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ऐसे थे ये महाराजा

ऐसे थे ये महाराजा

Dainik Bhaskar

Jan 25, 2018, 04:18 PM IST
जोधपुर के महाराजा हनवंत सिंह। जोधपुर के महाराजा हनवंत सिंह।

जोधपुर। देश की आजादी के दौरान कभी भारत तो कभी पाकिस्तान में अपनी रियासत का विलय करने के प्रयास से दोनों पक्षों की नींद उड़ा कर रख देने वाले मारवाड़ के महाराजा हनवंत सिंह का हमेशा विवादों से नाता रहा। देश के प्रथम लोकसभा चुनाव में मिली भारी बढ़त की खुशी में अपनी प्रेयसी जुबैदा को साथ लेकर घूमने निकले हनवंत सिंह का प्लेन 66 वर्ष पूर्व आज ही के दिन क्रैश हो गया। इसमें वे दोनों मारे गए। उनके निधन पर देश में लोकसभा का पहला उप चुनाव जोधपुर में कराना पड़ा था। ऐसे थे महाराजा हनवंत सिंह…

- मारवाड़ रियासत के उत्तराधिकारी के रूप में हनवंतसिंह का जन्म 16 जून 1923 को हुआ। हनवंतसिंह का पहला विवाह वर्ष 1943 में ध्रांगदा की राजकुमारी कृष्णाकुमारी के साथ हुआ। नववधू कृष्णा कुमारी के गृह प्रवेश के अवसर पर विश्व प्रसिद्ध उम्मेद भवन का उद्घाटन किया गया। देश आजाद होने से कुछ दिन पूर्व नौ जून 1947 को वे मारवाड़ के महाराजा बने। वर्ष 1947 में हनवंतसिंह को इंग्लैंड की सैंडा मैकायर्ड से प्यार हो गया। उन्होंने वर्ष 1948 में शादी कर ली। तत्कालीन गृहमंत्री सरदार पटेल ने हनवंत की मां को फोन कर उनके दूसरे विवाह की जानकारी दी। यह शादी डेढ़ वर्ष तक ही चल पाई और सैंड्रा इंग्लैंड चली गई। हनवंत भी उसके पीछे इंग्लैंड गए, लेकिन बात बन नहीं पाई।

जुबैदा को दे बैठे दिल

- वर्ष 1949 में उम्मेद भवन में आयोजित एक समारोह में मुंबई से नाचने के लिए आई जुबैदा को हनवंतसिंह दिल दे बैठे। हनवंतसिंह ने जुबैदा से शादी करने का निर्णय कर लिया। उनके इस निर्णय का जोरदार विरोध हुआ। उनके परिजनों का कहना था कि फिल्मों में नाचने वाली और तलाकशुदा ऊपर से मुस्लिम और एक बच्चे की मां से विवाह करना उचित नहीं होगा। सारे विरोध को दरकिनार कर हनवंतसिंह ने 17 दिसम्बर 1950 को ब्यावर में आर्य समाज में जुबैदा का नया नामकरण विद्यारानी कर शादी कर ली। इसका विरोध हुआ और उन्हें उम्मेद भवन में जुबैदा के साथ रहने की अनुमति नहीं मिली। ऐसे में वे मेहरानगढ़ फोर्ट में रहने लगे। दो अगस्त 1951 को जुबैदा ने एक पुत्र टूटू को जन्म दिया। जिसकी वर्ष 1981 में हत्या हो गई।

प्रेयसी के साथ क्रैश हुआ विमान

- पहले आम चुनाव में मिली भारी बढ़त के बाद अपना हवाई जहाज लेकर 26 जनवरी 1952 को जुबैदा के साथ घूमने निकले। पाली जिले में उनका विमान क्रैश हो गया। इस हादसे में वे जुबैदा के साथ मारे गए। उनके विमान के नीचे गिरने का कारण कभी सामने नहीं आ सका। ऐसा माना जाता है कि कलाबाजी खाने के दौरान नीचे आया उनका विमान वापस ऊपर नहीं उठ पाया।

विवादों से हमेशा रहा नाता

- हनवंतसिंह के पिता का देश आजाद होने से कुछ माह पूर्व निधन हो गया। महज 24 वर्ष वर्ष की उम्र में वे देश की सबसे बड़ी रियासत के महाराजा बन गए। उसी वर्ष उन्हें भारत या पाकिस्तान में मारवाड़ रियासत के विलय का निर्णय करना था। लेकिन वे पाकिस्तान के संस्थापक मोहम्मद अली जिन्ना की बातों में उलझ गए। जिन्ना ने उन्हें खाली पेपर पर हस्ताक्षर कर थमा दिया कि वे जो चाहे मांग ले और बदले में पाकिस्तान में विलय पर सहमति जता दे। बाद में बड़ी मुश्किल से सरदार पटेल ने उन्हें मारवाड़ का भारत में विलय करने के लिए राजी किया।

चेतवानी के बावजूद लड़ा चुनाव

- देश के पहले आम चुनाव में उन्होंने पूरे मारवाड़ में लोकसभा और विधानसभा चुनाव में अपने प्रत्याशी उतारने का निर्णय किया। कांग्रेस ने इसका जोरदार विरोध किया और उन्हें चेतावनी दी कि वे नतीजे भुगतने को तैयार रहे। इसके बावजूद उन्होंने अपने प्रत्याशी मैदान में उतारे और उनके प्रत्याशियों ने शानदार जीत हासिल की, लेकिन अपनी इस जीत को देखने के लिए वे जिंदा नहीं रहे। उनके निधन के कारण देश में लोकसभा का पहला उपचुनाव जोधपुर में कराना पड़ा था।

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जोधपुर के महाराजा हनवंत सिंह।जोधपुर के महाराजा हनवंत सिंह।
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