराने की गद्दी पर बैठने वाले पूर्व महाराजा गजसिंह बुधवार को तिथि अनुसार अपना 70वां जन्मदिवस मनाएंगे। इस दिन उम्मेद भवन पैलेस में एक बार फिर पुराना दौर जीवंत होगा। बाकायदा दरबार लगेगा और मारवाड़ के पूर्व राजपरिवार, पूर्व जागीरदार व गणमान्य नागरिक पूर्व महाराजा को शुभकामनाएं देंगे। इस समारोह में आने वालों के लिए मारवाड़ी पगड़ी पहन कर आना अनिवार्य होगा। मर्दाना दरबार में मुख्य समारोह...


- उम्मेद भवन की बारादरी में प्राचीन परम्परानुसार बैठक व्यवस्था की जाएगी। सबसे पहले राजपुरोहित व राजपण्डित मंत्रोच्चारण के साथ पूर्व महाराजा की तिलक आरती करेंगे। उसके बाद नजर निछरावल(गिफ्ट प्रदान करेंगे) शुरू होगी। सबसे पहले उनके पुत्र शिवराज सिंह नजर निछरावल करेंगे। उसके बाद परिवार के अन्य सदस्य व जागीरदार बारी-बारी से नजर निछरावल कर अपनी शुभकामनाएं देंगे।
- इस समारोह में आने वाले सभी पूर्व जागीरदार अपनी परम्परागत ड्रेस में यहां पहुंचते है। अमूमन सभी अपने सिर पर मारवाड़ी पगड़ी बांधने के साथ अपने हाथों में तलवार लिए रहते है।

दो बार मनाते है जन्मदिन

- पूर्व महाराजा गजसिंह साल में दो बार अपना जन्मदिन मनाते है। एक बार तिथि के अनुसार बीस दिसम्बर को अपना जन्मदिन मनाएंगे। इसमें परम्परागत तरीके से दरबार का आयोजन होता है। दूसरी बार तारीख के अनुसार तेरह जनवरी को। इस दिन आम जनता उन्हें शुभकामनाएं देने पहुंचती है और महाराजा केक काट अपना जन्मदिन मनाते है।


कौन है गजसिंह


- मारवाड़ रियासत में तेरह जनवरी 1948 को तत्कालीन महाराजा हनवंत सिंह के यहां उनका जन्म हुआ। 26 जनवरी 1952 को उनके पिता महाराजा हनवंत सिंह का प्लेन क्रैश होने के कारण निधन हो गया।
- इस कारण महज चार वर्ष की आयु में मारवाड़ की गद्दी पर उनका राजतिलक किया गया। बाद में उन्होंने अपनी पढ़ाई इंग्लैंड से पूरी की और वापस जोधपुर पहुंच अपनी विरासत को संभाला।
- सत्तर के दशक में इंग्लैंड से उनके लौटने के समय शाही विरासत पर संकट के बादल मंडरा रहे थे। शाही परिवारों को केन्द्र सरकार की ओर से देय सहायता बंद करने के कारण संकट काफी बढ़ गया।
- ऐसे में उन्होंने पहल कर देश में निर्मित अंतिम महल उम्मेद भवन को एक होटल में बदल दिया। इसके बाद अन्य स्रोत से भी उन्होंने राजपरिवार की आय बढ़ाई। उसी का नतीजा है कि आज यह परिवार देश के नामचीन शाही परिवारों में शुमार है।